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उम्मीद है आप दिल्ली का मौसम एन्जॉय कर रहे होंगे: CJI सूर्यकांत ने ऐसा क्यों कहा; प्रदूषण कम करने के लिए क्या-क्या सुझाव दिए

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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। (फोटो सोर्स: ANI)

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। (फोटो सोर्स: ANI)

नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार (6 नवंबर) को कोर्टरूम में आते ही कहा- उम्मीद है आप दिल्ली का मौसम एन्जॉय कर रहे होंगे। उन्होंने यह बात दिल्ली में लगातार बढ़ रहे पॉल्यूशन को लेकर कही। वह इसी से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे थे।

दरअसल, दिल्ली-NCR में हवा जहरीली होती जा रही है। कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट में एक ओर एमिकस क्यूरी (कोर्ट की ओर से वकील) और दूसरी ओर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (सरकार के वकील) थे। देर तक चली इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार की कोशिशों की जानकारी ली। एमिकस क्यूरी के जरिए इन कोशिशों में खामियों की पड़ताल की और फिर अपनी ओर से कुछ सलाह दीं।

सुनवाई में क्या-क्या हुआ?
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट की एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि प्रदूषण का स्तर इतना खराब है कि ऐसा लग रहा है जैसे रोज 30 सिगरेट पी रहे हों। उन्होंने यह भी कहा कि पराली जलाने से पहले ही दिल्ली की हवा खराब हो गई थी। ऐसे में सिर्फ किसानों पर प्रदूषण का ठीकरा नहीं फोड़ा जा सकता।

उन्होंने बताया- 5 नवंबर तक प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी महज 14% थी। दिल्ली में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह गाड़ियों से निकलने वाला धुआं है। उन्होंने दिल्ली को NCR से जोड़ने वाली सड़कों पर लगने वाले जाम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी पर भी सवाल उठाए।

केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG ने बताया कि डीजल से चलने वाले ऑटो को धीरे-धीरे हटाने और दूसरे शहरों से दिल्ली आने वाली बसों को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी को लेकर पूछ गए सवाल में जवाब मिला कि इस दिशा में काफी काम हो रहा है और आने वाले वक्त में कुछ और कदम उठाए जाएंगे।

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हालांकि, अपराजिता सिंह ने कहा कि टोल प्लाजा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश को भी अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। NCR की बॉर्डर पर गाड़ियों को रोक दिया जाता है और वे वहीं इंजन चालू रखकर खड़ी रहती हैं। इससे प्रदूषण और बढ़ता है।

इस पर केंद्र सरकार के वकील ने भी माना कि कोर्ट के पुराने आदेश को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है।

पराली पर क्या बात हुई?
पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ने के फैक्ट पर ASG ने बताया कि पराली जलाने पर रोक के लिए पहले से एक योजना चल रही है। पराली के निपटान के लिए मशीनें दी गई हैं। उन्होंने दावा किया कि इस साल पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई है।

इस पर अपराजिता सिंह ने कहा कि किसानों को पराली हटाने के लिए मशीनें देने से कुछ नहीं होगा। उनके पास मशीन चलाने के लिए फ्यूल खरीदने के पैसे भी नहीं हैं। इसके अलावा छोटे किसानों के खेतों में ये मशीनें ठीक से काम नहीं करतीं।

इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पराली को एक तय कीमत पर खरीदने के प्रस्ताव का जिक्र किया। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पराली खरीदने की कीमत पहले ही तय कर देनी चाहिए।

बेंच ने कहा कि मशीनें ग्राम पंचायतों को दी जानी चाहिए, क्योंकि हर किसान के लिए इतनी महंगी मशीन ऑपरेट करना संभव नहीं है। इससे एक ही मशीन का इस्तेमाल गांव के कई किसान कर सकेंगे।

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कोर्ट ने पराली जमा करने के लिए गोदाम बनाने का सुझाव भी दिया। CJI ने कहा कि इससे पराली जमा करने और रखने के काम से जुड़े लोगों को कमाई का एक और जरिया मिल सकता है।

ASG ने कोर्ट के सुझावों को कृषि मंत्रालय तक पहुंचाने की बात कही है।

दिवाली पर पटाखों का मुद्दा भी उठा
सुनवाई में दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण पर भी बात हुई। अपराजिता सिंह ने कहा कि गर्मियों में धुआं हवा के साथ फैल जाता है, लेकिन सर्दियों में वह वातावरण में ही फंसा रहता है।

बेंच ने सवाल किया कि लोग अपनी पुरानी परंपराओं की ओर क्यों नहीं लौट सकते। इस पर सिंह ने कहा कि दिवाली पर दीये जलाने की परंपरा को बढ़ावा देना बेहतर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर गरीब तबके पर पड़ता है।

कोर्ट ने कहा कि दिवाली का वक्त गरीब लोगों के लिए कमाई का बड़ा जरिया भी होता है। लेकिन जो लोग पटाखों को अपनी सामाजिक हैसियत दिखाने का तरीका बना लेते हैं, वे इस समस्या को बढ़ाते हैं और बढ़ते पॉल्यूशन के चलते गरीबों को ही सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।

CJI ने पूछा- प्रदूषण रोकने के लिए क्या साइंटिफिक तरीके यूज किए
केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG ने कहा कि दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां धुआं आसानी से बाहर नहीं निकल पाता। इस पर CJI ने सवाल किया कि क्या प्रदूषण से निपटने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक आजमाए गए कई तरीके नाकाम साबित हुए हैं।

ASG ने बताया कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत प्रदूषण के स्तर के हिसाब से अलग-अलग पाबंदियां लगाई जाती हैं। फिलहाल सरकार प्रदूषण को मैनेज करने की कोशिश कर रही है।

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