इमरान खान को सत्ता से हटाने के पीछे US: सीक्रेट नोट से खुलासा; अमेरिकी डिप्लोमेट ने पाकिस्तानी अफसर से कहा था- सरकार गिरा दो
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से हटाने में अमेरिका का हाथ है।
इंटरनेशनल डेस्क. पाकिस्तान में 2022 में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से हटाना एक सोची समझी साजिश थी। अमेरिका और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच हुए कम्युनिकेशन से जुड़े सीक्रेट डॉक्यूमेंट (साइफर) में इस बात का खुलासा हुआ है। अमेरिकी इनवेस्टिगेटिव न्यूज आउट लेट ड्रॉप साइट ने एक पाकिस्तान और अमेरिकी डिप्लोमेट के बीच बातचीत से जुड़ा डॉक्यूमेंट जारी किया है।
यह बातचीत मार्च 2022 की बताई जा रही है। यानी ठीक उस वक्त, जब पाकिस्तान में इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था और कुछ ही हफ्तों बाद उनकी सरकार गिर गई थी।
अगर इमरान हटे तो वाशिंगटन सब भूल जाएगा
लीक डॉक्यूमेंट के मुताबिक, उस समय अमेरिका में पाकिस्तान के डिप्लोमेट रहे असद मजीद खान और अमेरिकी डिप्लोमेट डोनाल्ड लू के बीच बातचीत हुई थी। इसी बातचीत में कथित तौर पर डोनाल्ड लू ने कहा था, अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस वोट सफल हो जाता है, तो वाशिंगटन में सब माफ कर दिया जाएगा। वरना आगे हालात काफी मुश्किल हो सकते हैं।
यही लाइन अब पाकिस्तान की राजनीति में फिर आग लगा रही है। क्योंकि इमरान खान लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि उनकी सरकार गिराने के पीछे विदेशी साजिश थी।

यूक्रेन जंग और रूस यात्रा बनी वजह?
दरअसल, पूरा विवाद इमरान खान की मॉस्को विजिट से जुड़ा हुआ था। फरवरी 2022 में इमरान खान रूस गए थे। उसी दौरान रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू कर दिया था। अमेरिका और पश्चिमी देशों को यह बात नागवार गुजरी थी कि पाकिस्तान उस समय खुलकर किसी पक्ष में नहीं आया।
दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारी पाकिस्तान के आक्रामक तटस्थ रुख से नाराज थे। अमेरिका को लग रहा था कि पाकिस्तान रूस के ज्यादा करीब जा रहा है।
हालांकि डॉक्यूमेंट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तानी डिप्लोमेट असद मजीद खान ने अमेरिका को समझाने की कोशिश की थी कि इमरान खान की रूस यात्रा पहले से तय थी और इसका यूक्रेन युद्ध से कोई लेना देना नहीं था।
इमरान खान को अपनी रूस यात्रा पर अफसोस था
लीक टेक्स्ट में यह भी दावा किया गया है कि असद मजीद खान ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा था कि इमरान खान को अपनी मॉस्को यात्रा पर अफसोस था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने रूस का सपोर्ट नहीं किया था और यूक्रेन पर रुख किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि संस्थागत फैसला था।
लेकिन इमरान सफाई देकर भी अमेरिका का भरोसा नहीं जीत पाए। इसके बाद डॉक्यूमेंट के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ बातचीत कम कर दिया।

भारत और पाकिस्तान को अलग नजर से देख रहा था अमेरिका?
इस बातचीत में एक दिलचस्प बात और सामने आई। पाकिस्तानी अधिकारी ने सवाल उठाया कि यूक्रेन मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान दोनों ने दूरी बनाई थी, फिर भी अमेरिका दोनों देशों को अलग नजर से क्यों देख रहा है? यह सवाल इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि उस समय भारत ने भी रूस के खिलाफ खुलकर मोर्चा नहीं लिया था, लेकिन अमेरिका का रवैया भारत के प्रति नरम रहा।
इमरान खान पहले से लगाते रहे हैं आरोप
इमरान खान ने 2022 में ही दावा किया था कि उनके पास एक साइफर है, जो साबित करता है कि अमेरिका उनकी सरकार हटाना चाहता था। हालांकि उस समय पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया था कि विदेशी साजिश का कोई सबूत नहीं मिला है।

