फैक्ट्री से सीधे पटरी पर उतरीं मारुति सुजुकी की गाड़ियां: इन-प्लांट रेलवे टर्मिनल से देश भर में भेजे 10 लाख वाहन; गुजरात से सबसे ज्यादा डिस्पैच
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मारुति सुजुकी का कहना है कि वह भारत की पहली और इकलौती पैसेंजर व्हीकल कंपनी है, जिसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में इन-प्लांट रेलवे साइडिंग मौजूद हैं। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)
बिजनेस डेस्क। मारुति सुजुकी इंडिया ने रेल के जरिए गाड़ियां भेजने के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने 2023 से अब तक अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से बने रेलवे टर्मिनल के जरिए 10 लाख वाहन देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजे हैं। कंपनी के मुताबिक, यह उपलब्धि उसके पर्यावरण के अनुकूल लॉजिस्टिक्स सिस्टम को स्ट्रांग करने की दिशा में अहम कदम है।
गुजरात और हरियाणा से 10 लाख गाड़ियों का डिस्पैच
मारुति सुजुकी ने मार्च 2023 में गुजरात के हंसलपुर प्लांट में अपने इन-प्लांट रेलवे टर्मिनल से काम शुरू किया था। इसके बाद जून 2025 में हरियाणा ने मानेसर प्लांट में रेलवे साइडिंग शुरू की गई। अब तक रेल के जरिए भेजी गई 10 लाख गाड़ियों में से करीब 7.9 लाख वाहन हंसलपुर प्लांट से भेजे गए हैं। वहीं, मानसेर प्लांट से करीब 2.1 लाख व्हीकल्स का डिस्पैच रेल के जरिए हुआ है।

तीन लाख से ज्यादा वाहन भेजे
मारुति ने बताया कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में उसके रेल-बेस्ड वाहन डिस्पैच का 70% हिस्सा इन दोनों इन-प्लांट रेलवे साइडिंग के जरिए हुआ है। 31 अगस्त तक इस FY में कंपनी के रेल से गाड़ियां भेजने का आंकड़ा तीन लाख यूनिट से ज्यादा हो चुका है।
मारुति सुजुकी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO हिसाशी ताकेउची ने कहा, 'इन-प्लांट रेलवे साइडिंग से दस लाख वाहनों का डिस्पैच कंपनी की ग्रीन लॉजिस्टिक्स ट्रैवल में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।' उन्होंने बताया कि ये रेलवे टर्मिल 'PM गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान' के तहत डेवलप किए गए हैं। इनके जरिए अलग-अलग परिवहन साधनों को जोड़कर काम को ज्यादा आसान बनाने के साथ एनवायरनमेंट को होने वाले नुकसान को कम किया जा रहा है।

क्या होता है इन-प्लांट रेलवे टर्मिनल
इन-प्लांट रेलवे टर्मिनल का मतलब ऐसे रेलवे ट्रैक और सिस्टम से है, जो सीधे किसी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के अंदर होता है। इसकी मदद से गाड़ियों को फैक्ट्री से ही मालगाड़ी में लोड किया जाता है। इसके वाहनों को ट्रकों से रेलवे स्टेशन तक ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे गाड़ियों की ढुलाई के लिए ट्रकों की जरूरत कम होती है। कंपनी के मुताबिक, इससे ईंधन की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है। साथ ही रोड पर ट्रैफिक का प्रेशर घटता है।
इन-प्लांट रेलवे साइडिंग रखने वाली पहली पैसेंजर व्हीकल कंपनी
मारुति सुजुकी का कहना है कि वह भारत की पहली पैसेंजर व्हीकल कंपनी है। जिसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में इन-प्लांट रेलवे साइडिंग मौजूद हैं। कंपनी अपने वाहनों की ढुलाई में रेल की हिस्सेदारी बढ़ा रही है। मारुति के रेल के जरिए गाड़ियां भेजने की हिस्सेदारी FY14-15 में 5% थी। जो FY25-26 में बढ़कर 26.5% हो गई। कंपनी का टारगेट डिस्पैच की हिस्सेदारी बढ़ाकर 35% करने का है।
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