भारत की पहली बुलेट ट्रेन बस कुछ महीने दूर: स्पीड कितनी होगी, कितने पैसेंजर सफर करेंगे, चीन-जापान के मुकाबले कैसी है; A टू Z डिटेल
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बेंगलुरु की BEML फैक्ट्री में भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन B28 तैयार की जा रही है। इसे मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर चलाया जाएगा। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। भारत में बुलेट ट्रेन का इंतजार अब खत्म होने वाला है। अगले साल यह ट्रेन पटरी पर होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर को बेंगलुरु की BEML फैक्ट्री में इसके मैनुफैक्चरिंग की अपडेट ली।
यह ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद रुट के बीच चलेगी। इसके लिए सूरत से वापी के बीच 97 किलोमीटर का ट्रैक लगभग पूरी तरह बनकर तैयार है। शुरुआत में इस हाई स्पीड ट्रेन को इसी ट्रैक पर चलाने की तैयारी है। भारत की यह पहली बुलेट ट्रेन कैसी होगी, कितनी तेज भागेगी और इसमें क्या-क्या फैसिलिटी होगी? यहां जानें...
1. स्पीड कितनी होगी?
बुलेट ट्रेन की टेस्टिंग के दौरान मैक्सिमम स्पीड 280 kmph रखी गई। हालांकि, पैसेंजर्स के साथ यह ट्रेन 249 kmph की रफ्तार से चलेगी। यानी ऑपरेशनल स्पीड 250 के अंदर ही रहेगी।
वैसे पूरे मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 350 kmph और ऑपरेशनल स्पीड 320 kmph रखी गई है।
2. एक बार में कितने पैसेंजर सफर करेंगे?
एक बार में 557 पैसेंजर्स के बैठने की व्यवस्था होगी। बुलेट ट्रेन की कुल लंबाई 202 मीटर है। इसमें 8 कोच होंगे। इनमें से 4 मोटर कार और 4 ट्रेलर कार होंगे।
दरअसल, बुलेट ट्रेन में आम ट्रेन की तरह सिर्फ एक भारी इंजन नहीं होता। इसमें अल्टरनेट कोच में ऐसे पावर इक्विपमेंट लगे होते हैं जो इंजन को सपोर्ट करते हैं, इन्हें मोटर कार कहा जाता है। ट्रेलर कार की तरह ही मोटर कार में भी पैसेंजर्स बैठ सकते हैं।
भविष्य में जरूरत बढ़ने पर दो 8-कोच वाली ट्रेनों को आपस में जोड़कर 16 कोच की ट्रेन भी बनाई जा सकेगी।
3. ट्रेन में बैठने की कैसी व्यवस्था होगी?
स्टैंडर्ड क्लास: 7 कोच में 3x2 सीटिंग व्यवस्था होगी। यानी एक तरफ तीन और दूसरी तरफ दो सीटें होंगी।
एग्जीक्यूटिव क्लास: एक कोच में 2x2 सीटिंग व्यवस्था होगी। इसमें दोनों तरफ दो-दो सीटें होंगी।
ट्रेन में दिव्यांग और चलने-फिरने में परेशानी वाले यात्रियों के लिए हर कोच में दो सीटें होंगी।
ट्रेन में दो ड्राइवर केबिन होंगे। यानी इसके दोनों सिरों पर ड्राइवर के बैठने की व्यवस्था रहेगी। इनमें इंटेलिजेंट ऑनबोर्ड कंट्रोल सिस्टम होगा, जो ट्रेन के ऑपरेशन और कंट्रोल सेंटर के साथ तालमेल बनाने में मदद करेगा।

4. चीन और जापान की बुलेट ट्रेन के मुकाबले कितनी तेज होगी?
दुनिया में हाईस्पीड ट्रेन के मामले में चीन और जापान काफी आगे हैं। भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन की ऑपरेशन स्पीड जहां 249 kmph है, वहीं जापानी की शिंकानसेन E5 320 kmph और चीन की CR400 Fuxing 350 kmph की स्पीड से दौड़ती है। यानी भारत की B28 ट्रेन की शुरुआती ऑपरेशनल स्पीड जापान की E5 शिंकानसेन से करीब 71 और चीन की CR400 ट्रेन से करीब 101 किलोमीटर प्रति घंटा कम होगी।
वैसे, चीन और जापान स्पीड के मामले में और भी आगे निकलने वाले हैं। जापान 600 kmph स्पीड वाली बुलेट ट्रेन की टेस्टिंग कर चुका है और चीन में भी यह टेस्टिंग होने की तैयारी है। यह बुलेट ट्रेनें मैग्नेटिक फिल्ड पर काम करने वाली हैं, जो पटरी से थोड़ी ऊपर रहकर चलेंगी।
5. ट्रेन के अंदर यात्रियों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?
