पुष्य नक्षत्र और धनतेरस पर सोना खरीदने का स्मार्ट तरीका: डिजिटल, ETF और गोल्ड बॉन्ड जैसे ऑप्शन; नकली का झंझट नहीं, टैक्स भी बचेगा
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भारत में गोल्ड खरीदना परंपरा के साथ इन्वेस्टमेंट का ऑप्शन भी बन गया है। डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF इन्वेस्टर्स को अधिक लिक्विडिटी और सुरक्षा देते हैं।
बिजनेस डेस्क। पुष्य नक्षत्र और धनतेरस शुभ दिन माने जाते हैं। इन दोनों दिन लोग सोना खरीदते हैं। पहले लोग सिर्फ जेवर या कॉइन खरीदते थे, लेकिन अब सोने में इन्वेस्टमेंट करने के कई मॉडर्न तरीके आ चुके हैं।
पिछले 12 महीनों में गोल्ड ने लगभग 58% का रिटर्न दिया है। प्राइस रिकॉर्ड हाई पर हैं। फिर भी भारतीयों का सोने के प्रति प्यार कम नहीं हुआ है। अब लोग सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही नहीं, बल्कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB), एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) और गोल्ड म्यूचुअल फंड जैसे स्मार्ट ऑप्शन चुन रहे हैं।
आइए इस फेस्टिव सीजन में जानते हैं सोना खरीदने के 5 स्मार्ट तरीके...
फिजिकल गोल्ड
आप गोल्ड कॉइन या ज्वेलरी खरीद सकते हैं। सोना लेते समय ध्यान रखें कि BIS हॉलमार्क होना जरूरी है। यह गोल्ड की प्योरिटी की गारंटी देता है। मेकिंग चार्जेस 5% से 20% तक हो सकते हैं। अगर आप सिंपल डिजाइन या सिक्के लेते हैं, तो मेकिंग चार्ज कम हो जाता है।
डिजिटल गोल्ड
डिजिटल गोल्ड आप मोबाइल ऐप या वेबसाइट से थोड़े पैसे लगाकर खरीद सकते हैं। यहां आपका सोना सुरक्षित रहता है। चाहें तो इसे बाद में फिजिकल गोल्ड में कन्वर्ट या बेच भी सकते हैं। स्टोरेज और सेफ्टी की चिंता नहीं रहती।
गोल्ड ETF
गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) सीधे फिजिकल गोल्ड में इन्वेस्ट करते हैं, जिससे निवेशक को सोने को अपने पास रखे बिना ही कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रॉफिट मिलता है। इन फंड्स को शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंजों पर खरीदा-बेचा जा सकता है। इसके लिए डीमैट अकाउंट होना जरूरी है। गोल्ड ETF को सिर्फ मार्केट ऑवर्स में खरीदा और बेचा जा सकता है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
यह RBI द्वारा जारी की जाने वाली सरकारी बॉन्ड है। इसकी मैच्योरिटी 8 साल होती है, लेकिन 5 साल बाद एग्जिट का ऑप्शन भी है। इसमें सालना 2.5% का फिक्स ब्याज मिलता है, जो बैंक अकाउंट में जमा होता है। गोल्ड की बढ़ी हुई कीमत पर मिलने वाले प्रॉफिट पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। फिलहाल नए सॉवरेन बॉन्ड ओपन नहीं है। आप इन्हें सेकेंडरी मार्केट से खरीद सकते हैं।
गोल्ड म्यूचुअल फंड
अगर आपके पास डीमैट अकाउंट नहीं है तो ये आसान ऑप्शन है। ये फंड, गोल्ड ETF में इन्वेस्ट करते हैं। आप चाहें को लंपसम या SIP के जरिए निवेश कर सकते हैं। गोल्ड में निवेश करने का आसान और बढ़िया तरीका है।
कौन-सा ऑप्शन सबसे ज्यादा प्रॉफिट, सेफ्टी और टैक्स सेविंग देता है
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बेस |
फिजिकल गोल्ड |
डिजिटल गोल्ड |
गोल्ड ETF |
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड |
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प्योरिटी |
22 कैरेट (मेकिंग चार्ज) |
24 कैरेट (99.9%) |
24 कैरेट (99.5%+) |
24 कैरेट (100%) |
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लागत |
मेकिंग चार्ज (5-20%)+3% GST |
3% GST |
सालना कम खर्च (0.5-1%) |
0 मेकिंग चार्ज, 0 GST |
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सेफ्टी |
खोने और चोरी होने का डर |
सेफ |
डीमैट अकाउंट में पेपर फॉर्म |
सरकारी गारंटी (सबसे सुरक्षित) |
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मिनिमम इन्वेस्टमेंट |
वजन के अनुसार |
100 रुपए से शुरू |
एक यूनिट के हिसाब से |
एक ग्राम |
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लिक्विडिटी |
कभी भी बेच सकते हैं |
कभी भी बेच सकते हैं |
शेयर मार्केट के अनुसार |
8 साल मैच्योरिटी या 5 साल बाद एग्जिट |
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