इंडियन प्लेयर बैट में रबर लगाकर खेलते हैं: श्रीलंकन बैट्समैन राजपक्षे का आरोप; बाद में कहा- मैं तो तारीफ कर रहा था भाई
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भारतीय टीम गुरुवार (12 फरवरी) को T20 वर्ल्ड कप 2026 में अपना दूसरा मैच नामीबिया से खेलेगी। (फोटो क्रेडिट - @BCCI)
स्पोर्ट्स डेस्क. श्रीलंकाई बैट्समैन भानुका राजपक्षे ने भारतीय खिलाड़ियों पर "स्पेशल बैट" इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। राजपक्षे ने कहा कि भारतीय बल्लेबाज ऐसे बैट इस्तेमाल करते हैं जिनसे बहुत ज्यादा पावर निकलती है। बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा- मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा था उनकी तारीफ कर रहा था।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में आयरलैंड के खिलाफ जीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजपक्षे ने कहा - इंडियन प्लेयर के बैट बाकी टीमों से काफी बेहतर लगते हैं। ऐसा महसूस होता है मानो बैट पर रबर की कोई लेयर चढ़ी हो। साथ ही बोले कि ऐसे बैट बाजार में नहीं मिलते। प्लेयर इस बात को जानते हैं।
बाद में सफाई दी
एक सोशल मीडिया पोस्ट में राजपक्षे ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनका इरादा भारतीय बल्लेबाजों की तारीफ करना था। आरोप लगाना नहीं।
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2024 वर्ल्ड कप के बाद बदली टीम इंडिया
2024 T20 वर्ल्ड कप के बाद से भारतीय टीम ने अपना अप्रोच पूरी तरह से बदल दिया है। अब टीम इंडिया पहली बॉल से ही अग्रेसिव होकर खेलती है। भारत ने कई बार 250 से ज्यादा रन बनाए हैं। सबसे ज्यादा बार 200 रन के आंकड़े तक पहुंचने वाली टीम बन गई है। भारत मैच जीतने में भी आगे है। इंडियन बैट्समैन की इस पावर-हिटिंग ने अपोजिट टीमों को डरा कर रखा है। शायद इसी वजह से ऐसे अजीब बयान आ रहे हैं।
ICC के नियम क्या हैं
ICC के नियम साफ कहते हैं कि बैट सिर्फ लकड़ी का होना चाहिए। उसमें किसी तरह का दूसरा मैटेरियल नहीं हो सकता। मैच के दौरान बैट की जांच भी होती रहती है। अगर कोई गलत चीज मिली तो कार्रवाई हो सकती है।
सच क्या है
इंटरनेशनल खिलाड़ी आम मार्केट में मिलने वाले बैट इस्तेमाल नहीं करते। उनके लिए खास तौर पर बैट डिजाइन किए जाते हैं। वजन, आकार और बैलेंस हर खिलाड़ी की जरूरत के हिसाब से बनाए जाते हैं।
स्पॉन्सर तो बस Logo लगाते हैं
रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ी अपने खेल के हिसाब से बैट बनवाते हैं। उदाहरण के लिए कोहली और रोहित डकबिल प्रोफाइल पसंद करते हैं। उनके बैट का वजन एक जैसा होता है जिससे पिक अप और कंट्रोल बेहतर होता है। बैट पर SG, SS, MRF, या CEAT नाम हो सकते हैं। कभी कंपनी बस अपना लोगो लगा देती है। असल में इसे कोई दूसरा स्पेशलिस्ट बनाता है।

