अमेरिका ने कनाडा पर लगाया 50% टैरिफ: 20 अरब डॉलर के प्राेडक्ट्स पर असर; कनाडा बोला- जितना टैक्स लगाओगे, उतना हम भी लगाएंगे
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इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका और कनाडा की पुरानी दोस्ती अब खुली ट्रेड फाइट में बदलती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने शनिवार से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर (करीब 1.88 लाख करोड़ रुपए) के प्रोडक्ट्स पर 50% टैरिफ लगा दिया। इसका जवाब कनाडा ने भी तुरंत दिया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाबी टैरिफ लगाएगा। दोनों देशों ने आखिरी वक्त तक डील बचाने की कोशिश की, लेकिन बातचीत टूट गई। अब हालात ऐसे हैं कि दशकों पुराने अमेरिका-कनाडा रिश्तों के साथ पूरे नॉर्थ अमेरिकन ट्रेड सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
20 अरब डॉलर के कैनेडियन प्रोडक्ट्स पर 50% टैक्स
नए अमेरिकी टैरिफ का असर कनाडा से अमेरिका जाने वाले करीब 5% सालाना एक्सपोर्ट पर पड़ेगा। इसमें हॉकी स्टिक से लेकर मेडिकल इस्तेमाल में आने वाले टंग डिप्रेसर तक कई प्रोडक्ट शामिल हैं। हालांकि कनाडा के पूरे एक्सपोर्ट के मुकाबले यह हिस्सा छोटा दिखाई देता है, लेकिन दोनों देशों के बीच कारोबार इतना बड़ा है कि इसका असर कंपनियों और आम लोगों तक पहुंच सकता है। पिछले साल अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे के साथ करीब 880 अरब डॉलर (करीब 82.7 लाख करोड़ रुपए) का प्रोडक्ट्स और सर्विसेज खरीदा-बेचा था।
कनाडा बोला- जितना टैरिफ, उतना ही जवाब
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रम्प के फैसले के तुरंत बाद पलटवार का ऐलान किया। कार्नी ने कहा, “कनाडा अपने वर्कर्स और बिजनेस की सुरक्षा के लिए इन टैरिफ का डॉलर के बदले डॉलर जवाब देगा। यानी अमेरिका कनाडा के प्रोडक्ट्स पर जितनी कीमत का टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उसी हिसाब से अमेरिकी प्रोडक्ट्स को निशाना बनाएगा। कार्नी ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में उनकी सरकार कनाडाई वर्कर्स और कंपनियों के लिए अतिरिक्त मदद का ऐलान करेगी।

आखिरी वक्त पर क्यों टूट गई डील
दोनों देशों के बीच पिछले कई दिनों से बातचीत चल रही थी। कनाडा चाहता था कि अमेरिका स्टील, एल्युमिनियम, ऑटो और लंबर पर लगाए गए टैरिफ में उसे राहत दे। लेकिन ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन इसके लिए तैयार नहीं हुआ।
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने कहा- आज रात कनाडा ने उन शर्तों पर ट्रेड डील को फाइनल करने से इनकार कर दिया, जिन पर इस हफ्ते की शुरुआत में सहमति बनी थी। ग्रीर के मुताबिक, अमेरिका ने कनाडा को अपने बाजार में किसी भी बड़े एक्सपोर्टर के मुकाबले बेहतर ट्रीटमेंट देने का ऑफर दिया था, लेकिन कनाडा ने आखिरी समय में नई मांगें रख दीं और पहले किए गए कुछ वादों से पीछे हट गया।

कनाडा ने कहा- आखिरी वक्त पर US ने बदली शर्तें
कनाडा ने बातचीत टूटने की बिल्कुल उलट कहानी बताई है। प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा- अमेरिका की तरफ से आखिरी समय पर प्र शर्तों में किए गए बदलाव गलत और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाले थे। इनसे किसी भी डील की भरोसेमंद होने की क्षमता पर सवाल खड़ा हो गया।
