E20 पेट्रोल कंट्रोवर्सी: Mercedes ने BS6 कारों की सेफ्टी पर जताया भरोसा, BMW बोली- E25 फ्यूल के लिए पहले से तैयार हैं गाड़ियां
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Mercedes-Benz ने कहा कि उसके सभी BS6 पेट्रोल व्हीकल्स E20 फ्यूल के साथ अनुकूल हैं। (फोटो सोर्स- कंपनी वेबसाइट)
बिजनेस डेस्क। देश में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही कंट्रोवर्सी के बीच लग्जरी कार कंपनी 'Mercedes-Benz' ने अपना ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी किया है। कंपनी ने कहा कि उसके सभी BS6 पेट्रोल व्हीकल्स E20 फ्यूल के साथ अनुकूल हैं। उन्हें संबंधित सरकारी एजेंसियों से जरूरी सर्टिफिकेशन मिल चुका है।
Mercedes-Benz ने अपने बयान में कहा, 'हमारे लिए कस्टमर्स की सेफ्टी, गाड़ी की रिलायबिलिटी और बेहतर परफॉर्मेंस अहम है। हमारे सभी BS6 पेट्रोल मॉडल E20 पेट्रोल के साथ इस्तेमाल किए जा सकते हैं।' अगर किसी ग्राहकों को टेक्निकल जानकारी चाहिए तो हमारी टीम मदद के लिए हमेशा तैयार है।
BMW ने कहा- हमारी कारें E25 पेट्रोल के लिए तैयार
वहीं, BMW ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट हरदीप सिंह बराड़ ने भी E20 पर कंपनी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि BMW की पेट्रोल कारें पिछले कई सालों से 25% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर चलने के लिए तैयार हैं। इसलिए फ्यूचर में आने वाले नियमों का कोई खास असर कंपनी पर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि BMW की पेट्रोल और डीजल गाड़ियां मौजूदा भारतीय मानकों को पूरा करती हैं। कंपनी EV के साथ पेट्रोल-डीजल इंजन और हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम होगी। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने के साथ पर्यावरण को फायदा होगा।
आखिर E20 पेट्रोल को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है?
भारत में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद कई वाहन मालिकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। सरकार ने तय समय से पहले E20 को नॉर्मल पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया। जिसके बाद कई जगहों पर विरोध देखने को मिला। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई।
कई व्हीकल ड्राइवर का दावा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है। कुछ स्वतंत्र सर्वें में यह बात सामने आई कि करीब 66% लोगों ने 10% से ज्यादा माइलेज घटने की शिकायत की। वहीं, पुराने वाहनों के मालिकों को डर है कि ज्यादा एथेनॉल होने की वजह से इंजन और फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है।
इसके अलावा लोगों का कहना है कि पेट्रोल पंपों से कम एथेनॉल वाले विकल्प हटा दिए गए हैं। इससे पुराने वाहन मालिकों के पास दूसरा विकल्प नहीं बचा है। कुछ लोगों को यह भी चिंता है कि अगर E20 की वजह से गाड़ी में खराबी आती है, तो इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने से इनकार कर सकती है। वहीं, एथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल के लिए भी नॉर्मल पेट्रोल जितनी कीमत चुकानी पड़ रही है।
सरकार पर उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने इस नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए, जिससे देश को फायदा हो, लेकिन लोगों की गाड़ियों को नुकसान न पहुंचे। उनका आरोप है कि गन्ना किसानों को करीब 3.65 रुपए प्रति किलो का दाम मिलता है, जबकि एथेनॉल पेट्रोल 102 रुपए प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है। इस कीमत का बड़ा फायदा डिस्टिलरी कंपनियों को मिल रहा है।
E20 पेट्रोल के सपोर्ट में सरकार की दलील
सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर जारी FAQ दस्तावेज में इस नीति का बचाव किया है। सरकार का दावा है कि एथेनॉल पेट्रोल की वजह से करीब 1.97 लाख करोड़ की फॉरेन करेंसी बचाई है। वहीं, करीब 1.66 लाख करोड़ रुपए का फायदा किसानों और रूरल इकोनॉमी तक पहुंचा है।
सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से पूरे लाइफसाइकिल में 40% तक कार्बन उत्सर्जन कम होता है। E20 का ऑक्टेन लेवल ज्यादा होने से गाड़ी की परफॉर्मेंस और एक्सेलरेशन में सुधार देखने को मिलता है। साथ ही सरकार का कहना है कि पेट्रोल की कीमत में अंतर किसानों को तय समर्थन मूल्य देने की व्यवस्था के कारण है।
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