इंडिया में बनी पहली टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी: ऑस्ट्रेलिया में डिजाइन, अब 12 की बजाए 3.9 kg वजन; वर्ल्ड कप ट्रॉफी से जुड़े सभी अहम सवालों के जवाब
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अब तक 9 टी20 वर्ल्ड कप सीजन हो चुके हैं। इसमें इंडिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज ने 2-2 बार खिताब जीते हैं। (@ICC)
स्पोर्ट्स डेस्क. टी20 वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 7 फरवरी को हो गया है। इस 10वें सीजन का फाइनल 8 मार्च को होगा। इस बार यह वर्ल्ड कप इंडिया और श्रीलंका के संयुक्त मेजबानी में खेला जा रहा है। इस दौरान फैन्स को यह जानने की उत्सुकता होगी कि आखिर यह वर्ल्ड कप की ट्रॉफी कहां और किस मेटल से बनती है।
ट्रॉफी का डिजाइन किसने बनाया। इसका वजन कितना होता है और क्या सच में चैम्पियन टीम को असली ट्रॉफी दी जाती है। आइए जानते हैं ऐसे तमाम सवालों के जवाब…
ट्रॉफी का डिजाइन किसने तैयार किया
टी20 वर्ल्ड कप का पहला सीजन 2007 में हुआ था। तब टीम इंडिया चैम्पियन बनी थी। 2007 में इस वर्ल्ड कप ट्रॉफी की डिजाइन को ऑस्ट्रेलिया की मिनाले ब्रायस डिजाइन स्ट्रेटजी ने तैयार की थी।

खास बात यह भी है कि टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी सबसे पहले भारत में ही बनाई जाती थी। जयपुर के रहने वाले अमित पाबूवाल ने 2012 तक टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी बनाईं। अमित 1987 रिलायंस वर्ल्ड कप, इंडिपेंडेंस कप, हीरो कप और विल्स वर्ल्ड कप समेत कई ट्रॉफी बना चुके हैं। 2012 में ट्रॉफी बनाने का काम लंदन की लिंक्स कंपनी को दे दिया गया। इसके बाद 2021 से टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी बनाने का काम लंदन की थॉमस लाइट कंपनी को मिला।

टी20 वर्ल्ड कप की यह ट्रॉफी सबसे पहले चांदी और रोडियम से बनाई जाती थी। मगर अब ऐसा नहीं होती है। अब यह ट्रॉफी पांच अलग तरह की मेटल बनाई जाती है। इसका बेस सिल्वर प्लेट का होता है।

शुरुआत में इस वर्ल्ड कप ट्रॉफी का वजन 12 kg था, लेकिन इसे बाद में घटाकर 3.9 kg कर दिया गया। यह वजन 2021 से घटाया गया। जबकि शुरुआत में इस ट्रॉफी की लंबाई 57.15 सेंटीमीटर थी, जिसे घटाकर 51 सेंटीमीटर कर दिया गया।

ICC टी20 वर्ल्ड कप में जब कोई टीम खिताब जीतती है तो उसे असली ट्रॉफी नहीं दी जाती है, बल्कि रेप्लिका (हूबहू) दी जाती है। असली ट्रॉफी ICC के हेडक्वार्टर में ही रखी जाती है।

अब तक 9 टी20 वर्ल्ड कप सीजन हो चुके हैं। इसमें इंडिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज ने 2-2 बार खिताब जीते हैं। इनके अलावा पाकिस्तान, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया ने भी 1-1 बार ट्रॉफी जीती हैं।

