EPFO का बड़ा फैसला: अब 15 नहीं, 25 हजार रुपए सैलरी पर ही कटेगा PF, 12 साल बाद बदलाव; 51 लाख+ कर्मचारियों को फायदा मिलेगा
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EPFO आंकड़ों के मुताबिक, संगठन के साथ करीब 7.98 करोड़ योगदान करने वाले सदस्य जुड़े हैं।
बिजनेस डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में EPFO के अनिवार्य कवरेज के लिए वेज सीलिंग (सैलरी लिमिट) को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार के इस कदम से देश के 51 लाख से अधिक नए कर्मचारी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे। यह बदलाव पूरे 12 साल बाद किया गया है, क्योंकि इससे पहले सितंबर 2014 में इस सीमा को 6,500 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए किया गया था।

कैबिनेट ने क्यों लिया EPFO वेज सीलिंग बढ़ाने का फैसला
पिछले कुछ सालों में देश में कर्मचारियों के वेतन, औसत आय और औपचारिक रोजगार (Formal Employment) के दायरे में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा सीमा के करीब या उससे अधिक पहुंच चुकी थी। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मौजूदा आर्थिक स्थिति के अनुसार वेज सीलिंग को बढ़ाने का यह कदम उठाया है।
कर्मचारियों पर क्या होगा असर
अनिवार्य पीएफ कवरेज: अब तक यदि कोई नया कर्मचारी 15,000 रुपए से अधिक की बेसिक सैलरी और डीए पर नौकरी शुरू करता था, तो उसका PF काटना कंपनियों के लिए अनिवार्य नहीं था। लेकिन अब नई सीमा 25,000 रुपए होने के बाद, इस सैलरी ब्रैकेट वाले सभी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से PF, पेंशन और बीमा योजना का लाभ मिलेगा।

इन-हैंड सैलरी पर असर: जो कर्मचारी इस नई सीमा के तहत पहली बार दायरे में आएंगे, उनके वेतन से 12% की अनिवार्य कटौती शुरू होगी। इससे उनकी मंथली इन-हैंड (हाथ में आने वाली) सैलरी में थोड़ा अंतर आ सकता है, लेकिन उनका लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा।
पेंशन की रकम बढ़ेगी: वेतन सीमा बढ़ने से कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) के तहत मिलने वाले लाभों का दायरा भी बढ़ जाएगा। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मंथली पेंशन में भी बड़ा फायदा देखने को मिलेगा।
सरकार पर कितना आएगा वित्तीय बोझ
इस फैसले के लागू होने के बाद सरकार के राजकोष पर भी अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव पड़ेगा। अनुमान के मुताबिक, इस बदलाव से सरकार पर हर साल लगभग 11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा। वर्तमान में EPFO के लिए सरकार की सालाना बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ है।
अगले पांच सालों में इस पर कुल मिलाकर लगभग 56,696 करोड़ खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि नौकरी बदलने की स्थिति में भी उनकी सामाजिक सुरक्षा और पीएफ फंड आसानी से ट्रांसफर हो सकेगा।
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