बांध नहीं बना रहे, बस देख रहे बन पाएगा या नहीं: सियांग प्रोजेक्ट पर अरुणाचल CM का रिएक्शन; कहा- लोगों की मर्जी के बिना नहीं बनाएंगे
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अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट का विरोध अभी भी जारी है।
नेशनल डेस्क। अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर 11,200 मेगावाट के बांध बनाने को लेकर विरोध लगातार बढ़ रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को भरोसा दिलाया है कि अभी बांध बनाने का कोई फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल सरकार सिर्फ प्रोजेक्ट की शुरुआती रिपोर्ट यानी प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) तैयार करना चाहती है।
खांडू ने कहा कि PFR से यह पता चलेगा कि प्रोजेक्ट बनाना संभव है या नहीं और उस पर आगे वक्त और पैसा खर्च करना समझदारी होगी या नहीं। इसके बाद ही बांध बनाने को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा।
उन्होंने कहा- अगर रिपोर्ट में प्रोजेक्ट को संभव बताया जाता है, तब भी सरकार को कानून के मुताबिक स्थानीय लोगों से बात करनी होगी और उनकी राय लेनी होगी। यानी यह प्रोजेक्ट किसी भी तरह से यहां के लोगों पर थोपा नहीं जा सकता।
'अभी बांध बनाने की बात ही नहीं हो रही'
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे आदि बाने केबांग (ABK) की युवा इकाई और आदि स्टूडेंट्स यूनियन (AdiSU) के प्रतिनिधियों से बातचीत करना चाहते हैं। हाल ही में इन संगठनों ने प्रोजेक्ट को लेकर मीडिया के सामने अपनी चिंताएं रखी थीं।
उन्होंने कहा- मैं सियांग इलाके के सभी संगठनों और यूनिट्स से बात करना चाहता हूं, ताकि उन्हें प्रोजेक्ट के बारे में सही जानकारी दे सकूं।
गांव डूबने और पुश्तैनी जमीन छिनने का डर
सियांग प्रोजेक्ट का आदि समुदाय के कई संगठन और स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि बांध बनने से कई गांव पानी में डूब सकते हैं। इससे लोगों को अपने घर और पुश्तैनी जमीन छोड़नी पड़ सकती है। खेती-बाड़ी, रोजगार और आजीविका पर भी असर पड़ने का डर है।
इसके अलावा पर्यावरण को नुकसान और भूकंप के लिहाज से संवेदनशील इलाके में इतने बड़े बांध की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
खांडू ने कहा कि सियांग और अपर सियांग जिलों के लोगों के बीच प्रोजेक्ट को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। सरकार सीधे लोगों से बात करके उनकी शंकाएं दूर करना चाहती है।
सितंबर और अक्टूबर में हिंसक प्रदर्शन हुए
प्रोजेक्ट के विरोध में सितंबर के आखिरी दिनों और फिर 23 अक्टूबर को प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने पासीघाट में NHPC के एक ऑफिस और पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी। इसके अलावा कई गाड़ियों और नेताओं से जुड़ी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया।
पिछले एक हफ्ते से इलाके में तनाव बना हुआ है। 25 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने विधायकों और आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें की थीं। इनमें PFR, पर्यावरण से जुड़े सवालों और देश की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई।
इसके बाद 29 अक्टूबर को ईटानगर में एकजुटता रैली निकाली गई। इसमें हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और उनके खिलाफ दर्ज केस वापस लेने की मांग की गई।
क्या है सियांग अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट?
सियांग अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट (SUMP) अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की परियोजना है। केंद्र सरकार NHPC के जरिए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है।
इसे सिर्फ बिजली बनाने वाली परियोजना के तौर पर नहीं, बल्कि एक बड़े वाटर स्टोरेज प्रोजेक्ट के रूप में तैयार करने की योजना है। इसके तहत बिजली बनाने के साथ पानी के बेहतर मैनेजमेंट और रणनीतिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का विरोध इस बात को लेकर है कि विकास और बिजली उत्पादन के नाम पर उन्हें अपनी जमीन, घर और पहचान की कीमत न चुकानी पड़े। ऐसे में अब सबकी नजर सरकार और विरोध कर रहे संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है।
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