ब्लूमबर्ग की पहली इंडिया फाइनेंस रिच लिस्ट आई: 15 लोगों ने फाइनेंस के बिजनेस से 65 बिलियन डॉलर की दौलत बनाई, देखें टॉप 10 अरबपतियों के नाम और नेट-वर्थ
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ब्लूमबर्ग की इंडिया फाइनेंस रिच लिस्ट में उदय कोटक, नितिन और निखिल कामथ और अजय पिरामल जैसे नाम शामिल हैं। (AI रिक्रिएट्स इमेज)
बिजनेस डेस्क। भारत का फाइनेंस सेक्टर अब सिर्फ बैंक, ब्रोकरेज और फिनटेक कंपनियां ही नहीं बना रहा है, बल्कि बिलिनेयर्स (अरबपति) भी बना रहा है। ब्लूमबर्ग ने पहली ‘इंडिया फाइनेंस रिच लिस्ट’ पेश की है, जिसमें ऐसे 15 लोगो को शामिल किया है, जिन्होंने फाइनेंस सर्विस से 65 अरब डॉलर की संपत्ति बनाई है। इस लिस्ट में बैंकिंग और लेंडिंग के पुराने दिग्गजों के साथ-साथ रिटेल इन्वेस्टमेंट, डिजिटल फाइनेंस और फिनटेक के जरिए नई दौलत बनाने वाले लोग भी शामिल हैं।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, 15 में से 7 लोगों की दौलत माहामारी के बाद रिटेल क्रेडिट और इक्विटी इन्वेस्टमेंट में आई तेजी की वजह से बढ़ी है, जबकि बाकी 8 लोग भारत के लेंडिंग और कैपिटल मार्केट के पुराने दिग्गजों में से हैं। नेट-वर्थ के आंकड़े 14 अगस्त तक के हैं और ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स की कैलकुलेशन पर बेस्ड हैं।
यहां हम ब्लूमबर्ग की इंडिया फाइनेंस रिच लिस्ट में शामिल टॉप 10 नाम के बारे में बता रहे हैं। इसके साथ ही जानकारी दे रहे हैं कि उन्होंने यह दौलत कैसे बनाई।
1- उदय कोटक

उदय कोटक का नाम 16.4 बिलियन डॉलर की नेट-वर्थ के साथ लिस्ट में सबसे ऊपर है। कोटक ने साल 1985 में अपने दोस्तों और परिवार से 80,000 डॉलर का लोन लेकर बिल-डिस्काउंटिंग और लेंडिंग कंपनी शुरु की और अपने फाइनेंशियल करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद साल 2003 में RBI से बैंकिंग लाइसेंस मिलने के बाद यह बिजनेस कोटक महिंद्रा बैंक बन गया इसके बाद ग्रुप ने इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और म्यूचुअल फंड के जरिए कैपिटल मार्केट में मजबूत पकड़ बना ली।
2- जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट एंड फैमिली

जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट एंड फैमिली की नेट-वर्थ 9.9 बिलियन डॉलर है। मुथूट फैमिली के बिजनेस की नींव साल 1887 में रखी गई थी। मुथूट निनन मथाई ने केरल में एक प्रोविजन स्टोर शुरू किया था। इसके बाद फैमिली ने एस्टेट वर्कर्स और किसानों को लोन देना शुरू किया और साल 1993 में गोल्ड-लोन के बिजनेस में कदम रखा। फिर यह बिजनेस फांउडर के तीन बेटों के बीच बंट गया, जिसमें से मथाई जॉर्ज मुथूट ने मुथूट फाइनेंस की शुरुआत की।
मौजूदा समय में मुथूट फाइनेंस भारत की सबसे बड़ी गोल्ड-लोन कंपनी है। साल 2020 के बाद से ये गोल्ड-लोन बिजनेस 4 गुना बढ़ गया। इसके अलावा मुथूट फैमिली ने अपने बिजनेस को मॉर्गेज, IT, एनर्जी, रियल एस्टेट, एजुकेशन, हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ा रखा है।
3- नितिन और निखिल कामथ

