नेपाल में मेडिकल यूज के लिए गांजा लीगल: गंडकी राज्य ने नया कानून बनाया; बिहार पर इसका क्या असर होगा
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नेपाल के गंडकी राज्य में मेडिकल यूज के लिए गांजा की खेती और इसके इस्तेमाल से जुड़े कानून को मंजूरी दे दी है।- फाइल
इंटरनेशनल डेस्क। नेपाल के बिहार से सटे एक राज्य ने मेडिकल यूज के लिए गांजा (Cannabis) की खेती और इस्तेमाल को लीगल कर दिया। इसके साथ ही गंडकी नेपाल का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने मेडिकल जरूरतों के लिए कैनाबिस की खेती को कानूनी मंजूरी दी है। खास बात यह है कि गंडकी की सीमा बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर से लगती है। बिहार में शराब-गांजां की बिक्री और सेवन पर रोक है। ऐसे में अब सीमा के दोनों तरफ नशे को लेकर बिल्कुल अलग पॉलिसी बन गई हैं। आइए हैं क्या है नेपाल का नया कानून और इससे नेपाल से सटे बिहार के इलाकों में क्या असर होगा।
नेपाल के गंडकी राज्य में यह कानून कैसे बना
नेपाल के गंडकी प्रॉविन्स ने यह नियम किसी आदेश के जरिए पारित नहीं किया है। इसे बाकायदा स्टेट एसेम्बली में बिल पास कर बनाया गया है। इसके लिए इसी साल 9 जुलाई को राज्य की इंडस्ट्री और टूरिज्म मिनिस्टर यशोदा रिमाल ने एसेम्बली में मेडिकल एंड इंडस्ट्रीयल पपर्स मारिजुआना कल्टीवेशन (रेगुलेशन एंड मैनेजमेंट) बिल पेश किया था। 14 जुलाई को इसे गवर्नर डिल्लराज भट्ट के पास भेजा गया।

एक बार गवर्नर ने लौटा दिया विधेयक
गवर्नर ने पहले सेंट्रल लॉ Narcotic Drugs Control Act, 1976 का हवाला देते हुए रोक दिया। हालांकि,इसके बावजूद 31 जुलाई काे यह विधेयक बिना किसी बदलाव के पारित कर दिया गया। नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 201(4) के तहत दोबारा पास होकर आए बिल पर गवर्नर को 15 दिनों के भीतर फैसला लेना होता है। इसी प्रक्रिया के तहत गवर्नर डिल्लीराज भट्ट ने 3 अगस्त को बिल पर साइन कर दिए। अब यह कानून बन चुका है। हालांकि, हालांकि, नेपाल के फेडरल लॉ Narcotic Drugs Control Act, 1976 के तहत देशभर में गांजे पर प्रतिबंध अभी भी लागू है।
मर्जी से गांजा की खेती नहीं कर पाएंगे किसान
नेपाल में लागू हुए इस नए कानून के तहत किसान अपनी मर्जी से गांजा की खेती नहीं कर सकेंगे। इसके लिए स्टेट गर्वनमेंट से पहले ऑफिशियली परमिशन लेनी होगी। खेती की मॉनिटरिंग भी सरकार करेगी। कानून का मकसद मेडिकल इस्तेमाल के लिए कैनाबिस की खेती को रेगुलेट (Regulate) करना है। इसे मनोरंजन या नशे के लिए गांजा इस्तेमाल करने की खुली छूट नहीं माना गया है। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानून को गंडकी के मुख्यमंत्री सुरेंद्र राज पांडे की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया है।

