UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की वापसी हो सकती है: 53% यूजर्स बोले- इस्तेमाल करना छोड़ देंगे; जानें MDR क्या है, आप पर इसका क्या असर
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बिजनेस डेस्क। सरकार पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 मे कुछ बदलाव करने की तैयारी कर रही है। अगर अमेंडमेंट्स अप्रूव हो जाता है, तो UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की वापसी हो सकती है।इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा या नहीं, आम जनता के लिए इसका क्या मतलब है, आइए समझते हैं...
क्या कहता है लोकल सर्कल्स का सर्वे
लोकल सर्कल्स की ओर से जारी किए गए एक सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। देश के 322 जिलों से आए 45,000 से ज्यादा जवाबों के आधार पर तैयार इस सर्वे के मुताबिक, 53% यूजर्स का कहना है कि अगर 3,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट्स पर MDR लगाया गया, तो वे UPI का इस्तेमाल छोड़ देंगे।
लोकल सर्कल्स के डेटा के मुताबिक-
- 53% यूजर्स का कहना है कि अगर 3,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट्स पर MDR लगाया गया, तो वे UPI का इस्तेमाल करना छोड़ देंगे।
- स्विच करने वाले इन लोगों में से 27% क्रेडिट कार्ड, 14% डेबिट कार्ड और 12% बैंक ट्रांसफर या कैश पर शिफ्ट होंगे ।
- 18% लोग UPI का इस्तेमाल सिर्फ तभी जारी रखेंगे जब इसकी फीस मर्चेंट खुद भरेगा।
- 12% यूजर्स ऐसे भी हैं, जो खुद चार्ज देने की सिचुएशन में भी UPI का इस्तेमाल जारी रखने को तैयार हैं।
- वहीं 14% लोगों का मानना है कि उनका फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि चार्ज कितना तय किया जाता है।

आखिर क्या होता है मर्चेंट डिस्काउंट रेट
आसान भाषा में बोला जाए तो MDR वो चार्ज है जो किसी भी डिजिटल पेमेंट्स को प्रोसेस करने के लिए बिजनेस या दुकानदार, बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) को देते हैं। जब आप क्रेडिट या डेबिट कार्ड से 1,000 रुपए का पेमेंट करते हैं, तो बैंक उसमे से कुछ अमाउंट डिडक्ट कर लेता है, और रिमेनिंग अमाउंट मर्चेंट के पास जाता है। साल 2020 में सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR को 0% कर दिया था। मर्चेंट को UPI से पेमेंट लेने पर पूरा पैसा मिलता है और कोई कटौैती नहीं होती।
लॉ में क्या बदलाव हो रहा है
सरकार का प्रस्ताव है कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट के सेक्शन 10A मे अमेंडमेंट्स किया जाए। सेक्शन 10A बैंक और पेमेंट एप्स को चार्ज लेने से रोकती है। अमेंडमेंट्स लागू होने के बाद केंद्र सरकार के पास ये अधिकार होगा कि किस पेमेंट मोड पर चार्ज में छूट जारी रहेगी और किस पर MDR लागू किया जा सकेगा। इस बिल में कस्टमर्स से सीधे कोई चार्ज लेने का प्रपोजल नहीं है। इसका असर सिर्फ मर्चेंट्स पर पड़ सकता है।
एक्सपर्ट्स की इस पर क्या राय
इस पूरे मामले पर पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन सोनिया अशर का मानना है कि डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम को लंबे समय तक सेफ और इम्प्रूव्ड बनाए रखने के लिए ये अमेंडमेंट्स जरूरी हो सकता है। उनके मुताबिक बिना किसी कमर्शियल फ्रेमवर्क के एक वर्ल्ड क्लास पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मैनेज करना मुश्किल है। टेक्नोलॉजी, सिक्योरिटी और इनोवेशन में लगातार इनवेस्टमेंट के लिए एक बैलेंस्ड फ्रेमवर्क चाहिए। प्रपोज्ड चेंजेज बैंक, पेमेंट प्रोसेसर्स और मर्चेंट्स के बीच एक सही बैलेंस्ड बनाएंगे, जिससे भारत की डिजिटल ग्रोथ को नई मोमेंटम मिलेगी।

