Code on Wages: रिजाइन, लेऑफ और मंथली सैलरी का फाइनल सेटलमेंट कब तक होना चाहिए? जानें नया लेबर कोड
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बिजनेस डेस्क। अगर आप जॉब करते हैं या किसी कंपनी के HR हैं, तो वेतन संहिता (Code on Wages) के नियम के बारे में पता होना जरूरी है। यह देश के नए लेबर कोड्स में से एक है। जिसमें बताया गया है कि कर्मचारियों को वेतन कब तक मिल जाना चाहिए। साथ ही नौकरी से रिजाइन देने या लेऑफ की स्थिति में फाइनल पेमेंट कितने टाइम में करना होगा, यह भी तय किया गया है। अगर सैलरी देने में देरी होती है या बिना वजह पैसे काटे जाते हैं, तो कर्मचारी शिकायत भी कर सकता है।
हर तरह के कर्मचारियों के लिए नियम लागू
पहले सैलरी से जुड़े कई नियम सिर्फ एक तय वेतन लिमिट तक कमाने वाले कर्मचारियों पर लागू होते थे। अब Code on Wages लागू होने के बाद समय पर सैलरी देने और बिना अनुमति डिडक्शन न करने वाले नियम सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे। यानी अब कर्मचारी की तनख्वाह कितनी भी हो। उसे इस कानून का संरक्षण मिलेगा।
मंथली, वीकली और डेली वर्क करने वालों को सैलरी कब मिलेगी?
अगर किसी कर्मचारी को हर महीने सैलरी मिलती है, तो कंपनी को अगले महीने की 7 तारीख से पहले उसका वेतन देना होगा।
जो कर्मचारी साप्ताहिक आधार पर काम करते हैं, उन्हें उसी सप्ताह के आखिरी कार्य दिवस तक वेतन देना जरूरी है। रोजाना मजदूरी करने वाले कर्मचारियों को काम खत्म होने के बाद उसी दिन उनकी मजदूरी मिलनी चाहिए।

सैलरी देने में देरी होने पर कर्मचारी क्या कर सकता है?
अगर कंपनी समय पर सैलरी नहीं देती या बिना अनुमति डिडक्शन करती है, तो कर्मचारी इसके खिलाफ शिकायत करा सकता है। इसके लिए Code on Wages के तहत अपॉइंट अथॉरिटी के पास दावा किया जा सकता है।
कंप्लेंट कराने के लिए कर्मचारी के पास तीन साल तक का समय रहेगा। कानून के पालन पर नजर रखने के लिए इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर के अपॉइंटमेंट का भी प्रावधान किया गया है। अगर प्राधिकरण कंपनी को बकाया वेतन या मुआवजा देने का आदेश देता है और कंपनी फिर भी भुगतान नहीं करती, तो यह रकम लैंड रेवेन्यू के बकाया की तरह वसूली जा सकती है।
पुराने कानून से नया नियम कितना अलग है?
Code on Wages ने सैलरी से जुड़े कई पुराने कानूनों को एक साथ जोड़ दिया है। इनमें मजदूरी भुगतान अधिनियम (Payment of Wages Act, 1936) भी शामिल है। पहले समय पर सैलरी देने और कटौती से जुड़े नियम केवल तय वेतन सीमा तक कमाने वाले कर्मचारियों पर लागू होते थे, लेकिन अब यह सुरक्षा सभी कर्मचारियों को मिलेगी।
इसके अलावा Code on Wages के तहत कंपनियों को कर्मचारियों को सैलरी स्लिप देना भी जरूरी होगा। यह पेपर या इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में दी जा सकती है। इसे सैलरी डेट से पहले या उसी दिन जारी करना होगा। कानून यह भी तय करता है कि कंपनी वेतन से कितनी और किन परिस्थितियों में कटौती कर सकती है, ताकि कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रहें।
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