पान की दुकान पर अक्षर: नाडियाड में यही उनका पसंदीदा ठिकाना; इंग्लिश बुक नहीं लाए तो टीचर ने कहा- गेट आउट- बापू के दो दिलचस्प किस्से
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स्पोर्ट्स डेस्क. क्या करूं, मुझे सुकून और आनंद बस यहीं आता है। यहां कोई स्टार-विस्टार नहीं है। यहां तो टी-शर्ट और बरमूडा शॉर्ट्स में खड़ा मामूली सा दिखने वाले नौजवान है। हम उसे बचपन से बापू कहते हैं…
बापू के कदम इतिहास बदल देंगे
2023 में अहमदाबाद में टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के हाथों वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल हार गई थी। इसकी टीस आज भी हर भारतीय के दिल में है। अब फिर वही नरेंद्र मोदी स्टेडियम है, वही अहमदाबाद है और सामने है न्यूजीलैंड। अहमदाबाद से महज 60 किलोमीटर दूर है छोटा और शांत नाडियाद शहर। इसे आप सबअर्बन टाउनशिप भी कह सकते हैं।
अक्षर पटेल यहीं के रहने वाले हैं। मीडिया ने जब यहां के लोगों से पूछा- अक्षर जब यहां रहते हैं, तो क्या करते हैं? किनसे मिलते हैं, क्या आम लोग उनसे मिल पाते हैं? इसका जवाब जो मिला वो दिल बाग-बाग कर देता है।

पसंदीदा ठिकाना…अक्षय की दुकान
अक्षर पटेल का निकनैम बापू है। टीम इंडिया में भी उनको इसी नाम से पुकारा जाता है। नाडियाड की हर गली में भी अक्षर तो बस बापू हैं।बापू के घर से चंद कदम के फासले पर एक पान की दुकान है। इसके मालिक हैं अक्षय भाई। दुकान छोटी है, लेकिन ग्राहकों की कमी नहीं रहती।
अक्षय कहते हैं- बापू नाडियाड में रहता है तो उसका पसंदीदा ठिकाना यही दुकान है। कभी लोअर-टीशर्ट तो कभी टीशर्ट और बरमूडा शॉर्ट्स। यहीं खड़ा रहता है। आते-जाते लोग हैरानी से उसे देखते हैं, फिर रुक जाते हैं। सेल्फी-ऑटोग्राफ मांगते तो वो खुशी-खुशी उनकी बात मान लेता है।
हम और सिर्फ हम जीतेंगे
दुकान पर मौजूद एक शख्स ने कहा- तो क्या हुआ जो हम 2023 में यहां ऑस्ट्रेलिया से हार गए थे। तब बापू कहां था? इस बार वो है, उसके कदम जब उस मैदान पर पड़ेंगे तो टीम इंडिया बिना परेशानी के वर्ल्ड कप जीत लेगी। मेरी बात नोट कर लीजिए।दूसरे शख्स कहते हैं- हमारा बापू तो लकी चार्म है भारतीय टीम के लिए। आप देख लेना। हमारे लिए वो क्या नहीं करता…जब मदद की जरूरत होती है तो उसके पास पहुंच जाते हैं।
अक्षय भाई के तो बापू के परिवार से 20 साल के रिश्ते हैं। वो बापू को तब से जानते हैं जब उसके पिता उसका किट बैग साइकल पर लादकर उसे प्रैक्टिस के लिए ग्राउंड पर ले जाते थे। हमारे लिए तो वो घर का गली का बच्चा है।

टीचर से पूछा- पहचाना सर आपने…
अक्षर को स्कूल में एक टीचर (और प्रिंसिपल) प्रशांत उपाध्याय अंग्रेजी पढ़ाते थे। एक दिन बापू इंग्लिश की बुक लाना भूल गए। प्रशांत ने उन्हें डांट लगाई और क्लास से निकाल दिया। साल-दर-साल गुजरते गए। इस स्कूल के बोर्ड पर अब अक्षर का नाम चमकता है। इसके बाद एक दिलचस्प वाकया हुआ।
एक दिन नाडियाद की एक सड़क से अक्षर गुजर रहे थे। कार वो खुद ड्राइव कर रहे थे। रोड संकरी थी। सामने से एक और कार आकर खड़ी हो गई। बमुश्किल दोनों क्रॉस होने लगीं। इतने में अक्षर ने गाड़ी रोकी। कार का शीशा नीचे किया, गर्दन बाहर निकाल और दूसरी कार में बैठे शख्स से पूछा- सर प्रणाम, आपने मुझे पहचाना? ये प्रशांत थे। उनकी आंखें नम हो गईं। भरे गले से कहा- बेटा, तुम्हें कौन नहीं पहचानता?
प्रशांत कहते हैं- टीम इंडिया ही यह वर्ल्ड कप जीतेगी और मेरा स्कूल देश का सबसे महान स्कूल बनेगा। प्रशांत पूरे यकीन और आंखों में चमक के साथ कहते हैं- आपको पता है हमारा बापू ‘सोने के हाथ’ यानी गोल्डन आर्म्स वाला बच्चा है। हम ही जीतेंगे।