इसके बाद कार्नी ने बातचीत रोक दी और कनाडा की नेगोशिएशन टीम को वापस ओटावा बुला लिया। उन्होंने कहा- हमारा मकसद हमेशा सबसे अच्छी संभव डील हासिल करना था। किसी भी कीमत पर या किसी डेडलाइन के दबाव में डील करना कभी हमारा टारगेट नहीं था। फिलहाल दोनों देशों के बीच अगली बातचीत की कोई तारीख तय नहीं है।
ट्रम्प ने पहले 3 दिन की मोहलत दी, फिर भी नहीं बनी बात
50% टैरिफ पहले बुधवार रात 12:01 बजे से लागू होना था। लेकिन ट्रम्प ने बातचीत के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया। दो दिन पहले तक दोनों देशों के अफसरों के बयानों से लग रहा था कि कोई बीच का रास्ता निकल सकता है। ऐसा नहीं हुआ और शनिवार से नया टैरिफ लागू हो गया।
यह विवाद इसलिए भी बड़ा है क्योंकि अमेरिका और कनाडा सिर्फ पड़ोसी नहीं, बल्कि दशकों पुराने सहयोगी हैं। दोनों के बीच करीब 5,525 मील लंबा बॉर्डर है। हर दिन करीब 3.30 लाख लोग और लगभग 2 अरब डॉलर (करीब 18,800 करोड़ रुपए) का प्रोडक्ट्स की आवाजाही होती है। करीब 8 लाख कनाडाई अमेरिका में रहते हैं।

कभी साथ लड़े, अब रिश्तों में इतनी कड़वाहट क्यों
9/11 के बाद अफगानिस्तान में कनाडाई सैनिक अमेरिकी फौज के साथ लड़े थे। दोनों देशों के बीच लंबर और कनाडा के डेयरी मार्केट जैसे मुद्दों पर दशकों से झगड़े भी होते रहे, लेकिन रिश्ते कभी ऐसे नहीं रहे जैसे मौजूदा समय में हैं।
ट्रम्प के दूसरे टेन्योर में हालात बदले हैं। ट्रम्प अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग वापस लाने के लिए कनाडाई प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगा रहे हैं। इसके साथ ही वह कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कर चुके हैं। कार्नी ने अब रिश्तों में आए इसी बदलाव को खुलकर कबूल किया है। उन्होंने कहा- अमेरिका बदल चुका है और दोनों देश अब अपने पुराने रिश्ते में वापस नहीं लौटेंगे।
US एम्बेसडर को निकालने की मांग, 2.48 लाख सिग्नेचर
ट्रम्प के बयानों से कनाडा में नाराजगी किस स्तर तक पहुंच चुकी है, इसका अंदाजा एक पिटीशन से लगाया जा सकता है। अमेरिका के राजदूत और ट्रम्प के सहयोगी पीट होक्स्ट्रा को कनाडा से निकालने की मांग वाली पिटीशन पर 21 जुलाई से अब तक करीब 2.48 लाख लोग साइन कर चुके हैं।
पिटीशन में आरोप लगाया गया है कि होक्स्ट्रा ने कनाडा को अमेरिका में मिलाने से जुड़े ट्रम्प के बयानों को प्रोडक्ट्स्य बनाने का काम किया। यानी मौजूदा विवाद सिर्फ टैरिफ या कारोबार तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर दोनों देशों के लोगों और राजनीतिक रिश्तों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
कनाडा के लिए US से झगड़ा कितना महंगा पड़ेगा
यहां कनाडा की सबसे बड़ी मुश्किल समझना जरूरी है। पिछले साल उसके कुल गुड्स एक्सपोर्ट का करीब 72% अमेरिका गया था। यानी कनाडा अपनी बनाई चीजों को बेचने के लिए अमेरिकी बाजार पर बहुत ज्यादा निर्भर है। ऐसे में अमेरिका के साथ लंबी ट्रेड फाइट कनाडाई कंपनियों और नौकरियों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।
