गाय काटने पर गुजरात में 3 लोगों को उम्रकैद: जज ने मनुस्मृति और वेदों का हवाला दिया, कहा- गौमाता में देवी-देवताओं का वास
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गुजरात की एक कोर्ट ने गौहत्या के मामले में बीते सोमवार 3 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
नेशनल डेस्क। गुजरात की एक कोर्ट ने गाय काटने के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 3 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने यह फैसला आरोपियों के पास से 277 किलो बीफ (गोमांस) बरामद होने के बाद सुनाया। जज ने अपने फैसले के पीछे हिंदू धर्मग्रंथों को आधार बताया। उन्होंने यह तक कहा कि गौमाता में देवी-देवताओं का वास होता है।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए सख्त संदेश है जो राज्य में गोहत्या करने की कोशिश करते हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला अगस्त 2024 का है। गांधीनगर जिले के जामला गांव में पुलिस ने एक घर पर छापा मारा। वहां से पुलिस को 277 किलो बीफ, गाय काटने में इस्तेमाल होने वाले हथियार और मांस ले जाने वाली गाड़ी मिली।
जांच में सामने आया कि आरोपी कमजोर या दूध न देने वाले पशुओं को खरीदकर लाते थे और उन्हें काटने का काम करते थे। पुलिस और सरकारी वकील ने कोर्ट के सामने सबूत के तौर पर 54 गवाह और 18 दस्तावेज पेश किए, जिसके आधार पर 6 में से 3 आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
कोर्ट ने सजा सुनाते हुए क्या कहा?
गांधीनगर के एडिशनल सेशंस जज बी.आर. राजपूत ने सोमवार (26 अक्टूबर) को आरोपी वसीम कुरैशी, मोहम्मद रफीक कुरैशी और अशफाक बहेलिम को उम्रकैद और 3-3 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
उन्होंने मनुस्मृति और वेदों का हवाला देते हुए कहा- गाय सिर्फ एक जानवर नहीं है, बल्कि यह खुशहाली और धर्म का प्रतीक है। वेदों के अनुसार, गाय को 'विश्व की माता' माना गया है और इसमें 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। गाय के चारों पैर चारों वेदों के प्रतीक हैं।
जजमेंट में संस्कृत में एक श्लोक भी लिखा गया और कहा गया कि तपस्या के प्रभाव से जब अमृत की बूंदें धरती पर गिरीं, तो दिव्य गाय 'कामधेनु' प्रकट हुईं। जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर दोषियों को सजा नहीं दी जाए और यह इसी तरह होता रहे तो आने वाले वक्त में गौमाता विलुप्त हो जाएंगी।
गुजरात में गौहत्या पर इतना सख्त कानून क्यों?
2011 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य में गायों को काटने, मांस ले जाने और बेचने पर पूरी तरह बैन लगाया गया था। सजा का प्रावधान भी किया गया लेकिन यह ज्यादा सख्त नहीं थी। 2017 में गुजरात सरकार ने कानून में बदलाव कर गौहत्या की सजा को बढ़ाकर उम्रकैद कर दिया। साथ ही बीफ रखने, बेचने या ले जाने पर 10 साल की जेल का नियम भी बनाया।
गुजरात देश का पहला ऐसा राज्य था जहां गौहत्या पर उम्रकैद की सजा का प्रावधान लाया गया। बाद में मध्य प्रदेश से लेकर उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी कानून सख्त हुआ लेकिन सजा 1 साल से 10 साल के बीच रखी गई। यानी गौहत्या पर उम्रकैद की सजा केवल गुजरात में ही है।
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