71.86 रुपए लीटर एथेनॉल, क्रूड ऑयल 70 डॉलर के पार: समझिए क्यों महंगा बन रहा E20 पेट्रोल, इससे किसानों कैसे हो रहा फायदा
Published:
2 min read

सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)
बिजनेस डेस्क। E20 पेट्रोल तैयार करने की लागत शुद्ध पेट्रोल (Pure Petrol) से ज्यादा है। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की मौजूदा कीमत है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, अभी मक्का से बनने वाले एथेनॉल (Ethanol) करीब 71.86 रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। इसमें GST, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज और डिपो हैंडलिंग जैसी कॉस्ट शामिल नहीं है। ऐसे में जब ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हो, तब E20 पेट्रोल बनाना शुद्ध पेट्रोल से महंगा पड़ता है।
E20 पेट्रोल से आम जनता को क्या फायदा मिल रहा है?
सरकार का कहना है कि असली सवाल सिर्फ E20 की लागत नहीं, बल्कि यह है कि इससे देश को कितना फायदा मिल रहा है। आज हर एक लीटर पेट्रोल में करीब 20% हिस्सा एथेनॉल का है। इसका मतलब है कि उतनी मात्रा में क्रूड ऑयल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमत बढ़ने का असर ग्राहकों पर कम पड़ता है। ईंधन की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव से राहत मिलती है।
फॉरेन करेंसी की भारी बचत और किसानों की बढ़ी आय
मंत्रालय के मुताबिक, एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम से देश को अब तक कई बड़े फायदे मिले हैं। इस योजना की बदौलत 1.97 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की फॉरेन करेंसी की बचत हुई है। इसके अलावा करीब 316 लाख मीट्रिक टन क्रूड ऑयल के इम्पोर्ट की जरूरत कम हुई, जबकि करीब 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में भी कमी आई है। साथ ही 1.66 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम सीधे किसानों तक पहुंचाई गई, जिससे उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिली है।
दो दशक की कड़ी तैयारी के बाद लागू हुआ E20
देश में E20 पेट्रोल को एक साथ लागू नहीं किया गया। इसके लिए दो दशक से ज्यादा समय तक चरणबद्ध तरीके से तैयारी की गई। इस दौरान ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, टेस्टिंग एजेंसियों और दूसरे संबंधित पक्षों के साथ लगातार चर्चा और परीक्षण किए गए। सभी जरूरी तैयारियों के बाद ही इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।
यह भी पढ़ें-

