भारत पहुंचेगा समुद्र में फंसा 90.5 लाख बैरल रूसी तेल: ईरान जंग के बीच US बोला- ग्लोबल सप्लाई बनाए रखना जरूरी; भारत ने कहा- हमारे पास पर्याप्त स्टोरेज
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अमेरिका ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल भारत लाने के लिए 30 दिन की मोहलत दी है।
इंटरनेशनल डेस्क. मिडिल में बढ़ती टेंशन के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी से क्रूड ऑयल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है। यह राहत ऐसे समय आई है जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का दावा किया है। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही घटने से गल्फ रीजन में ऑयल सप्लाई रुकने की आशंका बढ़ गई है। इस बीच, भारत ने भी कहा है कि देश के पास करीब 74 दिन का स्ट्रैटेजिक ऑयल स्टोरेज मौजूद है। भारत ने कहा है कि फिलहाल डोमेस्टिक क्रूड सप्लाई रुकने का कोई खतरा नहीं है।
केवल समुद्र में फंसे रूसी तेल लाने की इजाजत
अमेरिकी फाइनेंस मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि भारत को 30 दिन के लिए रूसी ऊर्जा खरीदने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि यह छूट सीमित है और इससे रूस को बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा। यह इजाजत केवल उस रूसी तेल के लिए है जो पहले से समुद्र में फंसा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक एशियाई जलक्षेत्र में लगभग 9.5 मिलियन बैरल रूसी तेल जहाजों पर मौजूद है।
कब तक लागू रहेगी यह छूट
अमेरिका की ओर से दी गई यह छूट 5 मार्च से पहले जहाजों पर लोड किए गए तेल पर लागू होगी। यह परमिशन 4 अप्रैल तक यानी लगभग एक महीने तक प्रभावी रहेगी। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि यह कदम ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर प्रेशर कम करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि ईरान की ओर से लगातार किए जा रहे हमलों की वजह से दुनिया भर में तेल सप्लाई पर संकट का खतरा बढ़ गया है।
होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक होने से बढ़ी चिंता
ईरान ने हाल ही में दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री ट्रेड रूट में से एक है। माना जाता है कि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। अगर यहां लंबे समय तक संकट बना रहा तो ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
भारत के पास कितने दिन का तेल स्टॉक
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार देश की जरूरतों को करीब 74 दिनों तक पूरा कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ती टेंशन से भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं है। हालांकि ग्लोबल मार्केट में कीमतें बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।

