शशिधर जगदीशन HDFC बैंक के MD & CEO नहीं बनेंगे: 26 अक्टूबर को खत्म होगा मौजूदा कार्यकाल; कैजाद भरूचा नियुक्त हो सकते हैं
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शशिधर जगदीशन ने 1996 में फाइनेंस मैनेजर के तौर पर शुरुआत की थी। (फाइल फोटो)
बिजनेस डेस्क। HDFC बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (MD & CEO) शशिधर जगदीशन ने उनके रीअपॉइंटमेंट से इनकार कर दिया है। कंपनी ने शनिवार (29 अगस्त) को बताया कि उनका मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। इसके बाद वे पद छोड़ देंगे और बैंक की सर्विसेज से रिटायर हो जाएंगे। बैंक के बोर्ड ने कहा कि नए MD एंड CEO के सिलेक्शन की प्रोसेस को तेज कर दिया गया है। वहीं इस खबर के बाद बैंक का शेयर आज तेजी के साथ खुला।
अतानु चक्रवर्ती ने मार्च में दिया था इस्तीफा
अतानु चक्रवर्ती ने मार्च में HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा था कि पिछले दो सालों के दौरान बैंक के कामकाज और तौर-तरीकों में कुछ ऐसी बातें हुईं जो उनकी पर्सनल वैल्यूज और एथिक्स (व्यक्तिगत मूल्य और नैतिकता) के खिलाफ थीं। इसके बाद HDFC बैंक ने एक जांच करवाई। इस समीक्षा में चक्रवर्ती द्वारा उठाए गए एथिकल और गवर्नेंस से जुड़े सवालों का समर्थन करने वाला कोई सबूत या रिकॉर्ड नहीं मिला। बाद में बैंक ने जुलाई में राजीव कुमार को नया चेयरमैन नियुक्त किया।

जगदीशन समेत 3 अधिकारियों पर जुर्माना
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के साथ अपने समझौते की आंतरिक समीक्षा के बाद जुलाई में बैंक ने जिन तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर जुर्माना लगाया था, उनमें जगदीशन भी शामिल थे। बैंक ने जगदीशन, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) श्रीनिवासन वैद्यनाथन और रिटेल एसेट्स के ग्रुप हेड अरविंद वोहरा पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।
इंटरनल कमिटी को गलत इरादे, निजी फायदे या किसी गलत मकसद का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। हालांकि, कमिटी ने ये नतीजा निकाला कि इसमें शामिल कर्मचारियों का व्यवहार बिजनेस के दायरे से बाहर जाकर काम करने (बिजनेस ओवररीच) जैसा था।
मई में मीडिया रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया था कि HDFC बैंक ने बड़े डिपॉजिट हासिल करने के लिए MSRDC को 45 करोड़ रुपए दिए थे। बताया जाता है कि इन पेमेंट्स को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया गया था और जगदीशन को इनके बारे में जानकारी थी।

कैजाद भरूचा हो सकते हैं नए MD & CEO
HDFC बैंक की कमान आगे कौन संभालेगा, ये भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक में लीडरशिप बदलने से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल है। हालांकि कई नाम पर चर्चा हो रही है। मौजूदा डिप्टी MD कैजाद भरूचा इस लिस्ट में सबसे आगे माने जा रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने 28 जुलाई को एक रिपोर्ट में बताया था कि आमतौर पर बैंक नए कार्यकाल के शुरू होने से करीब आठ महीने पहले ही नए CEO-डेजिग्नेट (CEO-पद के लिए चुने गए व्यक्ति) के नाम का ऐलान कर देते हैं।
बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद, अगले 6 महीनों के भीतर RBI की मंजूरी मिलने की उम्मीद होती है। हालांकि, हाल ही में RBI की तरफ से प्रोसेस तेज हुई है। इंडसइंड बैंक, फेडरल बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के CEO की नियुक्ति के मामलों में देखा गया है कि RBI की मंजूरी 35 से 90 दिनों के भीतर मिल गई है।

