CRPF के इतिहास में 47 साल बाद बना रिकॉर्ड: एक साल में ऑपरेशन के दौरान एक भी जवान शहीद नहीं हुआ
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पिछले 12 महीने में किसी भी ऑपरेशन में CRPF का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ (फोटो- ANI)
नेशनल डेस्क. CRPF के 47 साल के इतिहास में पहली बार एक साल में ऑपरेशन के दौरान कोई भी जवान शहीद नहीं हुआ। खास बात ये है कि इस दौरान CRPF के जवानों ने जम्मू-कश्मीर, मणिपुर और नक्सल प्रभावित इलाकों में कई चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे ऑपरेशनों को अंजाम दिया।
CRPF DG जीपी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- CRPF के इतिहास में यह एक अहम उपलब्धि है। फोर्स में लगातार 12 महीने से कोई ऑपरेशनल फेटेलिटी नहीं हुई है। आखिरी बार 30 अक्टूबर 2025 को ऑपरेशन के दौरान CRPF का एक जवान शहीद हुआ था।
आधुनिक हथियार और बेहतर ट्रेनिंग से कामयाबी
DG जीपी सिंह ने इस रिकॉर्ड का श्रेय आधुनिक हथियारों, बेहतर ट्रेनिंग और रणनीतिक योजना को दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद की व्यवस्था, खासकर घायल जवानों को तेजी से बेहतर मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने वाले अस्पतालों तक पहुंचाना भी इसमें अहम रहा है।

उन्होंने कहा- यह उपलब्धि इसलिए भी काफी अहम है, क्योंकि इन 12 महीनों में CRPF के जवान देश के सभी संवेदनशील ऑपरेशनल क्षेत्रों में एक्टिव रहे और कई सफलताएं हासिल कीं। DG जीपी सिंह ने कहा- पिछले साल CRPF के जवानों ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग में अहम भूमिका निभाई। जवानों ने नक्सलियों के मजबूत ठिकानों में न सिर्फ ऑपरेशन चलाए बल्कि शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया। सरकार ने मार्च 2026 में देश को नक्सल मुक्त घोषित किया था। इस अभियान में CRPF की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
मणिपुर और जम्मू-कश्मीर में भी लगातार तैनाती
मणिपुर में मई 2023 में हिंसा शुरू होने के बाद से CRPF के जवान तैनात हैं। राज्य में पिछले एक साल के दौरान भी कई बार हिंसा की घटनाएं सामने आईं। वहीं, जम्मू-कश्मीर में भी पिछले 12 महीनों के दौरान आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन भी जारी रहे। इन संवेदनशील इलाकों में तैनाती और जोखिम भरे ऑपरेशन्स के बावजूद एक साल तक किसी जवान का शहीद न होना CRPF की रणनीति में आए बदलाव को भी दिखाता है।
1947 से अब तक 2,268 जवान ऑपरेशन में शहीद
CRPF के आंकड़ों के मुताबिक, 1947 से 2026 के बीच ऑपरेशनल अभियानों में 2268 जवानों की जान गई है। यानी औसतन हर साल 28 से अधिक जवान शहीद हुए। साल 2010 CRPF के लिए सबसे घातक रहा। इस साल 143 जवानों की ऑपरेशनल फेटेलिटी दर्ज की गई। इसमें माओवादियों के एक बड़े घात लगाकर किए गए हमले में 75 CRPF जवान शहीद हुए थे।

हर ऑपरेशन में जरूरत से डेढ़ गुना जवानों की तैनाती
CRPF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ऑपरेशन में जवानों की मौत रोकने के लिए लगातार रणनीतिक बदलाव किए गए हैं। जवानों को बेहतर और आधुनिक सुरक्षा उपकरण और हथियारों से लैस कराने के साथ हर ऑपरेशन की डिटेल प्लानिंग की जाती है। संवेदनशील इलाकों में सामान्य प्रशासनिक गतिविधियों को भी ऑपरेशनल मूवमेंट माना जाता है और उसी स्तर की सावधानियां बरती जाती हैं। इसके अलावा हर ऑपरेशन में जरूरत के मुकाबले डेढ़ गुना जवानों की तैनाती की जाती है।
अधिकारी ने बताया कि पिछले साल कर्रेगुट्टालू पहाड़ियों में चलाए गए ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के दौरान भी किसी जवान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था, जबकि इस ऑपरेशन में 21 नक्सली मारे गए थे।
घायल जवानों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने पर जोर
CRPF ने अपने पुराने ऑपरेशनल रिकॉर्ड का एनालिसिस किया तो एक अहम बात सामने आई। आंकड़ों के मुताबिक, ऑपरेशन में घायल होने के बाद होने वाली मौतों में करीब 75 से 80 प्रतिशत मौतें घायल होने के कुछ दिनों बाद होती थीं।
इससे यह सामने आया कि समय पर बेहतर इलाज मिलने से कई जवानों की जान बचाई जा सकती है। इसके बाद गृह मंत्रालय (MHA) की मदद से घायल जवानों को एयर एंबुलेंस के जरिए तेजी से दूसरे और बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत की गई।

