पंजाब में शख्स ने सुसाइड किया: ड्रग्स पर पंजाब मंत्री से सवाल पूछा था; AAP नेताओं पर धमकाने और प्रताड़ित करने का आरोप
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गुलजार सिंह ने पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल चीमा से ड्रग्स को लेकर सवाल पूछा था। इसके बाद AAP के स्थानीय नेता गुलजार को परेशान कर रहे थे।
नेशनल डेस्क. पंजाब के संगरूर जिले में चिट्टे (एक तरह ड्रग्स) के मुद्दे पर सवाल उठाने वाले 46 साल के व्यक्ति की जहर खाने के बाद मौत हो गई। मृतक की पहचान गुलजार सिंह के तौर पर हुई है। वह पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के विधानसभा क्षेत्र दिरबा के तूर बनजारा गांव का रहने वाला था।
गुलजार के परिवार ने आरोप लगाया है कि मंत्री से गांव में चिट्टे की खुलेआम बिक्री और इस्तेमाल को लेकर सवाल पूछने के बाद सत्ताधारी AAP से जुड़े स्थानीय नेताओं और पंचायत सदस्यों ने उस पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का दबाव बनाया। परिवार का दावा है कि इसी कथित दबाव और डराने-धमकाने के बाद उसने जहरीली गोलियां खा लीं।
मंत्री से पूछा था- गांव में चिट्टा कैसे बिक रहा है?
यह मामला हाल ही में तूर बनजारा गांव में हुई एक सार्वजनिक बैठक के बाद सामने आया। मंत्री हरपाल सिंह चीमा गांव में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान गुलजार सिंह ने उनसे सवाल किया कि सरकार उसके बेटे और गांव के अन्य लोगों को चिट्टे का सेवन करने से रोकने में क्यों नाकाम रही है।
गुलजार के चचेरे भाई गुरदीप सिंह के मुताबिक, गांव के दो युवकों की ड्रग ओवरडोज से मौत हो चुकी थी। गुलजार अपने बेटे की चिट्टे की लत को लेकर भी परेशान था। परिवार का आरोप है कि सवाल पूछने के बाद पुलिसकर्मी गुलजार को बैठक स्थल से अलग ले गए।
परिवार का आरोप- अगले दिन माफी मांगने का बनाया दबाव
परिवार के मुताबिक, बैठक के बाद उसी शाम गांव की पंचायत के कुछ सदस्यों और स्थानीय नेताओं ने गुलजार को बुलाया। आरोप है कि उससे अगले दिन सार्वजनिक तौर पर मंत्री हरपाल सिंह चीमा से माफी मांगने के लिए कहा गया। क्रांतिकारी पेंडू मजदूर यूनियन पंजाब के महासचिव लखवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने गुलजार का बयान मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया था। उनके मुताबिक, गुलजार ने कथित दबाव का जिक्र किया था।
लखवीर सिंह ने दावा किया कि गुलजार ने सोमवार को एल्युमिनियम फॉस्फाइड की गोलियां खा लीं। हालत बिगड़ने के बाद उसे पहले संगरूर सिविल अस्पताल ले जाया गया। वहां से राजिंदरा अस्पताल, पटियाला रेफर किया गया। बाद में उसे संगरूर के एक निजी अस्पताल और फिर इलाज के लिए डीएमसी अस्पताल, लुधियाना ले जाया गया, जहां सोमवार देर रात उसकी मौत हो गई।
परिवार बोला- चार लोग गिरफ्तार, मंत्री पर भी FIR की मांग
लखवीर सिंह के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। इनमें गांव की पंचायत के दो सदस्य भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि, दिरबा के SHO गुरविंदर सिंह ने गुलजार की मौत की पुष्टि की, लेकिन मामले में FIR और गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारियां नहीं दीं। उन्होंने कहा कि मेडिकल और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लखवीर सिंह ने मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ भी FIR दर्ज करने की मांग की है।
पंचायत ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं, गांव के सरपंच के पति ने गुलजार के परिवार के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पंचायत या उन्होंने गुलजार को परेशान नहीं किया और न ही माफी मांगने के लिए दबाव बनाया। उनके मुताबिक, बैठक में मंत्री चीमा और पंचायत के सदस्यों ने गुलजार की बात धैर्यपूर्वक सुनी थी। उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया और उसके बेटे के इलाज में मदद की पेशकश भी की थी। उन्होंने परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया।
बीजेपी ने गुलजार का मरने से पहले का वीडियो शेयर किया
BJP नेता अमिल मालवीय ने गुलजार का मरने से पहले का वीडियो शेयर किया है। इसमें वे कथित तौर पर कुछ पंचायत सदस्यों और मंत्री हरपाल सिंह चीमा को अपने सुसाइड की वजह बताते नजर आ रहे हैं।
खैरा और मजीठिया ने उठाए सवाल
गुलजार सिंह की मौत के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें गुलजार कुछ लोगों के नाम लेते हुए दिखाई दे रहा है। खैरा ने मंत्री और उनके सहयोगियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की।
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने गुलजार को बैठक से अलग किया और इसके बाद AAP नेताओं ने उस पर माफी मांगने का दबाव बनाया। मजिठिया ने घटना को हत्या करार देते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ FIR की मांग की।
बेटे के चिट्टे की लत से परेशान था गुलजार
परिवार के मुताबिक, गुलजार सिंह का सबसे बड़ा बेटा चिट्टे की लत से जूझ रहा था। गांव में ड्रग्स की समस्या को लेकर वह काफी चिंतित था। इसी वजह से उसने मंत्री की सार्वजनिक बैठक में सरकार से चिट्टे की सप्लाई और खुलेआम सेवन पर सवाल किया था। फिलहाल पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि गुलजार सिंह की मौत से जुड़े आरोपों में किन लोगों की भूमिका थी और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

