UPI पर जीरो MDR की मांग: FMCG डिस्ट्रीब्यूटर्स बोले- छोटे रिटेलर्स पर असर पड़ेगा, इस्तेमाल पूरा देश करता है बोझ केवल व्यापारियों पर न डालें
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AICPDF ने कहा, 0.4% MDR का असर FMCG रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर पड़ेगा। (AI इमेज)
बिजनेस डेस्क। FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) डिस्ट्रीब्यूटर्स संस्था ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) ने सरकार से UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर फिर से विचार करने की अपील की है। फेडरेशन का कहना है कि इससे छोटे रिटेलर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और कम मार्जिन वाले दूसरे बिजनेस पर बहुत ज्यादा बोझ पड़ेगा।
फेडरेशन ने सरकार से क्या अपील की
फेडरेशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फाइनेंस और कॉमर्स मिनिस्ट्रीज को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया कि...
- UPI को व्यापारियों के लिए पूरी तरह मुफ्त यानी जीरो MDR पेमेंट सिस्टम के तौर पर ही काम करते रहना चाहिए।
- AICPDF के नेशनल प्रेसिडेंट ने कहा कि UPI का इस्तेमाल सिर्फ व्यापारी ही नहीं बल्कि पूरा देश करता है।
- इस डिजिटल सिस्टम को मेंटेन करने का खर्च सिर्फ व्यापारियों पर नहीं डाना जाना चाहिए।
- अगर लागत वसूलना जरूरी भी है, तो सरकार को कोई ऐसा तरीका निकालना चाहिए जिससे सारा बोझ अकेले व्यापारियों पर न पड़े।
- देश में करीब 328 लाख करोड़ रुपए के UPI ट्रांजैक्शन होते हैं। इस पूरे डिजिटल सिस्टम को चलाने और संभालने में लगभग 20,700 करोड़ रुपए का खर्च आता है।
- इसका मतलब है कि कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का लगभग 0.06% हिस्सा इस सिस्टम के मेंटेनेंस पर खर्च होता है।

MDR लागू होने का असर किन पर ज्यादा
AICPDF ने कहा कि 0.4% का MDR लगाने से FMCG रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर बड़ा असर पड़ सकता है। ये लोग पहले से ही कम मार्जिन पर काम करते हैं। उन्हें किराया, मैनपावर, लॉजिस्टिक्स, इन्वेंट्री, वर्किंग कैपिटल, एक्सपायरी, नुकसान और पेमेंट कलेक्शन के रिस्क जैसे खर्च उठाने पड़ते हैं।
फेडरेशन ने B2B FMCG पेमेंट के लिए MDR से छूट की भी मांग की, जिसमें रिटेलर से डिस्ट्रीब्यूटर और डिस्ट्रीब्यूटर से कंपनी के बीच होने वाले पेमेंट शामिल हैं। उनका कहना है कि कई स्टेज पर MDR लगाने से एक ही सप्लाई चेन में बार बार ट्रांजैक्शन कॉस्ट लग सकती है।
डिजिटल पेमेंट सिस्टम किफायती बने रहना चाहिए
फेडरेशन ने कहा, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम उन छोटे व्यापारियों के लिए किफायती बना रहना चाहिए, जिन्होंने इसे सफल बनाया है। UPI से व्यापार और पेमेंट सिस्टम आसान होना चाहिए, न कि छोटे कारोबारियों पर किसी नए टैक्स या खर्चे का बोझ डालना चाहिए।
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