डेमोक्रेट्स की जीत पर दुनिया के रिएक्शन: रूस ने कहा- हमारी फॉरेन पॉलिसी नहीं बदलेगी; स्पेन बोला- अब हमारे यहां बदलाव होगा
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अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेट्स की जीत पर ईरान, रूस, स्पेन, ब्रिटेन, फ्रांस और दूसरे देशों के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। तस्वीर में एक अमेरिकी बुजुर्ग चुनाव को देखते हुए नजर आ रहे हैं- फाइल
इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी हार गई है। डेमोक्रेट्स ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट, दोनों पर कब्जा कर लिया है। इस नतीजे पर दुनिया के कई देशों और नेताओं के रिएक्शन सामने आए हैं।
ईरान ने इसे जंग के खिलाफ दिया गया मैसेज बताया है। वहीं, रूस ने कहा है कि चुनावी नतीजों से उसकी फॉरेन पॉलिसी नहीं बदलेगी। यूरोप के कुछ लीडर्स ने यूक्रेन को अमेरिकी मदद और क्लाइमेट पॉलिसी में बदलाव की उम्मीद जताई है। आइए जानते हैं किस देश ने क्या कहा...
रूस
रूस ने कहा है कि अमेरिकी चुनाव के नतीजों से हमारी फॉरेन पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं होगा। क्रेमलिन के स्पोक्सपर्सन दिमित्री पेस्कोव ने उम्मीद जताई कि डेमोक्रेट्स के कांग्रेस पर कंट्रोल के बावजूद ट्रम्प रूस-यूक्रेन के बीच पीस डील कराने की कोशिश जारी रखेंगे।

स्पेन
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने अमेरिकी इलेक्शन के नतीजों का स्वागत किया। उन्होंने कहा- अमेरिका के लोगों ने अमीर तबके को फायदा पहुंचाने वाली पॉलिसी के खिलाफ वोट किया। ऐसा बदलाव पहले ब्राजील में हुआ, अब US में हुआ है और जल्द ही स्पेन में भी देखने को मिल सकता है। स्पेन में 29 नवंबर को चुनाव होने हैं।

यूरोपियन यूनियन
यूरोपियन पार्लियामेंट की वाइस प्रेसिडेंट क्रिस्टेल शाल्डेमोज ने कहा कि डेमोक्रेट्स की जीत से यूक्रेन को मिलने वाली मदद, ग्रीन ट्रांजिशन और दुनिया के दूसरे देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। यूरोप के लिए यह नतीजा इसलिए भी अहम है, क्योंकि ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के दौरान यूक्रेन की मदद करने और रूस के खिलाफ एक्शन को लेकर कई बार मतभेद सामने आए हैं।

ब्रिटेन
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने कहा कि दुनिया को अब ईरान जंग खत्म करने और रूस-यूक्रेन जंग रोकने पर ध्यान देना चाहिए। जब तक ईरान के साथ मिलिट्री कॉन्फ्लिक्ट जारी रहेगा, तब तक एनर्जी क्राइसिस और महंगाई से राहत मिलना मुश्किल होगा। बता दें कि ब्रिटेन में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों और रोजमर्रा के खर्च को लेकर चिंता है।

साउथ अफ्रीका
साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि अमेरिकी चुनाव के नतीजे दुनिया के रिश्तों में नए दौर की शुरुआत कर सकते हैं।अमेरिकी जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के दौरान US-साउथ अफ्रीका के रिश्तों में तनाव बढ़ा था।
ट्रम्प ने साउथ अफ्रीका में श्वेत अफ्रीकानर किसानों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद अमेरिका ने साउथ अफ्रीका के कुछ अफसरों पर पाबंदियां भी लगाई थी।
फ्रांस
फ्रांस के इकोनॉमी मिनिस्टर रोलैंड लेस्क्यूर ने कहा कि पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि चुनावी हार के बाद ट्रम्प अपनी ग्लोबल पॉलिसी में बदलाव करते हैं या नहीं।

ट्रम्प के सामने दो रास्ते हैं। वे पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और लोगों की परेशानी पर ध्यान देते हुए दुनिया के मामलों में अमेरिकी दखल कम कर सकते हैं या अपनी पुरानी पॉलिसी जारी रख सकते हैं। लेस्क्यूर के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ट्रम्प क्या फैसला लेते हैं।
नॉर्वे
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने कहा- अब अमेरिका की पॉलिटिक्स में ऐसी आवाजें मजबूत हुई हैं, जिनकी सोच क्लाइमेट, एनवायरनमेंट, फॉरेन पॉलिसी और दूसरे देशों को दी जाने वाली मदद के मुद्दे पर यूरोप से ज्यादा मेल खाती है। इससे अमेरिका और यूरोप के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
ताइवान:

ताइवान के फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा कि अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते किसी एक पार्टी पर निर्भर नहीं हैं। ताइवान की पॉलिसी हमेशा दोनों अमेरिकी पार्टियों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने की रही है। नई कांग्रेस के साथ भी सिक्योरिटी, ट्रेड और टेक्नोलॉजी के सेक्टर में सहयोग जारी रहेगा। ताइवान के लिए अमेरिका के साथ डिफेंस और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी से जुड़ा कोऑपरेशन खास अहमियत रखता है।