नितिन और निखिल कामथ की नेट-वर्थ 9.9 बिलियन डॉलर है। कामथ भाइयों ने जीरोधा (Zerodha) प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी दौलत बनाई है, जिसने भारत केरिटेल ब्रोकिंग मार्केट को बदल दिया है। इन भाइयों ने 1990 के दशक में ट्रेडिंग करना शुरू किया। इसके बाद साल 2010 में जीरोधा शुरू करने से पहले सब-ब्रोकर के तौर पर काम किया।
उनके लो कॉस्ट वाले ब्रोकरेज मॉडल और टेक्नोलॉजी-बेस्ड प्लेटफॉर्म ने लाखों रिटेल इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट किया। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, साल 2013 में 30,000 से बढ़कर 1.75 करोड़ (17.5 मिलियन) से ज्यादा हो गया है।
4- अजय पिरामल

अजय पिरामल की नेट-वर्थ 4.4 बिलियन डॉलर है। अजय पिरामल की फैमिली पहले से ही टेक्सटाइल बिजनेस कर रही थी, लेकिन बाद उन्होंने ग्लास मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स बिजनेस में कदम रखा। साल 2010 में पिरामल ने अपना दवा बनाने का बिजनेस एबॉट लैबोरेटरीज (Abbott Laboratories) को 3.72 बिलियन डॉलर में बेच दिया। इस पैसे से उन्होंने फाइनेंशियल सर्विसेज और रियल एस्टेट बिजनेस में कदम रखा।
पिरामल फाइनेंस ने शुरुआत में प्रॉपर्टी डेवलपर्स को कमर्शियल लोन दिया। इसके बाद दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन (DHFL) को ले लिया। इससे उन्हें एक बड़ी रिटेल लेंडिंग फ्रैंचाइज बनाने में मदद मिली। मौजूदा समय में पिरामल फाइनेंस की लोन बुक $11 बिलियन से ज्यादा है।
5- मोतीलाल ओसवाल और रामदेव अग्रवाल

मोतीलाल ओसवाल और रामदेव अग्रवाल की कुल नेट-वर्थ 3.9 बिलियन डॉलर है। मोतीलाल ओसवाल और रामदेव अग्रवाल ने शुरू में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सब-ब्रोकर के तौर पर काम किया। इसके बाद 1990 के दशक में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) बना और ब्रोकरेज मार्केट खुला, जिससे दोनों को बहुत फायदा मिला।
उनके बिजनेस ने अगले तीन दशकों में भारत के इक्विटी-मार्केट के बढ़ने का फायदा उठाया, क्योंकि उस समय रिटेल भागीदरी बढ़ी थी और हजारों कंपनियां मार्केट में लिस्ट हुई थीं। इसके बाद मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने एसेट मैनेजमेंट, अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट, लेंडिंग और प्राइवेट वेल्थ जैसे क्षेत्रों में खुद को बढ़ाया।

6- संजय डांगी

संजय डांगी फैमिली की कुल नेट-वर्थ 3.9 बिलियन डॉलर है। संजय डांगी ने छोटी और मीडियम साइज की कंपनियों में इन्वेस्ट करके भारत के कैपिटल मार्केट में अपना करियर बनाया। डांगी फैमिली ने साल 2019 में लिस्टेड नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी ‘ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर’ खरीद ली। यह कंपनी पब्लिक एंड प्राइवेट मार्केट और लेंडिंग के क्षेत्र में काम करती है ऑथम कंपनी अब $1.4 बिलियन के पब्लिक और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट एसेट्स को मैनेज करती है और इसका लोन पोर्टफोलियो लगभग $430 मिलियन का है।
7- सचिन बंसल

सचिन बंसल की कुल नेट-वर्थ 3 बिलियन डॉलर है। सचिन बंसल ने शुरूआत में फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर के तौर पर अपनी दौलत बनाई, जिसे उन्होंने बिन्नी बंसल के साथ शुरू किया था। उन्होंने ये ऑनलाइन बुकस्टोर सिर्फ $4,800 के इन्वेस्टमेंट से शुरू किया था। अब यह भारत का सबसे बड़ा ऑनलाइन रिटेलर बन गया है। बता दें कि साल 2018 में वॉलमार्ट ने 16 बिलियन डॉलर में फ्लिपकार्ट में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी खरीद ली थी।
इसके बाद बंसल ने फाइनेंशियल सर्विस बिजनेस में कदम रखा। उन्होंने नावी (Navi) डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। अब यह कंपनी पेमेंट, लेंडिंग, जनरल इंश्योरेंस और एसेट मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम कर रही है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, 2025-26 में Navi के पास 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा के लोन एसेट और करीब 1 अरब डॉलर के म्यूचुअल-फंड एसेट थे।
8- संजय अग्रवाल

