बिहार में स्टूडेंट प्रोटेस्ट हिंसक हुआ: छात्रों पर पत्थर फेंकने के आरोप, पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, लाठियां भी चलाई; तेजप्रताप यादव हिरासत में
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तस्वीर पटना की है।
नेशनल डेस्क। बिहार में स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान शनिवार को तनाव फैल गया। सारण के छपरा में पुलिसकर्मियों पर पत्थरे फेंके गए। वहीं पटना में पत्थरबाजी के बीच पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। इस दौरान स्टूडेंट्स ने समस्तीपुर-पटना हाईवे भी जाम कर दिया।
गौरतलब है कि NEET पेपर लीक और एग्जाम में गड़बड़ियों समेत स्टूडेंट्स के तमाम मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह ही बिहार में भी कई जगह प्रोटेस्ट शुरू हुआ। राज्य में बुधवार से ये विरोध प्रदर्शन तेज हुए। इसी क्रम में स्टूडेंट्स ने शनिवार (25 जुलाई) को बिहार बंद का आह्वान किया था।
पूरे बिहार में प्रोटेस्ट की संभावना को देखते हुए हर बड़े शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। खासकर पटना में गांधी मैदान समेत कुछ संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस तैनाती और निगरानी रखी गई थी। हालांकि इन सब के बावजूद कुछ जगह प्रोटेस्ट हिंसक हो गया।
कहां क्या हुआ?
छपरा में स्टूडेंट्स पर आरोप है कि प्रोटेस्ट के दौरान उन्होंने पुलिस पर पत्थर फेंके। प्रदर्शन के हिंसक होने की जानकारी मिलते ही सारण कलेक्टर वैभव श्रीवास्तव और SSP विनीत कुमार समेत कई सीनियर अफसर सुरक्षा बलों के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर माहौल कंट्रोल किया।
पटना के गांधी मैदान में छात्रों के समर्थन में जनशक्ति जनता दल (JJD) अध्यक्ष तेजप्रताप यादव शामिल हुए। यहां भी पुलिस पर पत्थरबाजी हुई, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ पर आंसू गैस के गोले दागे। एक ट्रैफिक पुलिस बूथ को भी नुकसान पहुंचाया गया। इस दौरान कई युवाओं के साथ तेजप्रताप यादव को भी हिरासत में ले लिया गया।
औरंगाबाद में भी विरोध प्रदर्शन के दौरान दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की रिपोर्ट्स हैं। उधर, छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने समस्तीपुर-पटना मेन रोड को जाम किया। पांच तस्वीरें...





देशभर में प्रोटेस्ट के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
जंतर-मंतर पर बीते एक महीने से चल रहा स्टूडेंट प्रोटेस्ट इस हफ्ते देशभर में फैल गया। 20 जुलाई को संसद मार्च के बाद इस आंदोलन में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। CJP ने साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही प्रदर्शन खत्म होगा। इस मांग के आगे सरकार भी दबाव में नजर आने लगी थी। आखिरकार 25 जुलाई की दोपहर होते-होते धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। CJP लीडर्स ने इसे छात्रों की जीत बताया है। विपक्षी पार्टियां भी इसे देश के भविष्य की जीत बता रही हैं।
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