परीक्षा में अब अपने स्क्राइब नहीं ला सकेंगे दिव्यांग: एग्जाम कराने वाली संस्थाएं उपलब्ध करवाएंगी राइटर, 2 साल के अंदर लागू करना होगा नियम
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एजुकेशन डेस्क। कॉम्पिटिटिव एग्जाम में दिव्यांग कैंडिडेट्स से जुड़े स्क्राइब सर्विस के नियमों में बदलाव किया गया है। मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट ने इसे लेकर नई गाइडलाइन तैयार की है। नए नियमों के मुताबिक एग्जाम कंडक्ट कराने वाली संस्था अब ऐसे अभ्यर्थियों को स्क्राइब उपलब्ध करवाएगी।
नई गाइडलाइन्स के मुताबिक कोई भी उम्मीदवार स्क्राइब पर डिपेंड नहीं रहेंगा। सभी कैंडिडेट्स के लिए स्क्रीन रीडर्स (JAWS, NVDA), ब्रेल, स्पीच-टू-टेक्सट सॉफ्टवेयर, बड़े अक्षरों वाला प्रिंट, रिकॉर्डिंग डिवाइस और लैपटॉप जैसे टूल्स की सिफारिश की गई है।
2 साल में लागू होगा नियम
स्क्राइब पैनल बनाने के लिए एग्जाम कराने वाली संस्थाओं को 2 साल का समय दिया गया है। एग्जाम कडक्ट करवाने से पहले स्थानों को अपने वेरिफाइड स्क्राइब पैनल तैयार करना होगा। अभी तक दिव्यांग स्टूडेंट्स को अपना पेपर लिखवाने के लिए अपना स्क्राइब लाने की छूट थी। यह सर्विस ऐसे दिव्यांगों को दी जाती है, जो खुद से अपना पेपर नहीं लिख सकते। UPSC, SSC, DoPT और नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी ने इन नियमों में बदलाव करने की सिफारिश की थी।
ये नियम किन एग्जाम पर लागू होगा
ये नया नियम सारे कॉम्पिटेटिव एग्जाम के साथ प्रोफेशनल कोर्सेस और टेक्निकल प्रोग्रम्मेस में एडमिशन लेने वाले पेपर पर भी लागू होंगे। राइट्स ऑफ पर्सन्स विथ डिसेबिलिटी एक्ट 2016 और पब्लिक एग्जामिनेशन (Prevention of Unfair Means) एक्ट 2024 के मुताबिक, नए नियम तैयार किए गए हैं। नए नियमों को फ्रेम करने में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी ध्यान रखा गया है।
एलिजिबिलिटी कैटेरिया फॉर स्क्राइब
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स्क्राइब की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन उस पेपर के हिसाब से दो से तीन लेवल नीचे होनी चाहिए।
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कोई भी स्क्राइब उस सेम एग्जाम का कैडिडेंट नहीं होना चाहिए।
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जिन उम्मीदवारों को लिखने में कठिनाई होती है, उन्हें चाहे वे स्क्राइब का इस्तेमाल करें या न करें, परीक्षा में प्रति घंटे कम से कम 20 मिनट का एक्स्ट्रा टाइम दिया जाएगा।
कैंडिडेट को दिए जाएं सारे सपोर्ट
नए नियमों के मुताबिक, परीक्षा केंद्र पूरी तरह से एक्सेसिबल होने चाहिए। इनमें रैंप, लिफ्ट, चौड़े कॉरिडोर, ग्राउंड-फ्लोर पर बैठने की सुविधा और ऑडियो अनाउंसमेंट जैसी व्यवस्था शामिल होनी चाहिए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इनविजिलेटर और स्टाफ को डिसेबिलिटी एडिकेट की नियमित ट्रेनिंग दी जाए। परीक्षा कर्मियों के लिए हर साल सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम आयोजित हों। दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए अलग से शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System) हो।

