जब भारत ने बीच में छोड़ दिया मैच: पाकिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ 1978 के ODI की दिलचस्प कहानी; इसे आज जरूर जानिए
Published:
3 min read

10वें टी20 वर्ल्ड कप की शुरुआत 7 फरवरी से होगी। फाइनल 8 मार्च को खेला जाएगा।
स्पोर्ट्स डेस्क. 2026 टी20 वर्ल्ड कप शुरू होने जा रहा है। क्रिकेट की दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा पाकिस्तान के एक बड़े फैसले को लेकर हो रही है। पाकिस्तान ने टूर्नामेंट में खेलने का फैसला तो किया है, लेकिन उसने 15 फरवरी को भारत के खिलाफ मैच का बायकॉट कर दिया।
आज यह फैसला भले ही चौंकाने वाला लगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि करीब 50 साल पहले भारत ने खुद पाकिस्तान के खिलाफ एक मैच बीच में ही छोड़ दिया था। चलिए, इस मैच की इंटरस्टिंग हिस्ट्री को समझ लेते हैं…
पहले पाकिस्तान के ताजा कदम की बात
पाकिस्तान ने यह फैसला बांग्लादेश के समर्थन में लिया। बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में खेलने से मना कर दिया था। दरअसल, आईपीएल 2026 से पहले बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्ताफिजुर रहमान को केकेआर टीम से हटाया गया। बांग्लादेश का कहना था कि मौजूदा हालात में भारत में खेलना सुरक्षित नहीं है।
इसी वजह से पाकिस्तान ने ऐलान किया कि वह टूर्नामेंट में तो खेलेगा, हालांकि भारत के खिलाफ मैच का बायकॉट करेगा। पाकिस्तान अपने सभी मैच श्रीलंका में खेल रहा है और अगर वह सेमीफाइनल या फाइनल में पहुंचता है तो वो मैच भी वहीं होंगे।

अब इतिहास के झरोखे से: 1978 का बायकाॅट
आज भले ही पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर रहा हो, लेकिन 3 नवंबर 1978 को इतिहास में पहली बार भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक ODI बीच में ही छोड़ दिया था। यह इंटरनेशनल क्रिकेट में पहली बार हुआ था जब किसी टीम ने मैच कंसीड (CONCEDE) किया हो।
अब मैच ब्रीफ
यह मैच पाकिस्तान के साहिवाल में खेला गया था। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 40 ओवर में 205 रन बनाए। जवाब में एक वक्त हमारी टीम का स्कोर 37 ओवर में 183/2 था। जीत के लिए सिर्फ 23 रन चाहिए थे और भारत के 8 विकेट बचे थे।

और यहीं से बेईमानी शुरू हुई
उस वक्त हर मैच में मेजबान टीम को यह अधिकार था कि वो अपने अंपायर रखे। आसान भाषा में समझें तो लोकल अंपायर ही मैच ऑफिशियल होते थे। यानी उस मैच में लोकल यानी पाकिस्तानी अंपायर थे।
पाकिस्तान के गेंदबाज सरफराज नवाज ने जानबूझकर बहुत ऊपर और बाहर बॉलिंग की। ये बल्लेबाज की पहुंच से बाहर थीं। टेक्निकली यह वाइड बाॅल थीं। हालांकि अंपायर ने एक भी वाइड नहीं दिया।लगातार 4 बाॅल तक यही हुआ। भारतीय बल्लेबाज अंशुमान गायकवाड़ और गुंडप्पा विश्वनाथ समझ गए कि ये जानबूझकर किया जा रहा है, ताकि भारत जीत न सके।
और कप्तान बिशन सिंह बेदी का सख्त फैसला
जब खेल मजाक में तब्दील होने लगा तो भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने बड़ा और साहसी फैसला लिया। उन्होंने मैदान पर ही मैच छोड़ने का ऐलान कर दिया। भारत ने विरोध में मैच कंसीड कर दिया और जीत पाकिस्तान को दे दी गई। पाकिस्तान ने यह सीरीज 2-1 से जीत ली।खास बात यह भी है कि इस घटना के बाद साहिवाल में फिर कभी कोई इंटरनेशनल मैच नहीं खेला गया।

आज और तब में फर्क
आज के समय में न्यूट्रल अंपायर होते हैं, वीडियो रीप्ले और टेक्नोलॉजी है, इसलिए ऐसी घटनाएं बहुत कम होती हैं। लेकिन 1978 में हालात अलग थे।करीब 50 साल बाद अब पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलने का फैसला लिया है। अगर दोनों टीमें सेमीफाइनल या फाइनल में पहुंचती हैं, तो आमना-सामना हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह सिर्फ एक संभावना है।


