राहुल-प्रियंका का आकाशवाणी भवन में धरना जारी: निर्वाचन सदन जाने पर अड़े, कहा- मोदी और शाह नहीं बचेंगे; दिनभर क्या-कुछ हुआ
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विपक्ष का सेव डेमोक्रेसी मार्च संसद के मकर द्वार से शुरू हुआ। इसे चुनाव आयोग तक पहुंचना था लेकिन रास्ते में ही रोक दिया गया। अब राहुल गांधी समेत कुछ सांसद आकाशवाणी भवन में धरना दे रहे हैं। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई सांसद चुनाव आयोग के हेडक्वार्टर यानी निर्वाचन सदन जाने पर अड़ गए हैं। फिलहाल यह टीम आकाशवाणी भवन के परिसर में डटी हुई है या यह कहें कि धरने पर बैठी हुई है। राहुल गांधी साफ कह चुके हैं कि अगर उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से नहीं मिलने दिया गया तो वे यहां से नहीं हटेंगे।
एक के बाद एक कई पुलिस अफसर उनसे आकाशवाणी भवन परिसर खाली करने और प्रोटेस्ट खत्म करने की अपील करते देखे गए लेकिन राहुल गांधी का जवाब यही रहा कि उन्हें प्रोटेस्ट का अधिकार है और अगर दिल्ली पुलिस यहां असहज महसूस कर रही है तो हमें कोई और जगह प्रदर्शन करने की परमिशन दे या यहीं से हमें हिरासत में ले ले।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्हें यहां पर दिन-रात प्रोटेस्ट करने में कोई दिक्कत नहीं है। यहां चाय-पानी और खाने की व्यवस्था है। उनके इस बयान से इशारा मिला कि वे अब यहां से जाने के मूड में नहीं हैं।
कहां से शुरू हुई कहानी?
INDIA ब्लॉक के सभी दलों ने मंगलवार (6 अक्टूबर) से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के इरादे से अपना सामूहिक अभियान शुरू किया। ठीक 10.45 पर विपक्षी दलों के इस अलायंस ने 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' निकाला।
INDIA ब्लॉक के सांसद हाथ में पोस्टर और तख्तियां लेकर निर्वाचन सदन की ओर बढ़े। CEC ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी के बीच प्रोटेस्ट मार्च को पुलिस ने नीति आयोग भवन के पास रोक दिया। ऐसे में सांसद जमीन पर ही बैठकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।
कुछ देर तक यह चलता रहा। इसी दौरान विपक्षी सांसदों को पुलिस ने रोड से उठाना शुरू किया। अखिलेश यादव, कल्याण बनर्जी, संजय राउत समेत तमाम विपक्षी सांसदों को बसों में भर-भरकर हिरासत में लिया गया।
प्रोटेस्ट मार्च की शुरुआत में राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत 19 विपक्षी दलों के सांसद मौजूद थे। करीब 300 सांसद होने के दावे थे। हालांकि ज्यादातर सांसदों को हिरासत में लेने के बाद महज कांग्रेस के कुछ ही सांसद बचे जिन्होंने राहुल और प्रियंका गांधी समेत आकाशवाणी भवन में एंट्री ली। यहां से निर्वाचन सदन महज 300 मीटर दूर था। जब आकाशवाणी भवन से भी मंजिल तक पहुंचने की कोशिश फेल हो गई तो आकाशवाणी भवन परिसर में ही धरना शुरू कर दिया गया।
राहुल गांधी ने क्या-क्या कहा?
राहुल गांधी ने इस प्रोटेस्ट मार्च के बीच कहा कि उनके साथ करीब 300 सांसद निर्वाचन सदन के लिए निकले थे। कोशिश थी कि CEC ज्ञानेश कुमार से वोट चोरी और चुनाव में धांधली पर आमने-सामने बात की जाए। लेकिन ज्ञानेश कुमार डर गए तो सरकार ने हमें यहीं रोक दिया। हम जनता द्वारा चुने गए लोग हैं, अगर हम ही लोगों से चुनाव आयोग नहीं मिलेगा तो क्या ही उम्मीद कर सकते हैं।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि मोदी, शाह, मोहन भागवत ने ज्ञानेश कुमार की मदद से भारत के लोकतंत्र पर हमला किया। जब वक्त आएगा तो इन सभी पर कार्रवाई होगी। इनमें से एक भी बच नहीं पाएगा। प्रोटेस्ट की कुछ तस्वीरें...







क्या हैं मांगें?
विपक्षी दल अपनी चार मांगों के तत्काल पूरी होने के लिए यह मार्च निकाल रहा है। यह मांगें हैं...
- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए।
- SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए।
- SIR के दौरान जिन भी वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा शामिल किया जाना चाहिए।
- आने वाले सभी चुनावों में EVM की जगह बैलेट पेपर से वोटिंग होनी चाहिए।
कैसे शुरू हुआ पूरा मसला?
कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल बीते कई सालों से मोदी सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं। इनका कहना है कि कभी EVM में गड़बड़ी कर तो कभी चुनाव आयोग के जरिए विपक्षी दलों पर सख्ती के जरिए देशभर में BJP को जिताया जा रहा है। हाल ही में जब 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि SIR और चुनाव से जुड़े कई मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही मतभेद हैं तो विपक्षी दलों को अपने दावे के सपोर्ट में फैक्ट मिल गए।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ था कि दोनों चुनाव आयुक्त ने बीते 10 महीने में 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर लिखित में आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी के बाद विपक्षी लीडर लामबंद हुए और एक स्वर में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर डाली। कांग्रेस ने देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई के शिवाजी पार्क पर आम लोग भी इस प्रोटेस्ट में शामिल हो गए।
अगर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होता है तो INDIA ब्लॉक ने आगे के लिए भी पूरी रणनीति बना रखी है। इसमें राष्ट्रपति से मुलाकात के साथ ही CEC के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की भी योजना है।
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