रिंकू-पराग ऑलराउंडर नहीं: आकाश चोपड़ा बोले- बदोनी मल्टीटास्कर, इसलिए टीम इंडिया में शामिल
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स्पोर्ट्स डेस्क. टीम इंडिया के वनडे स्क्वॉड में आयुष बदोनी का नाम आते ही क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा शुरू हो चुकी है। ज्यादातर लोगों को उम्मीद थी कि रिंकू सिंह या रियान पराग को मौका मिलेगा, लेकिन सिलेक्टर ने दिल्ली के यंग प्लेयर आयुष पर भरोसा जताया। इस फैसले को लेकर अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने बताया कि सिलेक्टर ने ऐसा क्यों किया।
बदोनी परफेक्ट ऑप्शन
आकाश ने अपने चैनल पर कहा- बदोनी का सिलेक्शन चौंकाने वाला जरूर है। हालांकि ये गलत नहीं है। वाशिंगटन सुंदर के बाहर होने के बाद टीम को एक ऐसे प्लेयर की जरूरत थी जो बैटिंग के साथ ही अच्छा बॉलिंग ऑप्शन भी हो। BCCI लाइक टू लाइक प्लेयर लेने का सोच रहे थी। बदोनी उस प्रोफाइल में फिट बैठ रहे हैं।
आकाश ने आगे कहा- बदोनी ने इंडिया ए के लिए भी गेंदबाजी की है और वहां भी अपनी काबिलियत साबित की है। हालांकि बदोनी के आंकड़े ऐसे नहीं हैं कि यह कहा जाए कि उन्होंने दरवाजा तोड़कर टीम इंडिया में एंट्री ली है। न तो उनके 1000 से ज्यादा लिस्ट ए रन हैं और न ही बहुत ज्यादा विकेट।
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पराग को एंट्री क्यों नहीं
चोपड़ा ने आगे कहा- रियान पराग इंजरी से वापसी कर रहे हैं। ऐसे में सिलेक्टर शायद उन्हें फौरन टीम में लाने का रिस्क नहीं लेना चाहते थे। फिटनेस और मैच प्रैक्टिस के लिहाज से पराग को अभी और समय दिया जा सकता है।

रिंकू बाॅलिंग नहीं करते
रिंकू सिंह को लेकर चोपड़ा ने कहा कि वह बल्लेबाज हैं। भले ही अब वह गेंदबाजी भी करने लगे हों, लेकिन उन्हें अभी ऑलराउंडर नहीं माना जा सकता। टीम को इस वक्त एक ऐसे खिलाड़ी की जरूरत है। जो लगातार अच्छी गेंदबाजी करता हो, उन्हें पार्ट टाइमर नहीं चाहिए।

विजय हजारे ट्रॉफी में बदोनी
बदोनी ने विजय हजारे ट्रॉफी में बैट से कुछ खास नहीं किया है। उन्होंने तीन पारी में सिर्फ 15 रन बनाए। इसके उलट उनकी बाॅलिंग ने सभी का ध्यान खींचा। बदोनी ने दिल्ली के लिए बेहद किफायती स्पेल डाले और रन रोकने में अहम भूमिका निभाई। रेलवे के खिलाफ उन्होंने 10 ओवर में सिर्फ 30 रन देकर 3 विकेट लिए, वहीं सर्विसेज के खिलाफ 7 ओवर में 28 रन दिए। गुजरात के खिलाफ भी उन्होंने 5 ओवर में केवल 21 रन खर्च किए। वनडे क्रिकेट में ऐसे गेंदबाजों की खास अहमियत होती है जो मिडिल ओवर्स में रन रोक सकें।


