पेट्रोल पंप से बल्क क्वांटिटी नहीं खरीद सकेंगी इंडस्ट्रीज: डीजल बिक्री पर 200 लीटर की लिमिट भी तय; सरकार ने आम नागरिकों की सुविधा का ध्यान कैसे रखा- समझिए
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बिजनेस डेस्क। पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। अब इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और बड़े इंस्टीट्यूशनल कंज्यूमर सामान्य पेट्रोल पंप से थोक यानी बल्क में पेट्रोल-डीजल नहीं खरीद सकेंगे। सरकार का कहना है कि ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन में दिक्कत और बढ़ती डिमांड को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
इसका मकसद है कि आम लोगों को फ्यूल की कमी का सामना न करना पड़े। यह व्यवस्था फिलहाल 90 दिन के लिए लागू की गई है। जरूरत पड़ने इस टाइम ड्यूरेशन को बढ़ाया जा सकता है।
सरकार ने पेट्रोल पंपों से थोक में ईंधन खरीदने पर क्यों रोक लगाई है। इस आदेश का आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा। आइए सवाल-जवाब के जरिए पूरा मामला समझते हैं...
पेट्रोल-डीजल खरीद को लेकर क्या बदला है?
11 जून 2026 को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 'मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के जरिए पेट्रोल-डीजल सप्लाई) आदेश 2026' जारी किया है। इसके तहत इंडिस्ट्रियल और कार्पोरेट् हाउस सामान्य पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं खरीद पाएंगे। उन्हें अपनी जरूरत का पेट्रोल और डीजल सिर्फ ऑथराइज्ड बल्क सप्लाई पॉइंट्स या सेल्फ-कंज्यूमर पंप से लेना होगा।
इस फैसले की वजह क्या
सरकार के अनुसार, जियो पॉलिटिक्स टेंशन का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ रहा है। इससे क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। सरकार ने यह भी देखा कि कई बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक कन्ज्यूमर बल्क सप्लाई की बजाय पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने लगे हैं।
इसकी मुख्य वजह रिटेल और बल्क फ्यूल कॉस्ट या प्राइज का फर्क है। ऐसे में पेट्रोल पंपों पर फ्यूल की डिमांड अचानक बढ़ रही थी, जिससे भविष्य में आम उपभोक्ताओं के लिए कमी की स्थिति पैदा हो सकती थी।

रिटेल और बल्क डीजल रेट्स में कितना फर्क
सरकार के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण डीजल की कीमतों में अंतर माना जा रहा है। दिल्ली में डीजल की कीमत 95.20 रुपए प्रति लीटर है, जबकि बल्क डीजल की कीमत करीब 134.50 रुपए प्रति लीटर है। दोनों के बीच लगभग 39 रुपए प्रति लीटर का अंतर है।
मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने आम लोगों को राहत देने के लिए रिटेल कीमतों को कम रखा है। इसका फायदा उठाते हुए उद्योग, टेलीकॉम टावर ऑपरेटर और बड़े डीजल उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से ही ईंधन खरीदने लगे।
डीजल खरीद पर कौन-कौन से नए नियम लागू हुए हैं
सरकार ने डीजल की बिक्री को लेकर कुछ अतिरिक्त नियम भी लागू किए हैं-
- डीजल सिर्फ गाड़ी के फ्यूल टैंक या पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) से मंजूर कंटेनर में दिया जाएगा।
- ग्राहक को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही मिलेगा। इस डीजल को दोबारा बेचने की अनुमति नहीं होगी।
सरकार के फैसले से कौन प्रभावित होगा
सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर बड़े ईंधन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इनमें शामिल हैं-
- मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स
- व्यावसायिक परिसर
- टेलीकॉम टावर ऑपरेटर
- इंस्टीट्यूशनल
- डीजल जनरेटर का उपयोग करने वाली कंपनियां
अब इन सभी को ऑथराइज्ड बल्क सप्लायर या विशेष उपभोक्ता पंपों से ही ईंधन खरीदना होगा।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा
अगर आप अपनी कार व बाइक में पेट्रोल या डीजल भरवाते हैं, तो फिलहाल किसी बड़े बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि यह फैसला खास तौर पर आम उपभोक्ताओं, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और घरेलू जरूरतों के लिए ईंधन की अवेलेबिलिटी बनाए रखने के लिए गया है।
ये इसलिए भी जरूरी कदम है
अधिकारियों के मुताबिक, अगर बड़े उपभोक्ताओं को बिना रोक-टोक ईंधन खरीदने दिया जाता, तो कई इलाकों में ईंधन की कमी और लंबी कतारों जैसी समस्याएं पैदा हो सकती थीं।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती होगी
नए आदेश के तहत ऑयल कंपनियों और पेट्रोल पंप ऑपरेटरों को नियम लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जमाखोरी, कालाबाजारी, ईंधन की हेराफेरी और गलत गतिविधियों पर नजर रखें। सरकार का उद्देश्य देश में पेट्रोल और डीजल की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी क्षेत्र में सप्लाई प्रभावित न हो।
क्या 90 दिन बाद भी पाबंदी जारी रह सकती है
यह आदेश 90 दिनों के लिए लागू किया गया है। अगर परिस्थितियां सामान्य नहीं होती हैं, तो सरकार इसे आगे भी बढ़ा सकती है। सरकार विशेष परिस्थितियों में इस आदेश से छूट भी दे सकती है। हालांकि जो लोग या संस्थान इन नियमों का उल्लंघन करेंगे। उनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

