गुना की तात्या टोपे यूनिवर्सिटी के BA-BSc रिजल्ट में गड़बड़ी का आरोप: AIDSO का प्रदर्शन; सप्लीमेंट्री फीस और पुनर्मूल्यांकन को लेकर सौंपा ज्ञापन
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उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की कर रहें मांग
गुना। तात्या टोपे यूनिवर्सिटी द्वारा हाल ही में घोषित बीए और बीएससी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र संगठन AIDSO ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा परिणाम में सुधार करने तथा प्रभावित विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग उठाई। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
40 से अधिक कॉलेज विश्वविद्यालय से संबद्ध
छात्र संगठन AIDSO के जिला अध्यक्ष शुभम राव ने बताया कि तात्या टोपे यूनिवर्सिटी के अंतर्गत 40 से अधिक कॉलेज आते हैं। जिले के पीजी कॉलेज में ही 18 हजार से अधिक विद्यार्थी नियमित रूप से अध्ययनरत हैं। इन कॉलेजों में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों से विद्यार्थी बेहतर शिक्षा प्राप्त करने की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय और कॉलेजों में व्याप्त अनियमितताओं के कारण विद्यार्थियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि कई विद्यार्थी अपनी पढ़ाई तक छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
दो विषयों में बड़ी संख्या में सप्लीमेंट्री का आरोप
शुभम राव ने बताया कि हाल ही में घोषित बीए और बीएससी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणामों में भारत-बोध और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को सप्लीमेंट्री दी गई है। जबकि परीक्षा के दौरान ही इन विषयों के प्रश्नपत्रों में हुई गलतियों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को अवगत कराया गया था। बीएससी प्रथम वर्ष के भारत-बोध विषय का प्रश्नपत्र केवल हिंदी माध्यम में उपलब्ध कराया गया, जबकि अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अंग्रेजी में प्रश्नपत्र नहीं दिया गया। वहीं व्यक्तित्व विकास विषय के प्रश्नपत्र में चार प्रश्न दोहराए गए थे।
निष्पक्ष जांच की कर रहें मांग
छात्र संगठन का कहना है कि उस समय विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया था कि इन विषयों में किसी भी विद्यार्थी का परिणाम खराब नहीं होगा। इसके बावजूद परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को इन्हीं विषयों में सप्लीमेंट्री मिलना कई सवाल खड़े करता है। संगठन ने यह भी कहा कि मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से प्रश्नपत्र तैयार करवाए थे। ऐसे में प्रश्नपत्रों में हुई त्रुटियों और परिणामों में आई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
परिणामों में गड़बड़ी का दावा
संगठन के अनुसार कई विद्यार्थियों की पांच से सात से अधिक विषयों में सप्लीमेंट्री आई है। पीजी कॉलेज में कुछ ऐसे विद्यार्थी भी हैं, जिनकी नौ विषयों तक में सप्लीमेंट्री आई है। सबसे बड़ी परेशानी सप्लीमेंट्री परीक्षा की फीस को लेकर है। एक विषय की सप्लीमेंट्री का फॉर्म भरने के लिए लगभग 1450 रुपये देने पड़ते हैं। ऐसे में पांच विषयों की सप्लीमेंट्री का खर्च हजारों रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि नौ विषयों की सप्लीमेंट्री देने वाले विद्यार्थियों को आठ हजार रुपये से अधिक का आर्थिक भार उठाना पड़ सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए इतनी बड़ी राशि जमा करना बेहद मुश्किल है।
सप्लीमेंट्री फीस पर भी उठ रहें सवाल
शुभम राव ने कॉलेज में शिक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से बातचीत में सामने आया है कि भारत-बोध और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों की नियमित कक्षाएं तक नहीं लगाई गईं। इन विषयों के लिए न तो पर्याप्त किताबें उपलब्ध कराई गईं और न ही शिक्षकों की उचित व्यवस्था की गई। इसके बावजूद विद्यार्थियों से परीक्षा ली गई और अब उन्हें सप्लीमेंट्री का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन और शिक्षक ही उपलब्ध नहीं कराए गए तो परीक्षा परिणाम की जिम्मेदारी किसकी है?
आर्थिक दबाव के कारण विद्यार्थी परेशान
AIDSO ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। आज विद्यार्थियों को पढ़ाई और शैक्षणिक सुविधाओं से ज्यादा फीस तथा परीक्षा संबंधी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण कई विद्यार्थी मानसिक परेशानी से भी गुजर रहे हैं।
पुनर्मूल्यांकन की मांग
छात्र संगठन AIDSO ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि बीए और बीएससी प्रथम वर्ष के घोषित परीक्षा परिणामों में हुई गड़बड़ियों को तत्काल सुधारा जाए। प्रथम वर्ष के सभी प्रभावित विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए और इच्छुक विद्यार्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं दिखाई जाएं। इसके साथ ही सप्लीमेंट्री परीक्षा की फीस कम से कम रखी जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी भी अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सकें।
शुभम राव, AIDSO जिला अध्यक्ष गुना

