महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का प्रोटेस्ट खत्म, मिल मालिकों ने मांगें मानीं: तीन दिनों तक NH-48 पर सोए, 120km का जाम लगा, रोज 100 बसें रद्द हुईं
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महाराष्ट्र में गन्ना किसानों के आंदोलन के चलते पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे (NH-48) लगातार तीन दिन तक बंद रहा।
नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का आंदोलन शुक्रवार (6 नवंबर) सुबह खत्म हो गया। शुगर मिल मालिकों ने किसानों की मांगें मान ली हैं। इसके तहत अब किसानों को गन्ने के लिए 4200 रुपए प्रति टन एडवांस भुगतान किया जाएगा। किसान पहले 4500 रुपए प्रति टन की मांग पर अड़े थे लेकिन आखिरी में वे भी मान गए।
यह आंदोलन पूर्व सांसद राजू शेट्टी की लीडरशिप में किया गया। पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे (NH-48) पर किसान रात-दिन डटे रहे। वे हाईवे पर ही सोते हुए नजर आए। पूरे 61 घंटे तक यह चक्काजाम चला। इससे करीब 120 किलोमीटर के दायरे में गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। कई लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ घंटों से हाईवे पर फंसे रहे।
आंदोलन के चलते सातारा जिले के नागठाणे से कोल्हापुर जिले के सांगली फाटा तक हाईवे पर आवाजाही पर असर पड़ा। पुणे से कोल्हापुर, सांगली, सातारा और बेलगावी जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी रही। हाईवे से ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर भेजा जा रहा है, लेकिन वहां भी भारी वाहनों के पहुंचने से जाम लगा रहा।
कारें फंसी, बसें रद्द, खाना-पानी खत्म
कई लोग दिवाली मनाने अपने घर और रिश्तेदारों के यहां जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही फंस गए। कई वीडियो भी सामने आए। कोई कहता दिखा कि हम कल रात से हाईवे पर फंसे हैं तो कोई कह रहा था कि हमारे पास खाना-पानी भी सीमित है और बच्चे परेशान हो रहे हैं।
किसानों के आंदोलन का असर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की बस सर्विस पर भी पड़ा। निगम को हर दिन करीब 100 बस रद्द करनी पड़ी। इससे दिवाली पर घर जाने वाले यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई।
1500 से ज्यादा ट्रक फंसे, जरूरी सामान की सप्लाई पर असर
महाराष्ट्र स्टेट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले दो दिनों में 1500 से ज्यादा ट्रक हाईवे पर फंसे। इन ट्रकों में अनाज, सब्जियां और रोजमर्रा की जरूरत का दूसरा सामान भरा हुआ था। अगर जल्द रास्ता नहीं खुला तो जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता था।
इसी बीच आंदोलन कर रहे संगठन स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने चेतावनी भी दी थी कि अगर सरकार और चीनी मिलों ने किसानों की मांगों नहीं मानी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मुंबई और पुणे में दूध और सब्जियों की सप्लाई रोकने की चेतावनी दी गई थी।
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