भारत की बुलेट ट्रेन की पहली तस्वीर: एयरोडायनामिक लुक और भगवा थीम में दिखी; रेल भवन में डिस्पले
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ट्रेन का डिजाइन जापान की शिंकानसेन टेक्नोलॉजी पर आधारित है। जो खासतौर पर हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बनाया गया है।
नेशनल डेस्क. भारत की पहली बुलेट ट्रेन की तस्वीर सामने आई है। इंडियन रेलवे ने नई दिल्ली स्थित रेल भवन में मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की ट्रेन की फोटो डिस्प्ले की है। ट्रेन भगवा रंग की थीम पर नजर आ रही है। इसमें तीन कलर हैं। ट्रेन को एयरोडायनामिक शेप दिया गया है, जिससे हवा का दबाव कम हो, ट्रेन की स्पीड बनी रहे। बताया जा रहा है कि इसमें सिर्फ 8 कोच होंगे।
ट्रेन का डिजाइन जापान की शिंकानसेन टेक्नोलॉजी पर आधारित है। जो खासतौर पर हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बनाया गया है, ताकि ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की स्पीड से भी स्मूद और सुरक्षित दौड़ सके। बुलेट ट्रेन अगस्त 2027 में चलने की उम्मीद है। शुरुआत में ट्रेन जापान से आएंगी, इसके बाद भारत में ही बनी B-28 सीरीज ट्रेन ट्रेक पर चलेंगी।
अहमदाबाद और मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट
भारत के पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम अहमदाबाद और मुंबई के बीच चल रहा है। यह देश का सबसे बड़ा हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट है। योजना के मुताबिक, इसका कुछ हिस्सा 2027 तक शुरू होगा और पूरी लाइन 2029 तक चालू होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट में ट्रैक बिछाने का काम काफी तेज हो गया है। इसमें जापान की एडवांस 'जे-स्लैब बैलास्टलेस ट्रैक सिस्टम' का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस टेक्नोलॉजी का उपयोग पहली बार देश में हो रहा है, जिसे नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) लागू कर रही है।
जे-स्लैब टेक्नोलॉजी क्या है और क्यों खास है?
यह सिस्टम जापान की मशहूर शिंकानसेन टेक्नोलॉजी पर आधारित है। यह सिस्टम खास तौर पर हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बनाया गया है, ताकि ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की स्पीड से भी स्मूद और सुरक्षित चल सके। इस ट्रैक सिस्टम के चार कंपोनेंट्स होते हैं- आरसी ट्रैक बेड, सीमेंट एस्फाल्ट मोर्टार, प्री-कास्ट ट्रैक स्लैब और रेल के साथ लगे फास्टनर्स। ये सभी मिलकर ट्रैक को मजबूत और सटीक बनाते हैं।

गुजरात में बनाए गए एडवांस ट्रैक स्लैब प्लांट
इस प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए गुजरात में दो एडवांस ट्रैक स्लैब मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज (TSMF) बनाए गए हैं। एक सूरत के पास कीम में और दूसरा आनंद में स्थित है। यहां हाई क्वालिटी कंक्रीट स्लैब तैयार किए जा रहे हैं। ये स्लैब पहले फैक्ट्री में स्टोर किए जाते हैं। फिर ट्रेलर के जरिए ट्रैक कंस्ट्रक्शन बेसेस (TCBs) तक पहुंचाए जाते हैं। बता दें TCBs ऐसे सेंटर होते हैं, जहां ट्रैक बिछाने का काम मैनेज किया जाता है।

कहां काम चल रहा है?
इस समय 10 TCBs काम कर रहे हैं। इनमें चार सूरत, बिलिमोरा और वापी के बीच है। छह वडोदरा, आनंद और अहमदाबाद के बीच स्थित हैं। इन जगहों पर तेजी से ट्रैक बिछाने का काम जारी है। अब तक 188 रूट किमी के लिए ट्रैक स्लैब तैयार किए जा चुके हैं। इस प्रोजेक्ट में ट्रैक बिछाने का काम मशीनों की हेल्प से किया जा रहा है। ये मशीनें जापानी टेक्नोलॉजी के हिसाब से डिजाइन की गई हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश मशीनें भारत में बनाई गई हैं।
हाई-टेक मशीनें कैसे काम कर रही हैं?
ट्रैक बिछाने में कई मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है। जैसे फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन (FBWM), जो 25 मीटर लंबी रेल को जोड़कर 200 मीटर लंबे पैनल बनाती है। इन ट्रेनों की अच्छी तरह जांच की जाती है, ताकि वे 320 किमी प्रति घंटे की स्पीड के लिए सुरक्षित रहे।
इस काम के लिए जापान की कंपनी जापान रेलवे टेक्निकल सर्विस (JARTS) ने ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन दिया है। इसके अलावा ट्रैक स्लैब लैंग कार (SLC) का इस्तेमाल प्री-कास्ट स्लैब को उठाकर सही जगह रखने के लिए किया जाता है। यह एक बार में पांच स्लैब तक उठा सकता है।
वहीं, रेल फीडर कार (RFC) 200 मीटर लंबे रेल पैनल को ट्रैक पर रखने में मदद करता है। जब स्लैब सही जगह पर लग जाते हैं, तब सीमेंट भरा जाता है, जिससे ट्रैंक संतुलित और मजबूत हो जाता है।

