50 साल बाद चांद के सफर पर इंसान: 10 दिन में चांद का चक्कर लगाकर लौटेंगे 4 एस्ट्रोनॉट्स; NASA का Artemis-II मिशन लॉन्च
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इंटरनेशनल डेस्क. 50 साल से ज्यादा समय बाद इंसान फिर चांद की ओर बढ़ा है। बुधवार अल सुबह अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का आर्टेमिस-2 मिशन चार एस्ट्रोनॉट्स को लेकर डीप स्पेस की तरफ रवाना हो गया। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सुबह करीब 4:04 बजे स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट ने उड़ान भरी। ओरियन स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष यात्रियों को चांद के पास ले जाकर वापस पृथ्वी पर लाएगा। यह मिशन 1972 के बाद पहला ऐसा मून मिशन है, जिसमें इंसानों को भेजा गया है। इस मिशन को आने वाले समय में मून पर लैंडिंग की तैयारी माना जा रहा है।
लॉन्च के करीब 8 मिनट बाद कैप्सूल रॉकेट से अलग
आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग सुबह करीब 4:04 बजे हुई। दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट्स में से एक स्पेस लॉन्च सिस्टम, ओरियन कैप्सूल को लेकर आसमान में उठा। लॉन्च के करीब 8 मिनट बाद कैप्सूल रॉकेट से अलग हो गया। शुरुआत में स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की आर्बिट में रहा, ताकि सभी जरूरी सिस्टम्स की जांच हो सके। इससे पहले कई बार तकनीकी खामियों और हीलियम लीकेज जैसी समस्याओं के कारण लॉन्च टल चुका था।
मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं
इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं, जिनमें रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टिना कोच और जेरेमी हैंसन शामिल हैं। यह पहली बार है जब किसी मून मिशन में एक महिला, एक ब्लैक एस्ट्रोनॉट और एक गैर-अमेरिकी को शामिल किया गया है। कनाडा भी इस मिशन में पार्टनर है।

करीब 10 दिन अंतरिक्ष में रहेंगे एस्ट्रोनॉट्स
मिशन करीब 10 दिन का होगा। पहले दिन एस्ट्रोनॉट स्पेसक्राफ्ट के अंदर सिस्टम सेटअप करेंगे। स्पेसक्राफ्ट के अंदर जरूरी सिस्टम चालू करेंगे। इसमें पानी की सप्लाई, टॉयलेट सिस्टम, कार्बन डाइऑक्साइड हटाने की व्यवस्था और फायर सेफ्टी शामिल है। सीमित जगह के कारण उन्हें शिफ्ट में सोना होगा। वे पायलटिंग और दूसरे टेक्निकल टेस्टिंग भी करेंगे। यह स्पेसक्राफ्ट पहली बार इंसानों को लेकर जा रहा है, इसलिए हर टेस्ट बेहद अहम माना जा रहा है।
चांद तक पहुंचने में चार दिन लगेंगे
आर्टेमिस-2 को चांद तक पहुंचने में करीब चार दिन लगेंगे। यह मिशन एक खास फिगर-8 ट्राजेक्टरी पर काम करता है। दूसरे दिन ट्रांस-लूनर इंजेक्शन बर्न के बाद स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की ऑर्बिट छोड़ देगा। यह फ्री-रिटर्न पाथ पर चलेगा, यानी अगर कोई समस्या आती है तो चांद की ग्रैविटी इसे खुद पृथ्वी की ओर लौटा देगी। चांद के पास पहुंचकर ओरियन ऑर्बिट में नहीं जाएगा, बल्कि फ्लायबाय करते हुए वापस लौटेगा।
मिशन क्यों माना जा रहा अहम
यह मिशन नासा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इसके जरिए डीप स्पेस में मानव शरीर पर असर, रेडिएशन और लंबे समय तक रहने की क्षमता के बारे में स्टडी किया जाएगा। नासा को यह साबित करना है कि ओरियन स्पेसक्राफ्ट लंबी दूरी के मिशन के लिए सुरक्षित है। यही मिशन आगे चांद पर उतरने की नींव बनेगा। अगर यह मिशन सफल रहता है, तो अगला टारगेट 2028 तक चांद पर इंसानों को उतारना है। इसके साथ ही अमेरिका चांद पर परमानेंट बेस बनाने के मिशन पर भी काम कर रहा है, जिससे आने वाले समय में मंगल मिशन का रास्ता साफ हो सके।

