किशन की जोरदार वापसी: घरेलू क्रिकेट से टीम इंडिया तक का सफर, 785 दिन के बाद इंटरनेशनल फिफ्टी लगाई
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न्यूजीलैंड के खिलाफ रायपुर में ईशान ने 76 रन शानदार पारी खेली
स्पोर्ट्स डेस्क. ईशान किशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर मेहनत और भरोसा हो, तो कोई भी खिलाड़ी वापसी कर सकता है। न्यूजीलैंड के खिलाफ रायपुर में 76 रन शानदार पारी के साथ ईशान ने दिखा दिया कि वह भारतीय क्रिकेट के सिंड्रेला मैन क्यों कहलाते हैं। मुश्किल दौर से निकलकर घरेलू क्रिकेट में पसीना बहाने के बाद अब ईशान एक मजबूत खिलाड़ी और बेहतर लीडर बनकर सामने आए हैं।
किशन ने सबको गलत साबित किया
ईशान का भारतीय टीम में वापसी का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। कुछ समय पहले वह टीम से बाहर थे और कई लोग मानने लगे थे कि वह भी उन खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो जाएंगे जो शुरुआत में चमकते हैं, लेकिन बाद में खो जाते हैं। विनोद कांबली से लेकर पृथ्वी शॉ तक ऐसे कई उदाहरण भारतीय क्रिकेट में देखे गए हैं। ईशान के साथ भी ऐसा ही होने की आशंका जताई जा रही थी। ईशान ने हार नहीं मानी। जब BCCI की तरफ से साफ संदेश मिला कि टीम में वापसी के लिए घरेलू क्रिकेट में रन बनाने होंगे, तो उन्होंने उसी रास्ते को अपनाया। करीब 785 दिनों तक टीम इंडिया से बाहर रहने के बाद खुद को पूरी तरह घरेलू क्रिकेट को समर्पित कर दिया। उन्होंने लगातार रन बनाए और दिखाया कि वह सिर्फ IPL के खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि लंबी रेस के घोड़े हैं।

किशन का शानदार कमबैक
पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने अपने चैनल पर कहा- ईशान की सबसे बड़ी ताकत उनका माइंडसेट और मेहनत है। कैफ के मुताबिक, हर गिरावट के बाद ईशान और मजबूत होकर लौटते हैं।
ईशान की वापसी की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने वर्तमान में जीना सीखा। बड़े झटके के बाद कई खिलाड़ी फ्यूचर की चिंता में उलझ जाते हैं, लेकिन ईशान ने हर दिन को अलग तरह से लिया। जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाए। इसी मेहनत का नतीजा था कि उन्हें टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए चुना गया। इतना ही नहीं ईशान ने झारखंड टीम की कप्तानी करते हुए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी भी जिताई। इस टूर्नामेंट में उन्होंने 10 पारियों में 517 रन बनाए।

मैच के बाद ईशान ने कहा कि इस कठिन समय ने उन्हें सिखाया कि जिन्दगी में छोटे-छोटे संघर्ष आते रहते हैं और उनसे डरना नहीं चाहिए। शांत रहकर, अपने काम पर ध्यान देना ही असली जीत है। किशन की यह कहानी हर युवा खिलाड़ी के लिए एक सीख है कि हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, मेहनत और भरोसे से वापसी जरूर होती है।