आरामदायक सीटें: यात्रियों को बैठने के लिए चौड़ी और आरामदायक सीटें मिलेंगी। पैरों को फैलाने के लिए पर्याप्त जगह होगी।
बड़ी खिड़कियां: हर सीट वाली लाइन के पास बड़ी खिड़कियां होंगी, ताकि यात्री बाहर का नजारा देख सकें।
LED लाइटिंग: कोच के अंदर मॉडर्न LED लाइटें लगाई जाएंगी।
सामान रखने की जगह: सीटों के ऊपर सामान रखने के लिए रैक होंगे। बड़े बैग और सूटकेस के लिए अलग से जगह मिलेगी।
चार्जिंग पॉइंट: लैपटॉप और मोबाइल चार्ज करने के लिए हर पैसेंजर को अलग पावर आउटलेट मिलेगा।
मॉडर्न टॉयलेट: ट्रेन में बायो-डाइजेस्टर टॉयलेट होंगे।
कोच के बीच आने-जाने की सुविधा: कोच के बीच एक खास सील्ड गैंगवे होगा। इससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच में आसानी से जा सकेंगे।
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6. जानकारी और मनोरंजन के लिए क्या?
ट्रेन में यात्रियों को सफर से जुड़ी जानकारी देने के लिए एडवांस्ड पैसेंजर इन्फॉर्मेशन सिस्टम लगाया जाएगा।
हर कोच में LCD स्क्रीन होगी। इन पर अंग्रेजी, हिंदी और रीजनल लैंग्वेज में जानकारी दिखाई जाएगी। इसके अलावा पब्लिक अनाउंसमेंट और ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट सिस्टम भी होगा।
यात्रियों के मनोरंजन के लिए हाईस्पीड Wi-Fi बेस्ड इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलेगा।
इमरजेंसी की स्थिति में यात्रियों को ट्रेन स्टाफ से बात करने के लिए टॉक-बैक यूनिट मिलेगी। ये यूनिट कोच के बीच आने-जाने वाली जगह पर लगाई जाएंगी।
7. दिव्यांग यात्रियों के लिए क्या खास इंतजाम होंगे?
- ट्रेन का फर्श प्लेटफॉर्म की ऊंचाई के बराबर होगा, जिससे ट्रेन में चढ़ने-उतरने में आसानी होगी।
- दरवाजों में अपने आप बाहर आने वाली सीढ़ियां होंगी, ताकि ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की दूरी कम हो सके।
- व्हीलचेयर के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर दरवाजे डिजाइन किए गए हैं।
- दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग सीट और टॉयलेट की व्यवस्था होगी।
- आंखों से देख पाने में परेशानी वाले यात्रियों के लिए ब्रेल लिपि में जानकारी देने वाले साइनबोर्ड लगाए जाएंगे।
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8. गर्मी, सर्दी और शोर से बचाने के लिए क्या इंतजाम हैं?
भारत में अलग-अलग इलाकों का मौसम काफी अलग होता है। कहीं तेज गर्मी पड़ती है तो कहीं सर्दी और बारिश का असर ज्यादा रहता है। इसी वजह से ट्रेन को भारतीय मौसम के हिसाब से तैयार किया जा रहा है।
हर कोच में दो HVAC यूनिट होंगी। ये सिस्टम ट्रेन के अंदर तापमान और हवा में नमी को कंट्रोल करेगा। इससे गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में यात्रियों को कंफर्टेबल माहौल मिलेगा।
तेज रफ्तार में ट्रेन के अंदर शोर और कंपन कम करने के लिए भी इंतजाम किए गए हैं..
कोच की बॉडी और फर्श में साउंड इंसुलेशन लगाया जाएगा।
शोर कम करने वाली खास कोटिंग का इस्तेमाल होगा।
ट्रेन के बाहरी हिस्से को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हवा का दबाव कम पड़े।
9. बिजली से चलेगी ट्रेन, ब्रेक लगाने पर भी बचेगी एनर्जी
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन 25 किलोवोल्ट AC ओवरहेड इलेक्ट्रिक सिस्टम से चलेगी। यानी ट्रेन को ऊपर लगे बिजली के तारों से एनर्जी मिलेगी।
इसमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम भी होगा। यह तकनीक ट्रेन की रफ्तार कम करते समय पैदा होने वाली ऊर्जा को दोबारा बिजली में बदलने में मदद करती है। इस बिजली को फिर इलेक्ट्रिक ग्रिड में भेजा जा सकेगा।
10. ट्रेन का अगला हिस्सा खास तरीके से डिजाइन किया गया है
तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेन के सामने हवा का दबाव काफी बढ़ जाता है। इससे ट्रेन की स्पीड और सफर के आराम पर असर पड़ सकता है।
इस समस्या को कम करने के लिए B28 का अगला हिस्सा यानी नोज और पूरी बॉडी खास एयरोडायनामिक डिजाइन में तैयार की गई है।
इंजीनियरों ने कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से यह तय किया है कि ट्रेन का आकार कैसा होना चाहिए, ताकि हवा का दबाव कम रहे।
इस डिजाइन से तीन बड़े फायदे होंगे:
1. तेज रफ्तार में हवा का दबाव कम होगा।
2. ट्रेन के सुरंग से गुजरने पर हवा के दबाव में अचानक बदलाव और तेज आवाज नहीं होगी।
3. ट्रेन के आसपास हवा के तेज बहाव और उससे होने वाले शोर को कम करने में मदद मिलेगी।

