फ्लैट पिच का रोना, फिर हार का अंतर इतना बड़ा क्यों: मैच से पहले टीम इंडिया पर साइकोलॉजिकल प्रेशर था; सिक्का भी हमारे पक्ष में नहीं गिरा
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भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर लगातार दूसरा और टोटल तीसरा टी-20 वर्ल्ड कप जीत लिया है।
स्पोर्ट्स डेस्क: भारत ने रविवार को न्यूजीलैंड को हराकर लगातार दूसरा टी-20 वर्ल्ड कप जीत लिया। इस मैच से पहले टीम इंडिया पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव था। 2023 में अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में टीम इंडिया 50 ओवर वर्ल्ड कप का फाइनल हार चुकी थी, जबकि पूरे टूर्नामेंट में टीम अजेय चली आ रही थी।
इस टी-20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 में भी टीम इंडिया साउथ अफ्रीका से एकतरफा हार गई थी। फैंस ने तो इस स्टेडियम को पनौती तक करार दे दिया था, लेकिन कल सूर्या की टीम ने पुराने सभी इतिहास बदल दिए।
फ्लैट पिच का रोना
मैच के दौरान सोशल मीडिया पर एक और भी चर्चा चल पड़ी थी। भारत ने 255 रन का स्कोर खड़ा किया तो कुछ एक्सपर्ट कहने लगे कि ये तो फ्लैट पिच है, इतने रन चेज हो सकते हैं। जबकि, असलियत में ऐसा नहीं था। ये हमारे बैटर्स की स्किल थी कि उन्होंने पहली इनिंग में ही मैच को एकतरफा बना दिया।

इट्स ऑल अबाउट स्किल
अगर पिच बिल्कुल ही सड़क जैसी होती तो न्यूजीलैंड इतने बड़े अंतर से कैसे हारता। हम सेमीफाइनल में देख चुके थे कि कैसे इंग्लैंड भारत के 253 के जवाब में 246 तक पहुंच गई थी। फाइनल में बॉलिंग की बात की जाए तो एक तरफ न्यूजीलैंड के सभी गेंदबाजों की जमकर पिटाई हुई वहीं सेकेंड इनिंग में बुमराह ने 4 विकेट निकाल लिए। अगर पिच में बॉलर्स के लिए कुछ नहीं था तो बुमराह के खाते इतने विकेट कैसे आए। विकेट तो लिए ही लिए, 4 ओवर में सिर्फ 15 रन दिए। क्या इसकी बात नहीं होनी चाहिए?
टॉस हारे लेकिन मैच जीते
ऐसा माना जा रहा था कि जो टीम टॉस जीतेगी, ज्यादातर मैच पर पकड़ उसी की होगी। टीम इंडिया को यहां भी एडवांटेज नहीं मिला। सिक्का न्यूजीलैंड के पक्ष में गिरा। न्यूजीलैंड के कप्तान सेंटनर ने टॉस जीतकर बॉलिंग इसलिए ही चुनी थी कि क्योंकि सेकेंड इनिंग में बैटिंग ज्यादा आसान थी। ऐसे में पूरा मामला यहां स्किल पर आकर टिक गया था। कुलमिलाकर टीम इंडिया ने सभी चुनौतियों को पार करते हुए ट्रॉफी एक बार फिर अपने नाम कर ली।

