रीवा के अमिलकी गांव में बिना डायवर्सन काटे जा रहे थे प्लॉट: ग्रामीणों ने की शिकायत, जांच में बिना अनुमती प्लॉटिंग का खुलासा; तहसीलदार ने SDM को सौंपी रिपोर्ट
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गोविंदगढ़ तहसील के अमिलकी गांव में विंड ग्रुप की प्लॉटिंग को लेकर ग्रामीणों ने की शिकायत, AI फोटो।
रीवा। जिले में कथित अवैध प्लॉटिंग का मामला एक बार फिर सामने आया है। गोविंदगढ़ तहसील के अमिलकी गांव में विंड ग्रुप द्वारा की जा रही प्लॉटिंग को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत की थी। शिकायत पर कलेक्टर ने तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए। राजस्व विभाग की जांच में सामने आया कि संबंधित कृषि भूमि का डायवर्सन कराए बिना ही उस पर भूखंड काटे जा रहे थे और उनकी बिक्री की प्रक्रिया की जा रही थी।
तहसीलदार ने SDM को सौंपा जांच प्रतिवेदन
शिकायत के बाद राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन के दस्तावेजों और प्लॉटिंग की वैधानिक स्थिति की जांच की। जांच के बाद तहसीलदार ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM) को प्रतिवेदन सौंपा। इसमें प्लॉटिंग के लिए जरूरी अनुमति नहीं लिए जाने का उल्लेख किया गया है। अब इस प्रतिवेदन के आधार पर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है।
महंगे दामों पर प्लॉट बेचने का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बीके माला ने आरोप लगाया कि रीवा शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि खरीदकर नियमों की अनदेखी करते हुए महंगे दामों पर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। इससे शासन को राजस्व का नुकसान होने के साथ जमीन खरीदने वाले लोगों के भविष्य में कानूनी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों में फंसने का खतरा है।
राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल
बीके माला ने राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि स्थानीय स्तर पर कथित मिलीभगत के चलते ऐसी गतिविधियों की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचती। फिलहाल अमिलकी मामले में तहसीलदार का जांच प्रतिवेदन प्रशासन के पास पहुंच चुका है। अब देखना होगा कि प्रशासन संबंधित प्लॉटिंग पर क्या कार्रवाई करता है और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कैसे तय की जाती है।
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