PNG से पैसा-वक्त बचेगा, सेफ्टी लाजवाब: इसके फायदे ही फायदे; यहां Q&A के जरिए वो सब, जो आप जरूर जानना चाहेंगे
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नेशनल डेस्क. इसी हफ्ते एक खबर आई और यह हर भारतीय के लिए बेहद अहम थी। सरकार ने कहा- अगर आपके घर के करीब पाइप नैचुरल गैस (PNG) कनेक्शन मिल रहे हैं तो इन्हें फौरन हासिल करें। अगर घर के करीब PNG कनेक्शन फैसेलिटी मौजूद है, और आप फिर भी नहीं लेते तो 3 महीने में आपका LPG कनेक्शन ब्लॉक हो जाएगा... और आप सिलेंडर बुकिंग नहीं कर पाएंगे।
सरकार के इस फैसले पर सवाल उठना लाजिमी है। लेकिन, इससे एक सवाल खुद ही जन्म लेता है कि आखिर यह आदेश क्यों दिया गया? क्या वजह है? मिडिल ईस्ट जंग से इसका क्या ताल्लुक है? और भी कुछ सवाल जो हर आदमी के मन में घुमड़ रहे हैं।
‘राज एक्सप्रेस’ आपको ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश कर रहा है...........
सरकार ने क्या कहा है?
केंद्र चाहता है की ज्यादा से ज्यादा डोमेस्टिक कंज्यूमर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की बजाए पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) अपनाएं। भारत में इस वक्त करीब 33.2 करोड़ LPG यूजर्स हैं। इनमें से करीब 10 करोड़ यूजर्स प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (Pradhan Mantri Ujjwala Yojana यानी PMUY) के तहत आते हैं।

LPG और PNG में बेसिक फर्क क्या है?
- LPG : इसमें प्रोपेन और ब्यूटेन का मिक्सचर लिक्विड फॉर्म में होता है। इसे क्रूड ऑयल रिफाइनिंग और नैचुरल गैस प्रोसेसिंग से तैयार किया जाता है। इसके बाद प्लांट से यह गैस सिलेंडर में ट्रांसफर की जाती है। इसके बाद इसे घरेलू या कमर्शियल यूज के लिए सप्लाई किया जाता है।
- PNG : इसमें ज्यादातर मीथेन होती है। यह पाइप लाइन के जरिए सीधे आपके किचन में मौजूद गैस स्टोव बर्नर तक पहुंचती है। इसको अंडरग्राउंड गैस फील्ड्स में स्टोर किया जाता है और वहां से यह पाइप लाइन तक पहुंचती है।
भारत में PNG की खपत इसलिए भी कम है, क्योंकि इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर हर शहर और दूर-दराज के क्षेत्रों में मौजूद नहीं है। हालांकि, ये भी अब बिल्कुल तय है कि खाड़ी में जारी जंग के खत्म होने के बाद इसका क्रेज बहुत तेजी से बढ़ेगा और सरकार भी सबक सीखेगी। 2024 तक देश में सिर्फ 1.36 करोड़ PNG यूजर्स थे।
सिस्टम में क्या फर्क है?
LPG और PNG के ओवरऑल सिस्टम में बहुत फर्क है। जैसे LPG पूरी तरह बॉटलिंग रिफिल प्लांट, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और फिर घर तक सिलेंडर पहुंचाने वाले नेटवर्क के जरिए काम करती है।
PNG का नेटवर्क बिल्कुल सीधा, सरल और कह सकते हैं कि विदाउद टेंशन वाला है। इसमें रिफिल या सिलेंडर जैसा कोई टेंशन नहीं है। ये सीधे पाइल लाइन के जरिए आपके किचन तक पहुंचती है।

हमारे-आपके लिए LPG-PNG में से कौन बेहतर?
इसका जवाब डेटा से देना बेहतर है….
LPG : इसका 14.2 Kg वाला सिलेंडर मुंबई में 912.50 रुपए का है। दिल्ली में यही सिलेंडर आपको 913 रुपए का खरीदना होता है।
PNG: PNG को आप आसानी से LPG की तुलना में बहुत सस्ता मान सकते हैं। अगर आप एक LPG सिलेंडर हर महीने इस्तेमाल करते हैं और इसके लिए करीब 913 रुपए महीने देते हैं तो PNG में बचत ही बचत है। आमतौर पर हर महीने आपका बिल 700 से 800 रुपए तक ही आएगा। यानी 113 रुपए से लेकर 213 रुपए करीब तक की बचत। ऊपर से न खाली सिलेंडर की चिंता और न रिफिल की फिक्र।
अब सेफ्टी यानी सुरक्षा की बात आसान भाषा में समझाइए?
बिल्कुल जी…। देखिए, PNG यानी मीथेन गैस। यह हवा से बहुत हल्की होती है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर कभी लीकेज प्रॉब्लम भी आता है तो घर में न तो ज्यादा स्मैल आएगी और न आग लगने का खतरा रहेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि, यह हल्की होने की वजह से हवा के साथ ही उड़ जाती है, आपको घर के फर्श पर नहीं ठहरती। इसके अलावा इसके सेफ्टी चैनल्स हर कदम पर होते हैं और जरा से लीकेज को फौरन ऑपरेटर कंपनी पकड़ लेती हैं और चंद मिनट में उस फॉल्ट को रिपेयर कर दिया जाता है।
LPG : यह गैस हवा से भारी होती है, इसलिए आसानी से बाहर नहीं निकलती और अगर घर बंद है तो यह वहां जमा होती रहती है। इसलिए सिलेंडर ब्लास्ट या इसकी वजह से आग लगने की घटनाएं कई बार देखी या सुनी जाती हैं। इसकी स्मैल यानी दुर्गंध भी तेज होती है।

एनवायर्नमेंट फ्रेंडली LPG या PNG?
PNG क्लीन एनर्जी का सोर्स है। इससे हानि नहीं होती। अगर आप PNG कनेक्शन लेते हैं तो शुरू में आपको सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर 5 से 7 हजार रुपए देने होते हैं। जब कभी आप ये कनेक्शन बंद करते हैं तो आपको ये पैसा रिफंड हो जाता है।
‘वन नेशन-वन ग्रिड’ क्या मसला है?
जून 2025 तक देश में PNG नेटवर्क 24.500 किलोमीटर में ऑपरेशनल था। इसके अलावा 10.400 किलोमीटर अंडर कंस्ट्रक्शन फेज में है। सरकार इसे ‘वन नेशन एंड वन ग्रिड’ के तौर पर पेश कर रही है।
अब तेजी से PNG पर शिफ्ट हो रहे लोग
मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने के बाद LPG क्राइसिस की आहट नजर आई, और ये बहुत सामान्य असर था। पेट्रोलियम मिनिस्ट्री में ज्वॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा- 25 दिन में ही 2.5 लाख लोगों ने PNG कनेक्शन के लिए अप्लाई किया है और उन्हें ये कनेक्शन मिल भी गए हैं।
इसके अलावा 2.22 लाख कंज्यूमर ऐसे हैं, जिन्होंने LPG की बजाए अब PNG को ऑप्शन चुना है। सरकार ने भी पेट्रोकैमिकल प्लांट्स और रिफाइनरीज से साफ कहा है कि वो PNG को सबसे पहले डोमेस्टिक यूज के लिए दें।
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