इजराइल चुनाव में किसी को बहुमत नहीं: नेतन्याहू की पार्टी सबसे आगे, लेकिन बहुमत से दूर; अरब पार्टियों के पास सत्ता की चाबी
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इजराइल चुनाव के एग्जिट पोल में नेतन्याहू की लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है, लेकिन किसी गुट को 61 सीटों का बहुमत नहीं मिलता नजर आ रहा।- फाइल फोटो
इंटरनेशनल डेस्क। इजराइल इलेक्शन में इस बार बड़ा उलटफेर दिखने को मिल रहा है। वोटिंग के बाद गिनती जारी है। एग्जिट पोल के अनुमानों के उलट नेतन्याहू की लिकुड पार्टी आगे निकलती नजर आ रही है। वहीं, नेतन्याहू के मुकाबले में उतरी पूर्व आर्मी चीफ गादी आइजनकोट की पार्टी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, दोनों बड़ी पार्टियां सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 के मैजिकल फिगर से बेहद दूर हैं।
इजराइल के टीवी चैनल Kan 11, Channel 12 और Channel 13 के एग्जिट पोल में लिकुड को करीब 25 से 27 सीटें मिलने का अनुमान है। गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी को करीब 21 से 23 सीटें मिल सकती हैं।
नफ्ताली बेनेट की बैयाचद पार्टी को करीब 12 से 14 सीटें मिलने का अनुमान है। इन आंकड़ों में चैनलों के बीच कुछ अंतर है। लेकिन एक बात साफ है कि लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है। वहीं, याशर भी मजबूत स्थिति में है। आइए, जानते हैं इजराइल इलेक्शन को लेकर क्या कहते हैं एग्जिट पोल के आंकड़े

नेतन्याहू और विपक्ष, दोनों बहुमत से दूर
एग्जिट पोल के मुताबिक, नेतन्याहू के समर्थन वाले राइटविंग और रिलिजियस पार्टियों को मिलाकर करीब 50 से 52 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहीं विपक्षी पार्टियों को करीब 49 से 53 सीटें मिलने का अनुमान है। यानी दोनों ही गुट 61 सीटों के जादुई आंकड़े से दूर हैं।
अलग-अलग चैनलों के अनुमान में सीटों की संख्या बदल रही है, लेकिन, दोनों प्रबल दावेदार पार्टियों को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। ऐसे में सरकार बनाने के लिए चुनाव के बाद दूसरी पार्टियों से बातचीत करनी होगी।
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अरब पार्टियां बन सकती हैं किंगमेकर
इस चुनाव में सबसे अहम फैक्टर अरब पार्टियों का प्रदर्शन है। एग्जिट पोल में जॉइंट लिस्ट और यूनाइटेड अरब लिस्ट यानी राम को मिलाकर करीब 17 से 19 सीटें मिलने का अनुमान है। अगर किसी भी मेन गुट को बहुमत नहीं मिलता, तो अरब पार्टियों का समर्थन सरकार बनाने में अहम हो सकता है।
हालांकि, दोनों अरब पार्टियों की अपनी अलग डिमांड्स हैं। उनका सपोर्ट किसे मिलेगा, यह चुनाव के बाद होने वाली बातचीत से तय होगा। वे किसी अलायंस में शामिल हुए बिना भी बाहर से सपोर्ट कर सकती हैं। ऐसे में फिलहाल ऐसा लग रहा है कि अरब पार्टियां ही किंगमेकर के रोल में होंगी।
नेतन्याहू के लिए आगे की राह आसान नहीं
लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती है, तो भी नेतन्याहू को अपने सहयोगी दलों को साथ रखना होगा और बहुमत जुटाना होगा। दूसरी ओर, आइजेनकोट की याशर पार्टी और दूसरी विपक्षी पार्टियां भी सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। अगर कोई भी गुट जरूरी आंकड़ा नहीं जुटा पाता, तो अलायंस बनाने के लिए लंबी बातचीत करनी पड़ सकती है।
एग्जिट पोल के बाद नेतन्याहू ने दक्षिणपंथी सरकार बनाने की बात कही है, जबकि विपक्ष बदलाव की उम्मीद जता रहा है। अब अंतिम सीटों की गिनती और पार्टियों के बीच होने वाली बातचीत तय करेगी कि अगली सरकार किसकी बनेगी।
रिजल्ट कब आएगा
वोटिंग 27 अक्टूबर को हुई थी। मतदान खत्म होने के बाद टीवी चैनलों ने एग्जिट पोल जारी किए। नतीजों में इन अनुमानों से अंतर हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, अंतिम नतीजे 4 नवंबर को जारी किए जाने हैं। उससे पहले वोटों की गिनती से तस्वीर और साफ हो सकती है।