संजय अग्रवाल की कुल नेटवर्थ 1.9 बिलियन डॉलर है। संजय अग्रवाल ने राजस्थान के रुरल और सेमी-अर्बन मार्केट में स्मॉल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, बिजनेसमैन और उधार लेने वालों को लोन देकर शुरुआत की।
इस बिजनेस को व्हीकल फाइनेंसिंग के क्षेत्र में फैलाया। इसके बाद ये भारत की सबसे बड़ी नॉन-बैंक व्हीकल फाइनेंसिंग कंपनियों में से एक बन गई। साल 2015 में इसे RBI से लाइसेंस मिला, जिसके बाद इसने स्मॉल फाइनेंस बैंक के तौर पर काम किया। कुछ समय बाद यह AU स्मॉल फाइनेंस बैंक बन गया। करीब एक दशक के बाद RBI ने बैंक को यूनिवर्सल बैंक में बदलने के लिए मंजूरी दे दी। ब्लूमबर्ग के बुताबिक, AU भारत का सबसे बड़ा स्मॉल फाइनेंस बैंक बन गया है, जिसकी मार्केट वैल्यू 8.5 अरब डॉलर है और इसके 1.2 करोड़ से ज्यादा कस्टमर हैं।
9- राजेश शर्मा

राजेश शर्मा की कुल नेट-वर्थ 1.8 बिलियन डॉलर है। राजेश शर्मा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं और अपने करियर की शुरुआत HBL स्टॉक ब्रोकिंग में इन्वेस्टमेंट बैंकर के तौर पर की। साल 1994 में उन्होंने खुद की डेब्ट इन्वेस्टमेंट बैंकिंग शुरू की। इसके बाध उन्होंने स्टॉक ब्रोकिंग, लेंडिंग और इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी के क्षेत्र में अपना बिज़नेस बढ़ाया।
राजेश शर्मा ने बाद में कंपनी का नाम बदलकर ‘कैपरी ग्लोबल कैपिटल’ कर दिया। राजेश शर्मा ने धीरे-धीरे कैपिटल मार्केट से हटकर रिटेल लेंडिंग पर फोकस करना शुरू किया। कैपरी ग्लोबल का लेंडिंग बिजनेस 4.2 अरब डॉलर हो गया है। मौजूदा समय में 10 लाख से ज्यादा कस्टमर हैं।
10- आनंद राठी एंड फैमिली

आनंद राठी एंड फैमिली की नेट-वर्थ 1.7 बिलियन डॉलर है। CA आनंद राठी ने साल 1994 में प्रदीप गुप्ता के साथ मिलकर ‘आनंद राठी ग्रुप’ की शुरुआत की। इस बिजनेस को इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और इंस्टीट्यूशनल रिसर्च फर्म के तौर पर शुरू किया गया था। इसके बाद लेंडिंग और वेल्थ मैनेजमेंट के क्षेत्र में फैल गया।
आनंद राठी वेल्थ अब भारत की सबसे बड़ी वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियों में से एक है, जो करीब 14,000 क्लाइंट्स के लिए 11 अरब डॉलर से ज्यादा की एसेट्स मैनेज करती है। इसकी ब्रोकिंग यूनिट के पास करीब 90,000 कस्टमर हैं।
ब्लूमबर्ग की लिस्ट में शामिल 15 लोगों और फैमिलीज ने फाइनेंशियल सर्विसेज के जरिए कुल मिलाकर 65 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति बनाई है। इससे पता चलता है कि भारत के बढ़ते क्रेडिट, इन्वेस्टमेंट और डिजिटल-फाइनेंस इकोसिस्टम ने फाइनेंशियल बिलीनेयर्स का एक नया तैयार कर दिया है।
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