हर्षवर्धन श्रृंगला का बयान ट्रेंडिंग में: कांग्रेस बोली- साबित हो गया अमेरिका के दबाव में हैं PM; आखिर क्या बोल गए मोदी सरकार के पूर्व विदेश सचिव
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हर्षवर्धन श्रृंगला जनवरी 2020 से अप्रैल 2022 तक भारत सरकार के विदेश सचिव रहे। जुलाई 2025 में उन्हें राज्यसभा सदस्य मनोनीत किया गया। वह BJP के कई इवेंट्स में देखे जाते रहे हैं। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। मोदी सरकार में विदेश सचिव रहे और वर्तमान में राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं। रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका और भारत के संबंधों पर दिए एक बयान के चलते वह सुर्खियों में हैं।
दरअसल, एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टिट्यूट के एक इवेंट में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हमें ईरान से तेल खरीद बंद करने के लिए कहा था। हमने वो किया। हमें वेनेजुएला से भी तेल खरीद बंद करने के लिए कहा गया और फिर रूस से ऑइल इम्पोर्ट पर बंदिशें लगाई गईं।
उन्होंने कहा कि भारत काफी हद रूसी ऑइल पर निर्भर है और अगर यह इम्पोर्ट बंद होता है तो इसके गंभीर नतीजे दिखेंगे। इससे देश में एनर्जी संकट आ सकता है और महंगाई दर बढ़ सकती है। हर्षवर्धन के इसी बयान को लेकर कांग्रेस अब PM मोदी पर निशाना साध रही है।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने सांसद श्रृंगला का वीडियो शेयर करते हुए लिखा- नरेंद्र मोदी हमेशा से अमेरिका के आगे झुकते रहे हैं। देश और देशवासियों का नुकसान करवाकर, अमेरिका को फायदा पहुंचाते रहे हैं। BJP सांसद श्रृंगला का यह बयान बताता है कि नरेंद्र मोदी पूरी तरह से कॉम्प्रोमाइज्ड हैं और अमेरिका के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।
कांग्रेस ने BJP और RSS लीडर राम माधव का भी बयान शेयर किया, जो उन्होंने वाशिंगटन के एक इवेंट में दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए क्या नहीं किया। भारत ने ईरान से तेल खरीद बंद की, रूस से तेल न खरीदने पर हामी भरी और अमेरिकी टैरिफ का भी विरोध नहीं किया। तो फिर आखिर भारत अमेरिका के साथ काम करने में कहां कमी कर रहा है? हालांकि बाद में राम माधव ने इस स्टेटमेंट पर माफी भी मांग थी।
श्रृंगला का पूरा बयान
नई दिल्ली में एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में हर्षवर्धन श्रृंगला भारत के अमेरिका और चीन जैसे देशों के साथ संबंधों को लेकर बात कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा- जब मैं विदेश सचिव था, तब एक अमेरिकी अधिकारी ने हमें कहा था कि भारत को अब रूस से तेल की खरीद धीरे-धीरे कम कर देनी चाहिए। तब मैंने उन्हें बताया कि जब मैं वाशिंगटन में था तब आपने हमें कहा था कि ईरान से तेल मत खरीदो। उस वक्त हमने हामी भरी और ईरान से ऑइल इम्पोर्ट बंद कर दिया। आज तक हम ईरान से कोई तेल नहीं खरीद रहे हैं। यह बिडेन सरकार के वक्त की बात है। फिर आपने हमें कहा कि वेनेजुएला से तेल खरीदना बंद करो। हमने कहा कि हमने वहां 6 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट किया है। और अब आप रूस से तेल खरीदने पर बंदिशें लगा रहे हो।
ट्रम्प के आगे PM मोदी के सरेंडर का दावा करती रही है कांग्रेस
कांग्रेस पिछले साल से ही PM मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आगे सरेंडर बताती रही है। यह सिलसिला ऑपरेशन सिंदूर के वक्त से शुरू हुआ। दरअसल, भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर से ठीक कुछ घंटे पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि आज रात भारत-पाकिस्तान के बीच जंग खत्म हो जाएगी। ऐसा ही हुआ। इसी के बाद से कांग्रेस ने मोदी सरकार पर अमेरिका के दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया।
ट्रम्प दर्जनों बार यह दावा कर चुके हैं कि उनके कहने पर भारत और पाकिस्तान ने युद्ध रोका। ट्रम्प के इन बयानों को लेकर भी कांग्रेस पीएम मोदी के लिए सरेंडर शब्द इस्तेमाल करती रही है। फिर जब अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर और ट्रेड एग्रीमेंट का दौर चला तो उसमें भी कांग्रेस ने दावा किया कि मोदी सरकार ट्रम्प की मांगों के आगे झुक रही है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी के लिए कॉम्प्रोमाइज्ड शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में अडानी पर से केस खत्म करने के लिए और एपस्टीन फाइल्स में खुलासों से बचने के लिए मोदी अब ट्रम्प की हर शर्त मान रहे हैं। रूस से तेल खरीद कम होने की जब इक्का-दुक्का रिपोर्ट्स सामने आईं तो भी कांग्रेस की ओर से पीएम मोदी को अमेरिका के आगे नतमस्तक बताया गया।
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