श्योपुर चीता गोलीकांड : एसओपी के पालन में बड़ी चूक का खुलासा, घायल चीते को देरी से मिला इलाज; जांच के दायरे पर उठे सवाल
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चीते को गोली मारकर घायल करने के मामले में जांच के साथ नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं, फाइल फोटो।
भोपाल। श्योपुर के जंगल में चीते को गोली मारकर घायल करने के मामले में जांच के साथ नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब चीते की निगरानी के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन में भी गंभीर चूक की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि जिस दिन 19 माह के नर चीते KNG-22 को गोली लगने से घायल होने की घटना हुई, उस दिन मॉनिटरिंग सेल ने संबंधित वन मंडल के कर्मचारियों को इसकी सूचना ही नहीं दी। जबकि एसओपी के अनुसार चीते के एक वन क्षेत्र से दूसरे वन मंडल की सीमा में पहुंचने पर मॉनिटरिंग सेल को संबंधित वन मंडल के अमले को सूचित करना अनिवार्य है।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में केवल सूचना देने में ही लापरवाही नहीं हुई, बल्कि घायल चीते को समय पर उपचार दिलाने में भी देरी की गई। कूनो राष्ट्रीय उद्यान के कर्मचारी घायल चीते को तीन से चार घंटे तक देखते रहे। इस दौरान उसकी हालत लगातार गंभीर होती गई। समय पर उपचार और तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने में हुई देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि निगरानी व्यवस्था के तहत समय रहते संबंधित अमले को सूचना दी जाती और तत्काल कार्रवाई होती, तो चीते को जल्द उपचार मिल सकता था।
जांच के दायरे में कूनो का अमला क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में अब एसटीएफ (STF) की जांच की निष्पक्षता और उसके दायरे को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कूनो के कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय दूसरे वन मंडलों के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि पूरे मामले में कुछ अधिकारियों को बचाने के लिए निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई केंद्रित की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
एसओपी के पालन और जिम्मेदारी तय करने पर सवाल
चीता संरक्षण परियोजना में निगरानी व्यवस्था को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में एसओपी के पालन में कथित चूक, मॉनिटरिंग सेल की निष्क्रियता और घायल चीते को उपचार मिलने में देरी जैसे बिंदुओं की जांच जरूरी है। अब सवाल यह है कि एसटीएफ इन पहलुओं की भी जांच करेगी या नहीं और घटना के समय निगरानी से लेकर उपचार तक जिम्मेदार रहे सभी अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?

