किशोर त्रिवेदी की देन है जस्सी: बुमराह के टैलेंट को कोच KT ने ही पहचाना, आज तो जस्सी जैसा कोई नहीं
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स्पोर्ट्स डेस्क. T20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ इंडिया की जीत में जसप्रीत बुमराह ने एक बार फिर कमाल कर दिया। उनकी अच्छी बाॅलिंग की वजह से भारत फाइनल में पहुंचा। क्या आप जानते हैं कि इस महान गेंदबाज को सबसे पहले तराशने वाले कोच कौन थे।
यह कहानी है अहमदाबाद के कोच किशोर त्रिवेदी की। प्यार से उन्हें KT सर कहा जाता है। किशोर ने ही बुमराह के अनोखे एक्शन को पहचाना और उन्हें दुनिया का बेहतरीन पेसर बनने में मदद की।
फिर कमाल के बुमराह
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मैच में भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 253 रन बनाए। हालांकि इंग्लैंड के जैकब बेथेल ने 48 बाॅल में 105 रन बनाकर मैच को बेहद खास बना दिया। ऐसे मुश्किल समय में जसप्रीत बुमराह ने कमाल की गेंदबाजी की। उन्होंने अपने आखिरी 2 ओवर में सिर्फ 14 रन दिए। दूसरे बाॅलर पर इंग्लिश बैटर आसानी से रन बना रहे थे। बुमराह की इसी बाॅलिंग की वजह से भारत ने मैच 7 रन से जीत लिया और फाइनल में जगह बना ली।

बुमराह का एक्शन अलग था
बुमराह को पहली बार अहमदाबाद में कोच किशोर त्रिवेदी ने देखा था। उस समय जस्सी 16 साल के थे और निर्माण हाईस्कूल में पढ़ते थे। जब बुमराह पहली बार त्रिवेदी की रॉयल क्रिकेट अकादमी में आए तो उनकी बॉलिंग एक्शन काफी अलग था। कई लोग इसे गलत मानते थे।
त्रिवेदी ने ध्यान से देखने के बाद समझ लिया कि यही एक्शन इस लड़के की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बुमराह का एक्शन बदलने की बजाए उसे और बेहतर बनाने पर काम किया। त्रिवेदी को पता था कि यह अनोखा एक्शन बैट्समैन को परेशान कर सकता है।

शरारती लेकिन हुनरमंद
बुमराह बचपन में काफी शरारती थे। वह कई बार प्रैक्टिस छोड़कर दोस्तों के साथ घूमने चले जाते थे। ऐसे में त्रिवेदी ने उन्हें सख्त बनाया। अगर बुमराह प्रैक्टिस छोड़ देते थे तो उन्हें पूरे दिन नेट के पीछे खड़ा रहना पड़ता था। धीरे-धीरे जस्सी जान गए कि बड़ा खिलाड़ी बनना है तो मेहनत करनी पड़ेगी।

गेंदबाजी की बारीकियां
शुरुआत में बुमराह सिर्फ तेज बाउंसर फेंकते थे और बल्लेबाज आसानी से रन बना लेते थे। तब त्रिवेदी ने उन्हें समझाया कि सिर्फ पेस काफी नहीं है। उन्होंने बुमराह को यॉर्कर, कटर, स्लोअर वन और दूसरे आर्ट सिखाए। यह भी सिखाया कि बल्लेबाज को पढ़कर गेंदबाजी कैसे करनी है।

यहीं से शुरू हुआ बुमराह का सफर
कोच त्रिवेदी की ट्रेनिंग के बाद बुमराह ने गुजरात के लिए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खेली। इसी दौरान मुंबई इंडियंस के स्काउट जॉन राइट की नजर उन पर पड़ी। इसके बाद बुमराह को IPL में मौका मिला और फिर उन्होंने भारतीय टीम में जगह बना ली। आज वह दुनिया के सबसे खतरनाक बाॅलर हैं।

गुरु की एक छोटी सी इच्छा
79 साल के किशोर त्रिवेदी आज भी मैदान पर युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देते हैं। उनकी अकादमी के बोर्ड पर जसप्रीत बुमराह की तस्वीर खास जगह पर लगी है।

