रात 2.30 बजे दोस्त को मैसेज: उसने 4 बजे देखा; तब तक वो तन्हा दर्द से तड़पते रहे- यहां आखिरी पलों की पूरी कहानी
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नाना पाटेकर थिएटर को फिल्मों से ज्यादा पसंद करते थे। वो कहते थे- मैं तो एक्टर हूं, हीरो नहीं हूं।
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नाना पाटेकर थिएटर को फिल्मों से ज्यादा पसंद करते थे। वो कहते थे- मैं तो एक्टर हूं, हीरो नहीं हूं।