नेपाल के राष्ट्रीय कानून से अलग फैसला
गंडकी का फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि नेपाल के राष्ट्रीय कानून में अभी भी गांजा की खेती, रखने और इस्तेमाल पर रोक है। मौजूदा नियमों के तहत निजी इस्तेमाल के लिए गांजा रखने पर एक महीने तक की जेल हो सकती है। वहीं गांजा बेचने या बांटने के मामले में क्वांटिटी के आधार पर 10 साल तक की जेल का प्रावधान है। ऐसे में गंडकी का नया कानून नेपाल की नेशनल नारकोटिक्स पॉलिसी के बिल्कुल उलटा है। राज्य की विधानसभा ने इसे सर्वसम्मति से पास किया है। खास बात ये भी है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने इसका समर्थन किया।
नेपाल में गांजा कोई नई चीज नहीं
नेपाल में गांजा का इस्तेमाल सिर्फ नशे तक सीमित नहीं रहा है। यह देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का भी हिस्सा रहा है। गांजा का पौधा नेपाल में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। खास तौर पर महाशिवरात्रि के दौरान मंदिरों में गांजा पीने की परंपरा देखने को मिलती है। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान कई जगहों पर प्रशासन भी गांजा पीने या बेचने चालों पर कोई सख्त एक्शन नहीं लेता। लंबे समय से नेपाल में एक्टिविस्ट (Activists) भी गांजा कानून में बदलाव की मांग करते रहे हैं।

1970 तक खुली थी गांजा की बिक्री
नेपाल में गांजा पर हमेशा से प्रतिबंध नहीं था। 1970 के दशक तक देश में गांजा खुले तौर पर बेचा और इस्तेमाल किया जाता था। उस दौर में नेपाल गांजा संस्कृति के लिए फॉरेन टूरिस्ट्स के बीच भी बेहद पॉपुलर। हालांकि, 1970 के दशक के आखिर में नेपाल ने कई दूसरे देशों की तरह गांजा बेचने और उसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी। इसके बाद इसका कानूनी कारोबार बंद कर दिया गया। DW की रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौर में नेपाल में बड़ी संख्या में आने वाले विदेशी हिप्पी टूरिस्ट्स पर भी एक्शन हुआ।
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बिहार पर क्यों पड़ सकती है नजर
गंडकी और बिहार की सीमा करीब होने की वजह से अब इस फैसले का असर बिहार तक होने की उम्मीद है। बिहार में शराबबंदी लागू है। इसके बाद बड़े पैमाने पर युवाओं में दूसरे नशे की लगत में आने की भी चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में सीमा पार मेडिकल यूज के लिए गांजा की खेती और इस्तेमाल को मिली कानूनी मंजूरी मिलने का असर बिहार पर भी हो सकता है। बिहार में गांजा की स्मगलिंग बढ़ने की भी आशंका जताई जाती है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि गंडकी के इस फैसले का बिहार में गांजा की तस्करी या इस्तेमाल पर क्या असर पड़ेगा। इसके लिए सीमा पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका अहम होगी।

भारत में गांजा को लेकर क्या नियम
भारत में गांजा को लेकर नियम काफी सख्त हैं। हालांकि, सरकारी मंजूरी के तहत मेडिकल और साइंटिफिक यूज के लिए कुछ खास केसेज में इजाजत दी जा सकती है। भारत में गांजा से जुड़े कानून को लेकर अक्सर भांग और गांजा को एक ही माना जाता है, लेकिन इनकी लीगल डेफिनिशन अलग-अलग है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज एक्ट, 1985 के तहत कैनबिस के रेजिन यानी चरस और पौधे के फूल या फल वाले हिस्से यानी गांजा पर पाबंदी है। वहीं पत्तियों और बीजों को इस कानून में नारकोटिक ड्रग के तौर पर शामिल नहीं किया गया है।इसी वजह से कई राज्यों में कंट्रोल्ड ढंग से भांग का इस्तेमाल कानूनी है।
गंडकी का फैसला क्यों अहम
गंडकी का फैसला नेपाल में गांजा को लेकर नीति बदलने की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। अभी यह मंजूरी सिर्फ मेडिकल यूज और सरकारी की निगरानी में होने वाली खेती तक ही है। लेकिन पहली बार नेपाल के किसी राज्य ने नेशनल बैन से जुड़े मामले में कोई अलग फैसला लिया है। दूसरी तरफ, बिहार से इसकी सीमा लगती है। इसलिए आने वाले समय में मेडिकल कैनाबिस की खेती, बॉर्डर सिक्योरिटी और स्मगलिंग को लेकर निगरानी अहम होगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि गंडकी का यह एक्सपेरिमेंट सिर्फ मेडिकल सेक्टर तक रहता है या नेपाल और भी बड़े पैमाने पर इसे लीगल करता है

