तलाक का ज्वाइंट होम लोन पर क्या असर: पति-पत्नी में से EMI कौन भरेगा, मकान किसे मिलेगा; जानें क्या हैं बैंक के नियम
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बिजनेस डेस्क. तलाक के बाद शादी का रिश्ता तो खत्म हो जाता है, लेकिन अगर पति-पत्नी ने मिलकर कोई ज्वाइंट होम लोन लिया है, तो वो आसानी से खत्म नहीं होता। अलग होने के फैसले के बाद अक्सर यह सवाल खड़ा हो जाता है, कि बची हुई EMI कौन भरेगा, मकान पर किसका हक होगा और अगर घर बेच दिया गया तो पैसों का बंटवारा कैसे होगा।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि कपल्स को इस मामले में बेहद सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि पर्सनल सेटलमेंट और बैंक के लोन रूल्स में फर्क होता है।
‘राज एक्सप्रेस’ के इस स्पेशल बिजनेस एक्सप्लेनर में आज हम आपको इसी मुद्दे पर जानकारी दे रहे हैं। तो चलिए शुरू करते हैं....
बैंक को तलाक से कोई मतलब नहीं
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड और टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि- तलाक होने से होम लोन की लायबिलिटी अपने आप खत्म नहीं होती। बैंक ने यह लोन दो को-बॉरोअर्स को दिया है। उन्होंने क्लियर किया कि ज्यादातर लोन एग्रीमेंट्स में दोनों पार्टनर्स जॉइंटली एंड सेवरली लायबल होते हैं।
- इसका मतलब है कि बैंक पूरा बकाया पैसा किसी भी एक पार्टनर से वसूल सकता है, और उसकी जिम्मेदारी सिर्फ 50-50% तक सीमित नहीं होती। अगर कोर्ट ने किसी एक पार्टनर को EMI भरने का आदेश दिया भी हो, तब भी किस्त ना जमा करने की स्थिति में बैंक दूसरे पार्टनर पर लीगल एक्शन ले सकता है।
- अन्य टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि पति-पत्नी के बीच हुआ तलाक कोई भी प्राइवेट एग्रीमेंट बैंक की लायबिलिटी को खत्म नहीं करता। जब तक बैंक ऑफिशियली लोन को रीफाइनेंस या रीस्ट्रक्चर करके किसी एक का नाम लोन से नहीं हटा देता, तब तक दोनों जिम्मेदार रहेंगे। अगर EMI मिस होती है, तो दोनों का क्रेडिट स्कोर खराब होगा।

लोन और प्रॉपर्टी हक में फर्क
- ज्यादातर लोग ये मान लेते हैं कि जो EMI भर रहा है, घर भी उसी का होगा। लेकिन कानूनी तौर पर यह एक बड़ी गलती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घर की ओनरशिप और लोन की जिम्मेदारी को अलग-अलग देखना चाहिए। प्रॉपर्टी पर अधिकार सिर्फ रजिस्टर्ड टाइटल डीड से तय होता है, इस बात से नहीं कि EMI किसने भरी है।
- को-बॉरोअर होना और को-ओनर होना दो अलग बातें हैं। ओनरशिप हमेशा रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट्स में दर्ज हिस्सेदारी से तय होती है। अगर कोई एक पार्टनर पूरा घर अपने नाम करना चाहता है, तो उसे बाकायदा स्टाम्प ड्यूटी भरकर प्रॉपर्टी टाइटल अपने नाम ट्रांसफर करवाना होगा।
- इसके अलावा, रहने का अधिकार ओनरशिप से अलग होता है। डोमेस्टिक वायलेंस से महिलाओं के प्रोटेक्शन एक्ट के तहत, महिला को शेयर्ड हाउसहोल्ड में रहने का कानूनी अधिकार मिल सकता है, भले ही रजिस्ट्री में उसका नाम न हो।

मकान बेचने पर पहला हक बैंक का, फिर लगेगा टैक्स
- अगर अलग हो रहे पति-पत्नी प्रॉपर्टी बेचने का फैसला करते हैं, तो बिक्री से मिलने वाले पैसों पर सबसे पहला हक बैंक का होता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मॉर्गेज प्रॉपर्टी बिकने पर सबसे पहले होम लोन का पूरा बकाया अमाउंट चुकाया जाता है। इसके बाद बची हुई रकम को पार्टनर्स की ओनरशिप के रेशियो के हिसाब से बांटा जाता है।
- घर बेचने के बाद दोनों पक्षों को टैक्स लायबिलिटी का भी ध्यान रखना होगा। प्रॉपर्टी की परचेज प्राइस, सेलिंग प्राइस और होल्डिंग पीरियड के आधार पर कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होगा। यह टैक्स दोनों पार्टनर्स को अपनी-अपनी ऑफिशियल ओनरशिप के हिसाब से चुकाना होगा।

फाइनेंशियल नुकसान से बचने के लिए इन बातों का हमेशा ध्यान रखें...
- शुरुआत से ही प्रॉपर्टी में अपनी ओनरशिप का परसेंटेज और फाइनेंशियल कंट्रीब्यूशन लिखित में दर्ज रखें।
- EMI पेमेंट को लेकर किसी भी जुबानी या प्राइवेट एग्रीमेंट के भरोसे न रहें।
- लोन से किसी एक का नाम हटाने के लिए बैंक से रीफाइनेंसिंग की रिटन अप्रूवल जरूर लें।
- तलाक की डिक्री बनवाते समय होम लोन की लायबिलिटी और प्रॉपर्टी टाइटल को अलग-अलग लीगल पॉइंट्स के तौर पर दर्ज करवाएं।

