सरकार ने कैसे संभाला CJP का संसद मार्च: पुलिस को संयम बरतने को कहा, प्रोटेस्टर्स को धीरे-धीरे आगे बढ़ने दिया; जेपी नड्डा को प्रदर्शनकारियों से बातचीत की जिम्मेदारी दी
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CJP के बुलाए गए संसद मार्च में सोमवार को हजारों की तादाद में लोग शामिल हुए। सपा, आप समेत कुछ पॉलिटिकल पार्टियां भी इस मार्च में शामिल हुईं।
नेशनल डेस्क। NEET पेपर लीक समेत कई मुद्दों को लेकर सोमवार (20 जुलाई) को जंतर-मंतर से लेकर संसद भवन तक बहुत कुछ हुआ। CJP ने मार्च निकाला, पुलिस से झड़प हुई, कई लोग घायल भी हुए। पिछले 12 साल में पहली बार संसद भवन के ठीक बाहर इस तरह का विरोध प्रदर्शन देखा गया।
इन सब के बीच पहली बार CJP लीडर्स और सरकार के बीच एक बैठक हुई। सरकार की ओर से हेल्थ मिनिस्टर जेपी नड्डा ने CJP डेलिगेशन की बात सुनी। इस मुलाकात में क्या कुछ हुआ और बाहर प्रदर्शन को कंट्रोल करने के लिए सरकार किस तरह से अलर्ट थी, यह पूरी कहानी इस आर्टिकल के जरिए समझें…
पुलिस को उकसावे वाली कार्रवाई से बचने के निर्देश
सुबह 9.30 बजे जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारियों का संसद मार्च शुरू हुआ। पुलिस की रोका-टोकी और हल्की-फुल्की झड़प के बीच लोगों का हुजूम 11 बजे तक पार्लियामेंट स्ट्रीट तक पहुंच गया। गृह मंत्री अमित शाह करीब 11.30 बजे संसद भवन पहुंचे। संसद के दोनों सदनों में बार-बार कार्यवाही स्थगित हो रही थी। इस बीच शाह लगातार हालात पर नजर बनाए हुए थे।
NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वह दिल्ली पुलिस कमिश्नर, गृह सचिव और इंटेलिजेंस ब्यूरो के चीफ के साथ संपर्क में थे। पुलिस को साफ निर्देश दिए गए थे कि वह संयम बरते, प्रदर्शनकारियों के उकसावे में न आए और ऐसी कोई कार्रवाई न करे जिससे सरकार के खिलाफ गलत संदेश जाए।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की ओर पत्थर फेंके। इसके बावजूद पुलिस ने ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं किया। हल्के लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले का ऑप्शन चुना गया। सूत्रों ने बताया कि हमलों में प्रदर्शनकारियों से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए, लेकिन पुलिस ने हालात को और बिगड़ने नहीं दिया।

इसी बीच सरकार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला। सरकार ने हेल्थ मिनिस्टर और राज्यसभा के नेता सदन जेपी नड्डा को प्रदर्शनकारियों से बातचीत की जिम्मेदारी दी।
नड्डा को ही क्यों चुना गया?
NEET परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कराती है। NTA शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है, लेकिन NEET का सीधा संबंध स्वास्थ्य मंत्रालय से भी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत काम करने वाला नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) NEET के सिलेबस, न्यूनतम योग्यता और कटऑफ से जुड़े नियम तय करता है। इसके अलावा MBBS और BDS सीटों के अलोकेशन, ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग और राज्यों के साथ कोर्डिनेशन की जिम्मेदारी भी स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़ी है। इसी वजह से सरकार ने NEET से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए जेपी नड्डा को चुना।

पहले पूछा- मांगें लिखकर क्यों नहीं लाए?
सूत्रों के मुताबिक, नड्डा और CJP प्रतिनिधियों के बीच दो दौर की बातचीत हुई। पहली बैठक करीब 11.50 पर हुई। नड्डा ने प्रतिनिधियों से उनकी मांगों के बारे में पूछा। प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें बताईं। इसके बाद नड्डा ने पूछा कि वे अपनी मांगें लिखित में क्यों नहीं लाए। उन्होंने लिखित ज्ञापन देने को कहा।
इसके बाद शाम करीब 4 बजे CJP के दोनों लीडर्स ने नड्डा को अपनी 3 मांगें लिखित में दीं। सूत्रों के मुताबिक, नड्डा ने CJP की इन मांगों पर कोई वादा नहीं किया। हालांकि, उन्होंने प्रदर्शन खत्म करने और प्रशासन को हालात सामान्य करने में मदद करने की अपील की। नड्डा लगातार अमित शाह के संपर्क में भी थे।
उधर अमित शाह संसद भवन स्थित अपने ऑफिस में कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के साथ लगातार बैठक करते रहे।
सरकार एक साथ दो मोर्चों पर काम कर रही थी। एक तरफ संसद के बाहर प्रदर्शन को संभालना था, तो दूसरी तरफ संसद के अंदर विपक्ष के हमलों का जवाब देना था।
सरकार को प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक समर्थन का शक
सरकार का मानना है कि सोमवार के प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन हासिल था। इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन में चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल थे। हालांकि, करीब 1000 से 1500 स्टूडेंट ऐसे भी थे, जिनकी NEET और दूसरी परीक्षाओं को लेकर वास्तविक शिकायतें थीं।
दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली में बड़े स्तर पर सिक्योरिटी अरेंजमेंट कर रखे थे। कई जगह बैरिकेडिंग की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में लोग ट्रेन और बसों के जरिए दिल्ली पहुंचे। संसद भवन के आसपास के कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए थे। इसके कारण वहां पहुंचने वाले लोगों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी।

प्रोटेस्ट में स्टूडेंट कम, नेता ज्यादा!
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का मानना है कि अब तक NEET, JEE और CUET जैसी तीन बड़ी परीक्षाओं में 50 लाख से ज्यादा स्टूडेंट शामिल हो चुके हैं। इनमें करीब 10 लाख स्टूडेंट ने कॉमन एंट्रेंस टेस्ट दिए हैं, जबकि 40 लाख से ज्यादा स्टूडेंट देशभर में अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं में शामिल हुए हैं।
कई जगहों पर काउंसलिंग और एडमिशन की प्रोसेस शुरू हो चुकी है। सरकार का मानना है कि ऐसे में ज्यादातर स्टूडेंट इस वक्त एडमिशन और काउंसलिंग पर ध्यान दे रहे हैं। इसलिए बड़ी संख्या में उनके प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना कम है। ऐसे में ये प्रदर्शन राजनीतिक मकसद से प्रेरित नजर आते हैं।
CJP की तीन मांगों पर सरकार का क्या रुख?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, CJP की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग राजनीतिक है। सरकार इस मांग को मानने के पक्ष में नहीं है। सूत्र ने कहा कि NEET पेपर लीक मामले की CBI जांच चल रही है और मामले से जुड़े अधिकारियों को पहले ही हटाया जा चुका है।
सोनम वांगचुक अभी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें कब छुट्टी मिलेगी, यह उनकी सेहत और डॉक्टरों के आकलन पर निर्भर करेगा। वहीं, पेपर लीक और अन्य मामलों से जुड़े छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग पर सरकार के सामने फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

