हार्दिक कहानी: बड़ौदा के सिलेक्टर्स के सामने सवाल था- स्पिनर को पेसर की जगह कैसे दें; फिर ऐसे अनहोनी, होनी बन गई
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स्पोर्ट्स डेस्क. आज पूरी दुनिया हार्दिक पांड्या को भारत के सबसे अच्छे ऑलराउंडरों में गिनती है। उनकी तेज रफ्तार गेंदबाजी और आक्रामक बल्लेबाज ने उन्हें खास पहचान दिलाई है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अपने कॅरियर की शुरुआत में हार्दिक तेज गेंदबाज नहीं, बल्कि लेग-स्पिनर थे। जी हां, वही हार्दिक जो आज बल्लेबाजों को अपनी रफ्तार और बाउंसर से डराते हैं, वही हार्दिक कभी स्पिन से उन्हें चकमा देते थे। उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट एक साधारण से क्लब मैच में आया।
इस स्टोरी को में आज आपको यही तकरीबन अनसुनी कहानी बताते हैं। यह कहानी हार्दिक के कोच जितेंद्र सिंह ने रेवस्पोर्ट्ज के साथ शेयर की है।
शानदार लेग स्पिनर
2010 के करीब की बात है। हार्दिक बड़ौदा की किरण मोरे अकादमी में ट्रेनिंग लेते थे। वहां वो लेग-स्पिनर थे। बड़े भाई कुणाल पांड्या भी वहीं प्रैक्टिस करते थे। हार्दिक अक्सर उनके साथ मैदान में आते। धीरे-धीरे क्रिकेट की बारीकियां सीखते गए।
कोच जितेंद्र सिंह बताते हैं- हार्दिक शुरू से ही लेग-स्पिन करते थे। उनकी गेंद में शानदार जबरदस्त टर्न था। वे अपने साथी शुभम अग्रवाल के साथ स्पिन गेंदबाजी करते थे। उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि यही लड़का आगे चलकर जबरदस्त पेसर बनेगा।
एक मैच और सब बदल गया
वक्त और किस्मत कैसे बदलती है, हार्दिक इसकी शानदार मिसाल हैं। हुआ यूं कि एक दिन क्लब मैच के दौरान टीम के पास तेज गेंदबाज कम पड़ गया। कोच परेशान..क्या करें? तभी किसी ने बताया कि हार्दिक नेट्स में चुपचाप तेज गेंदबाजी भी करते हैं। मजबूरी में कोच ने उन्हें मौका दे दिया।
और फिर वो हुआ...जिसके लिए आज हार्दिक आज हार्दिक प्रिय हैं। उस मैच में उन्होंने अपनी तेज रफ्तार, सटीक यॉर्कर और बाउंसर से कहर ढा दिया। उन्होंने 5 विकेट लिए। खास बात यह थी कि सामने वाली टीम में रणजी और दलीप ट्रॉफी खेलने वाले प्लेयर भी थे।
हिंदी में कहते हैं, भगा के आउट करना.. – यानी बल्लेबाज को अपनी रफ्तार से डराकर आउट करना। इस मैच के बाद कोच ने बड़ौदा टीम के हेड कोच सनथ कुमार से बात की। उन्होंने हार्दिक को तेज गेंदबाज ऑलराउंडर के रूप में मौका देने की सिफारिश की। लेकिन...ये बहुत मुश्किल काम था।
2 घंटे बहस और फिर क्या हुआ..जानिए
बड़ौदा मैनेजिंग कमेटी में करीब 2 घंटे इस बात पर बहस चली कि एक रजिस्टर्ड लेग-स्पिनर को तेज गेंदबाज की जगह कैसे दी जाए? आखिरकार कोच की दलीलें मानी गईं और हार्दिक को नई भूमिका में मौका मिला।
यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। हार्दिक खुद कहते हैं- मैं पहला प्यार कभी नहीं भूलता। हार्दिक आज भी जब बड़ौदा में प्रैक्टिस करते हैं नेट्स छोड़ने से पहले दो-तीन ओवर लेग-स्पिन जरूर करते हैं। भले ही दुनिया उन्हें तेज गेंदबाज के रूप में जानती है, लेकिन उनके दिल में लेग-स्पिन आज भी बसी है।