लेकिन इसका नुकसान सिर्फ कनाडा को होगा, ऐसा भी नहीं है। अमेरिकी कंपनियां जब कनाडा से प्रोडक्ट्स मंगाएंगी तो 50% टैरिफ का भुगतान अमेरिकी इम्पोर्टर्स को करना होगा। कंपनियां इसका कुछ हिस्सा कीमत बढ़ाकर ग्राहकों से वसूल सकती हैं। इससे अमेरिका में महंगाई बढ़ने का खतरा है, जबकि नवंबर के मिडटर्म इलेक्शन से पहले महंगाई पहले ही वोटर्स के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
एक्सपर्ट बोले- अब पीछे हटना और मुश्किल
- किंग एंड स्पाल्डिंग के पार्टनर और पूर्व अमेरिकी ट्रेड अफसर रायन मेजरस के मुताबिक, संभव है कि कनाडा अलग-अलग सेक्टर के लिए जितनी राहत मांग रहा था, अमेरिका उतनी देने के लिए तैयार नहीं हुआ। दूसरी संभावना यह है कि अमेरिका कनाडा से जितनी छूट चाहता था, ओटावा उतनी देने के लिए राजी नहीं हुआ।
- मेजरस ने कहा कि आने वाले दिनों में दोनों देशों पर इस विवाद से बाहर निकलने का रास्ता तलाशने का भारी प्रेशर होगा। लेकिन कनाडा के जवाबी टैरिफ लगाने के बाद ऐसा करना और मुश्किल हो सकता है।
- कनाडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की प्रेसिडेंट और CEO कैंडेस लैंग ने 50% टैरिफ को नॉर्थ अमेरिकन कॉम्पिटिटिवनेस के लिए बड़ा झटका बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे अमेरिकी लोगों के लिए प्रोडक्ट्स महंगा होगा, जबकि कनाडा में कस्टमर, इनवेस्टमेंट और छोटे कारोबार पर असर होगा।
100 साल पुराने कानून से ट्रम्प ने लगाया 50% टैरिफ
इस कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा वह कानून है, जिसका इस्तेमाल ट्रम्प ने किया है। पिछले साल ट्रम्प ने लगभग सभी देशों पर डबल डिजिट टैरिफ लगाए थे। लेकिन फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि राष्ट्रपति ने अपनी पावर की सीमा पार की थी और उन टैरिफ को रद्द कर दिया।
इसके बाद ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने टैरिफ लगाने के लिए दूसरा कानूनी रास्ता तलाशा। कनाडा के मामले में ट्रम्प ने 1930 के टैरिफ एक्ट के सेक्शन 338 का इस्तेमाल किया है।
यह कानून ग्रेट डिप्रेशन के समय बनाया गया था। इसका सेक्शन 338 अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देश के प्रोडक्ट्स पर 50% तक टैरिफ लगाने की ताकत देता है, जिस पर अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव करने का आरोप हो। खास बात यह है कि करीब एक सदी पुराने इस सेक्शन का इससे पहले टैरिफ लगाने के लिए कभी इस्तेमाल नहीं हुआ था।
USMCA पर भी अब खतरा
- इस झगड़े का अगला असर अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट यानी USMCA पर पड़ सकता है। यह वही ट्रेड डील है जिसे ट्रम्प ने अपने पहले टेन्योर में कराया था और उस समय इसे अपनी बड़ी कामयाबी बताया था।
- अब तीनों देश इस समझौते को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिका ने मेक्सिको के साथ बातचीत शुरू कर दी है, लेकिन कनाडा के साथ बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है। इसी बीच 50% टैरिफ और कनाडा के जवाबी एक्शन ने पूरे समझौते के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है।
- न्यूयॉर्क लॉ स्कूल के सेंटर फॉर इंटरनेशनल लॉ के सीनियर फेलो बैरी एपलटन ने कहा- कनाडा ने अमेरिका को पहले ही बता दिया था कि अगर ये टैरिफ लगाए गए तो वह बातचीत रोक देगा और जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि अब दोनों देश पब्लिकली अपना-अपना रुख तय कर चुके हैं और यहीं वजह है कि हालात बिगड़ने से रोकना मुश्किल है।

