DRDO की मिसाइल बनाएंगी प्राइवेट कंपनियां: Astra Mark-2 से शुरुआत होगी; Tata-Adani टेंडर रेस में; एक्सपोर्ट बढ़ाने पर फोकस
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ईरान-अमेरिका युद्ध ने दिखाया कि एडवांस मिसाइलें किस तरह भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसी वजह से भारत अपनी मिसाइल और रॉकेट क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है। (फोटो सोर्स- एएनआई)
बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार अब मिसाइलों के मैन्युफैक्चरिंग में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने जा रही है। इसकी शुरुआत DRDO की Astra Mark-2 एयर-टू-एयर मिसाइल से होगी। इसकी मारक क्षमता 180 से 200 किलोमीटर तक है। डिफेंस मिनिस्ट्री जल्द इसके लिए टेंडर जारी करेगा। सरकार का मानना है कि सिर्फ सरकारी कंपनी भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) के भरोसे बढ़ती जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं होगा। इसलिए अब निजी कंपनियों को भी इस प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा। टाटा-अडाणी समेत कई बड़ी कंपनियां सरकार से मिसाइल बनाने का टेंडर हासिल करने की रेस में शामिल हैं।
क्या है इस फैसले के पीछे की दो बड़ी वजह
सरकार के इस फैसले के पीछे दो बड़ी वजह हैं। पहली, भारतीय सेना को बड़ी संख्या में मिसाइलों की जरूरत है। दूसरी, कई दोस्त देश भारत से मिसाइल खरीदना चाहते हैं। इंडोनेशिया ने भी Astra Mark-2 खरीदने में रुचि दिखाई है। आने वाले समय में अगर दूसरे देशों से भी ऑर्डर बढ़ते हैं तो प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ानी होगी। इसी वजह से डिफेंस मिनिस्टर प्राइवेट सेक्टर के लिए डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर खोलने का फैसला लिया है।
टेंडर जल्द आएगा, कई बड़ी कंपनियां शामिल होंगी
रक्षा मंत्रालय जल्द ही एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगा। इसके जरिए प्राइवेट कंपनियों ने Astra Mark-2 मिसाइल बनाने के लिए प्रस्ताव मांगे जाएंगे। इस रेस में ICOMM, अडाणी ग्रुप, टाटा ग्रुप, महिंद्रा ग्रुप और भारत फोर्ज जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां शामिल हो सकती हैं।
Astra Mark-2 क्यों है भारत के लिए अहम
Astra Mark-2 एक बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 180 से 200 किमी तक है। DRDO ने इसका सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल चीन की PL-15E लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल का जवाब मानी जा रही है, जिसे पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर से पहले चीन ने पाकिस्तान को उपलब्ध कराया था।

प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल भी प्राइवेट कंपनियां बना सकती हैं
रक्षा मंत्रालय की योजना सिर्फ Astra Mark-2 तक सीमित नहीं है। अगला बड़ा प्रोजेक्ट 500 किलोमीटर रेंज वाली दो-स्टेज प्रलय टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल हो सकती है। यह मिसाइल आवाज की गति से लगभग छह गुना तेज उड़ती है। प्रलय, भारत की इंटीग्रेटेड राकेट फोर्सेज का अहम हिस्सा है। इसी नेटवर्क में नईलॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM), अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइल और 300 किलोमीटर तक हमला करने वाला एक्सटेंडेड रेंज पिनाका रॉकेट सिस्टम भी शामिल हैं।

भारत-इजराइल मिलकर बना रहे हैं नई एयर डिफेंस सिस्टम
भारत और इजरायल मिलकर लंबी दूरी की सरफेस टू एयर मिसाइल (SAM) प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही भारत एक मल्टी-लेयर एंटी-मिसाइल और एंटी-ड्रोन सुरक्षा नेटवर्क भी तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए तुर्की के कम लागत वाले ड्रोन, लंबी दूरी के रॉकेट और चीन की PLA के बैलिस्टिक मिसाइल खतरों का प्रभावी जवाब देना है।
नवंबर में मिलेगा पांचवां S-400
भारत को नवंबर में रूस से पांचवां S-400 एयर डिफेंस सिस्टम मिलने की उम्मीद है। इसके बाद केंद्र सरकार रूस से पांच और S-400 सिस्टम खरीदने की मंजूरी देने की तैयारी कर रही है। इन सिस्टम की सुरक्षा के लिए रूस का पैंटसिर एयर डिफेंस सिस्टम भी लगाया जाएगा, जो ड्रोन और रॉकेट जैसे खतरों से S-400 की रक्षा करेगा। इससे भारत की हवाई सुरक्षा पहले से और मजबूत होगी।

