रन-विकेट और जीत-हार छोड़िए: नेता-जनता के अलावा BCCI Vs PCB; इस खेल के मैदान में भारत-पाकिस्तान जंग जैसा माहौल क्यों
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स्पोर्ट्स डेस्क. आपको पाकिस्तान में खेलना ही पड़ेगा….आपको भारत में खेलना ही होगा…बायकॉट करेंगे…शर्तें माननी पड़ेंगी…चलिए बीच का रास्ता निकाल लेते हैं….और फिर विन-विन यानी बल्ले-बल्ले…न तुम जीते और न हम हारे….भारत और पाकिस्तान के दरमियान कई साल से क्रिकेट के पहले यही सबकुछ होता है। इसकी जितनी मिसाल दीजिए…कम हैं। हालांकि, सच्चाई भी यही है कि भारत और पाकिस्तान का क्रिकेट मैदान पर मुकाबला कभी सिर्फ खेल नहीं रहा, लेकिन एक दौर वो भी था जब चर्चा मैदान की टक्कर पर होती थी। कौन बल्लेबाज किस गेंदबाज पर भारी पड़ेगा? कौन कितने विकेट लेगा, सचिन-विराट क्या करेंगे? शोएब, वकार और वसीम कितने विकेट लेंगे…और ऐसे ही कई सवाल।
अब हालात बदल गए हैं। मैच से पहले लोगों की चिंता रन-विकेट को लेकर कम और हाथ मिलाने, बयानबाजी और सियासी बयान को लेकर ज्यादा होती है। इस माहौल में क्रिकेट की असली चमक फीकी पड़ती दिख रही है।
सचिन Vs शोएब-अकरम, वकार-सकलैन
पहले जब भारत–पाकिस्तान का मैच होता था तो फैंस के मन में रोमांच और घबराहट होती थी। लोग सोचते थे…क्या सुनील गावस्कर इमरान खान की स्विंग को संभाल पाएंगे? क्या सचिन तेंदुलकर वसीम अकरम की तेज गेंदों पर छक्का मारेंगे? क्या रोहित शर्मा शाहीन अफरीदी की गेंद पर खूबसूरत शॉट खेलेंगे? लेकिन अब ये सवाल पीछे छूट गए हैं।
फौजी अंदाज मैदान में
पिछले एशिया कप से माहौल बदला हुआ दिखा। मैच से पहले असली मुद्दा ये बन गया कि खिलाड़ी हैंडशेक करेंगे या नहीं। क्या कोई खिलाड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना को लेकर बयान देगा? क्या मैदान पर कोई ऐसा इशारा होगा, जिसे लोग राजनीतिक संदेश मान लें? यानी खेल से ज्यादा ध्यान इन बातों पर रहने लगा है। पाकिस्तानियों ने तो सीधा-सीधा आर्मी जेस्चर अपना लिया।
बायकॉट की बातें जारी
हाल ही में टी-20 वर्ल्ड कप के मैच से पहले तो राजनीतिक बयानबाजी इतनी बढ़ गई कि मैच रद्द होने की नौबत आ गई। इतिहास में ये भी पहली बार हुआ कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बाॅयकाट की धमकी देने लगे। भारत में भी कुछ लोगों ने कहा कि अगर मैच न हो तो कोई अफसोस नहीं। फिर कुछ दिन में बायकॉट का फैसला गया डस्टबिन में। माना गया कि फाइनेंशियल कम्पलसन्स के चलते मैच होना जरूरी है। सवाल ये है कि जब मैच होना ही था तो ये फिजूल बयानबाजी क्यों? और इससे भी बड़ी बात नेताओं के फैसलों का खामियाजा फैंस और खिलाड़ी क्यों भुगतें?
क्रिकेट के लिए माहौल मुफीद नहीं
खिलाड़ियों पर भारी दबाव होता है। पिछले एशिया कप में भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ियों ने निजी तौर पर माना कि माहौल बहुत परेशान करने वाला था। मैच खत्म होने के बाद भी हाथ नहीं मिले। हर मुस्कान, हर इशारे को अलग नजर से देखा जा रहा था। अगर कोई खिलाड़ी विपक्षी की तारीफ कर दे, तो उसे गलत समझा जा सकता है। अगर ज्यादा एग्रेसिव दिखे तो भी आलोचना झेलनी पड़ती है।
1996 वर्ल्ड कप का किस्सा
1996 वर्ल्ड कप में आमिर सोहेल का उदाहरण आज भी याद किया जाता है। उन्होंने एक चौका लगाकर हमारे बॉलर वेंकटेश प्रसाद को इशारे के जरिए उकसाया, अगली बॉल पर प्रसाद ने उनके डंडे बिखेर दिए। पाकिस्तान मैच हार गया और यह घटना आज भी चर्चा में रहती है। हाल में एशिया कप में हारिस रऊफ ने भी भीड़ की बातों में आकर कुछ इशारे किए, लेकिन फाइनल में उनकी गेंदबाजी से पाकिस्तान को हारना पड़ा।
यंग प्लेयर कैसे खेलगे
आने वाले समय में नए और युवा खिलाड़ियों के लिए यह और मुश्किल होगा। जैसे ईशान किशन, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ बहुत कम मैच खेले हैं। वह तेज खेलते हैं और भावुक भी माने जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वह बड़े मुकाबले में अपने गुस्से और जोश पर काबू रख पाएंगे? पहले सवाल होता था कि वह शाहीन अफरीदी की बाॅल पर शॉट कैसे खेलेंगे। अब सवाल यह है कि वह अपने भावनाओं को कैसे संभालेंगे। अच्छा ये है कि टीम इंडिया को प्रेशर हैंडल करने की पुरानी आदत है और यही हमारा प्लस पॉइंट भी है। तो चलिए देखते हैं इस बार सियासी मैच के बाद खेल के मैदान में क्या होने वाला है। तब तक जुड़े रहिए राज एक्सप्रेस के साथ…।


