लालू परिवार के लिए रेल मंत्रालय जागीर बन गया था: लैंड फॉर जॉब स्कैम में 46 पर आरोप तय; पढ़ें घोटाले की पूरी Timeline
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लैंड फॉर जॉब स्कैम में CBI ने 103 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से 5 लोगों का निधन हो चुका है।
नेशनल डेस्क. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के लैंड फॉर जॉब यानी जमीन के बदले नौकरी मामले में शुक्रवार (9 जनवरी) को RJD सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू यादव, उनकी पत्नी और पूर्व सीएम राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और मीसा भारती के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में आरोप तय कर दिए। इस मामले में CBI जांच कर रही है।
लालू यादव ने रेलवे का निजी संपत्ति के तौर पर इस्तेमाल किया- कोर्ट
- राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोग्ने ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और IPC के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश समेत अन्य मामलों में आरोप तय करने का आदेश दिया। इस दौरान उन्होंने कहा, लालू यादव और उनके परिवार ने सार्वजनिक रोजगार को सौदेबाजी के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया और संपत्तियां हासिल करने के लिए साजिश रची।
"चार्जशीट से साफ पता चलता है कि लालू यादव के करीबी सहयोगियों ने सह-साजिशकर्ता के तौर पर रेलवे में नौकरियों और देश भर में नियुक्तियों के बदले जमीन के ट्रांसफर में मदद की। ऐसा लगता है कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया।"
52 आरोपी बरी
सीबीआई ने इस मामले में 103 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से 5 लोगों का निधन हो चुका है। बाकी 98 में से 52 को जज गोग्ने ने बरी कर दिया। बाकी 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए।
क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम
दरअसल, ये मामला 2004-2009 का है, जब लालू यादव रेलवे मंत्री थे। लालू, उनके परिवार और अन्य करीबियों पर आरोप हैं कि रेलवे में सरकारी नौकरियां देने के बदले लोगों से जमीन खरीदी या गिफ्ट (उपहार) के रूप में ली गई थी। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-D और अन्य पदों पर उन लोगों को नियुक्तियां दी गईं, जिन लोगों के परिवारों ने जमीन को सस्ते दाम में गिफ्ट के तौर पर लालू और उनके करीबियों को दिया।
जांच एजेंसियों के क्या आरोप
- बिना विज्ञप्ति नियुक्तियां हुईं, नियमों का उल्लंघन किया गया।
- जमीन वास्तविक कीमत से बहुत कम कीमत में दी गईं।
- ज्यादातर जमीनें पटना के प्रमुख इलाकों में थीं, इनकी कीमत करोड़ों में थी, इन्हें गिफ्ट या काफी कम कीमत में खरीदा गया।
- CBI का कहना है कि जमीन को बाद में एक दूसरे के नाम पर भी ट्रांसफर किया गया।

अब आगे क्या?
- ट्रायल शुरू होगा।
- जांच एजेंसियां सबूत और गवाह पेश करेंगी।
- इनके आधार पर कोर्ट फैसला सुनाएगा।

