सागर में मां के बाद 20 वर्षीय बेटी के सिर से उठा पिता का साया: मजदूर पिता की अर्थी को कंधा देकर दी मुखाग्नि, बेसहारा हुई छात्रा ने प्रशासन से मांगी मदद
Published:
2 min read

सागर में मां के बाद 20 वर्षीय बेटी के सिर से उठा पिता का साया
सागर। मां के बाद अब पिता का साया भी उठ गया। सागर के तुलसीनगर वार्ड में 20 वर्षीय कविता ने अपने पिता लखनलाल अहिरवार की अर्थी को कंधा देकर और मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। नरयावली नाका मुक्तिधाम में यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
बिना मां के पाला इकलौती बेटी को
51 वर्षीय लखनलाल अहिरवार मजदूरी कर परिवार चलाते थे। उनकी पत्नी मीना अहिरवार का निधन उस समय हो गया था, जब कविता महज दो साल की थी। इसके बाद लखनलाल ने अकेले ही बेटी की परवरिश की। मजदूरी से होने वाली कमाई से उसकी जरूरतें पूरी कीं और पढ़ाई जारी रखी।
हार्ट अटैक से पिता की मौत
कविता अब 20 साल की है और नर्सिंग का कोर्स कर रही है। पिता ही उसके लिए मां और पिता दोनों की भूमिका निभा रहे थे। देर रात अचानक हार्ट अटैक आने से लखनलाल की तबीयत बिगड़ गई। कविता उन्हें अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
बेटी ने निभाई अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी
पिता की अंतिम विदाई के समय परिवार में कोई बेटा नहीं होने पर कविता ने सारी जिम्मेदारी संभाली। उसने पिता की अर्थी को कंधा दिया और नरयावली नाका मुक्तिधाम पहुंचकर मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद रिश्तेदार और परिचित भावुक हो गए।
पढ़ाई और नौकरी के लिए लगाई गुहार
परिवार और रिश्तेदारों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से कविता की आगे की पढ़ाई की व्यवस्था कराने और उसे नर्सिंग की नौकरी दिलाने में मदद करने की अपील की है। मां और पिता दोनों को खो चुकी कविता के सामने अब अपनी पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी भी है।
स्थानीय रहवासी
रिश्तेदार

